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Aligarh News: शिक्षक नेता गुड्डू मास्टर हत्याकांड में दो को उम्रकैद
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प्रतीकात्मक फोटो।
प्रधानी की रंजिश में करीब दस वर्ष पहले हुई शिक्षक नेता जितेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू मास्टर की हत्या के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। पीठासीन अधिकारी तोप कुमार शर्मा (उच्चतर न्यायिक सेवा) की अदालत ने निशांत उर्फ कुच्ची और संकेत उर्फ वेदू को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
इस मामले में अदालत ने दो अन्य आरोपी प्रमोद कुमार शर्मा और रामू ठाकुर को आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत दोषी पाते हुए पांच-पांच वर्ष के कारावास और तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, जेल में रहते हुए हत्या की साजिश रचने के आरोप का सामना कर रहे नीर प्रकाश उर्फ नीरू और मुकेश को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कुल अर्थदंड में से आधी राशि मृतक की पत्नी पूनम को प्रतिकर के रूप में दिए जाने का आदेश दिया है। फैसले के बाद वादी पक्ष ने चार आरोपियों के बरी होने पर असंतोष जताते हुए हाईकोर्ट में अपील की बात कही है। वहीं बचाव पक्ष ने भी कहा है कि अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की जाएगी।
रंजिश की पृष्ठभूमि है काफी पुरानी
मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2010 से जुड़ी है। अकराबाद के नगरिया पट्टी चाहरम निवासी संकेत और निशांत के पिता अशोक कुमार सिंह पर बीदास कंपाउंड स्थित उनके घर पर गोली चली थी। पुलिस जांच में घटना के पीछे गांव की प्रधानी को लेकर चली आ रही रंजिश सामने आई थी। इस मामले में गुड्डू मास्टर और उनके एक साथी को आरोपी बनाया गया था, लेकिन बाद में दोनों साक्ष्यों के अभाव में बरी हो गए थे। इसके बाद भी दोनों पक्षों के बीच रंजिश खत्म नहीं हुई।
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इसके बाद वर्ष 2015 में ग्राम प्रधान की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई। गुड्डू मास्टर पक्ष ने हीरा सिंह को चुनाव मैदान में उतारा, जबकि नीर प्रकाश उर्फ नीरू पक्ष ने अपना प्रत्याशी खड़ा किया। पुलिस विवेचना के मुताबिक चुनाव प्रचार के दौरान हीरा सिंह को चुनाव से हटने की धमकी दी गई। बाद में हीरा सिंह की हत्या हो गई। इस मामले में नीरू और उसके पक्ष के लोगों को नामजद कर जेल भेजा गया।
हीरा सिंह हत्याकांड की पैरवी कर रहे तोताराम की भी वर्ष 2016 में छर्रा अड्डा क्षेत्र में हत्या कर दी गई। शुरुआत में इस मामले में गुड्डू मास्टर और उनके साथियों को नामजद किया गया था। बाद की जांच में पुलिस ने हत्याकांड की दिशा नीरू और उसके समर्थकों की ओर मोड़ी। घटनाओं की इस कड़ी के बाद दोनों पक्षों के बीच रंजिश और गहरी होती गई।
19 दिसंबर 2016 की सुबह हुई थी हत्या
19 दिसंबर 2016 की सुबह करीब 10:25 बजे गुड्डू मास्टर डीएएस डिग्री कॉलेज के सामने बैंक से काम निपटाकर स्कूटी से घर लौट रहे थे। उनके पीछे छोटे भाई विशाल सिंह और परिचित यशपाल सिंह बाइक से आ रहे थे। आरोप है कि छर्रा अड्डा पुल पर डीएवी इंटर कॉलेज के सामने हमलावरों ने उन्हें घेर लिया और ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। गंभीर रूप से घायल गुड्डू मास्टर को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर छह गोली लगने की बात सामने आई थी।
विवेचना के दाैरान जुड़े अन्य आरोपियों के नाम
गुड्डू मास्टर की हत्या मामले में विशाल सिंह की तहरीर पर क्वार्सी थाने में संकेत, निशांत और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या समेत गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ। विवेचना के दौरान जेल में बंद नीर प्रकाश उर्फ नीरू और मुकेश को भी आरोपी बनाया गया। पुलिस का आरोप था कि दोनों ने जेल से हत्या की साजिश रची। इसके अलावा रामू ठाकुर और प्रमोद कुमार शर्मा को भी हत्याकांड में आरोपी बनाया गया। इस तरह छह आरोपी मुकदमे में विचारण का सामना करने पहुंचे। अभियोजन ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखा। सुनवाई के दौरान संकेत की ओर से घटना के समय हाईकोर्ट में मौजूद होने का बचाव लिया गया और प्रवेश आईकार्ड व हाजिरी से संबंधित दस्तावेज पेश किए गए। हालांकि अदालत ने इस बचाव को स्वीकार नहीं किया और संकेत तथा निशांत को हत्या का दोषी ठहराया।
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इस मामले में अदालत ने दो अन्य आरोपी प्रमोद कुमार शर्मा और रामू ठाकुर को आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत दोषी पाते हुए पांच-पांच वर्ष के कारावास और तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, जेल में रहते हुए हत्या की साजिश रचने के आरोप का सामना कर रहे नीर प्रकाश उर्फ नीरू और मुकेश को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कुल अर्थदंड में से आधी राशि मृतक की पत्नी पूनम को प्रतिकर के रूप में दिए जाने का आदेश दिया है। फैसले के बाद वादी पक्ष ने चार आरोपियों के बरी होने पर असंतोष जताते हुए हाईकोर्ट में अपील की बात कही है। वहीं बचाव पक्ष ने भी कहा है कि अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की जाएगी।
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रंजिश की पृष्ठभूमि है काफी पुरानी
मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2010 से जुड़ी है। अकराबाद के नगरिया पट्टी चाहरम निवासी संकेत और निशांत के पिता अशोक कुमार सिंह पर बीदास कंपाउंड स्थित उनके घर पर गोली चली थी। पुलिस जांच में घटना के पीछे गांव की प्रधानी को लेकर चली आ रही रंजिश सामने आई थी। इस मामले में गुड्डू मास्टर और उनके एक साथी को आरोपी बनाया गया था, लेकिन बाद में दोनों साक्ष्यों के अभाव में बरी हो गए थे। इसके बाद भी दोनों पक्षों के बीच रंजिश खत्म नहीं हुई।
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इसके बाद वर्ष 2015 में ग्राम प्रधान की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई। गुड्डू मास्टर पक्ष ने हीरा सिंह को चुनाव मैदान में उतारा, जबकि नीर प्रकाश उर्फ नीरू पक्ष ने अपना प्रत्याशी खड़ा किया। पुलिस विवेचना के मुताबिक चुनाव प्रचार के दौरान हीरा सिंह को चुनाव से हटने की धमकी दी गई। बाद में हीरा सिंह की हत्या हो गई। इस मामले में नीरू और उसके पक्ष के लोगों को नामजद कर जेल भेजा गया।
हीरा सिंह हत्याकांड की पैरवी कर रहे तोताराम की भी वर्ष 2016 में छर्रा अड्डा क्षेत्र में हत्या कर दी गई। शुरुआत में इस मामले में गुड्डू मास्टर और उनके साथियों को नामजद किया गया था। बाद की जांच में पुलिस ने हत्याकांड की दिशा नीरू और उसके समर्थकों की ओर मोड़ी। घटनाओं की इस कड़ी के बाद दोनों पक्षों के बीच रंजिश और गहरी होती गई।
19 दिसंबर 2016 की सुबह हुई थी हत्या
19 दिसंबर 2016 की सुबह करीब 10:25 बजे गुड्डू मास्टर डीएएस डिग्री कॉलेज के सामने बैंक से काम निपटाकर स्कूटी से घर लौट रहे थे। उनके पीछे छोटे भाई विशाल सिंह और परिचित यशपाल सिंह बाइक से आ रहे थे। आरोप है कि छर्रा अड्डा पुल पर डीएवी इंटर कॉलेज के सामने हमलावरों ने उन्हें घेर लिया और ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। गंभीर रूप से घायल गुड्डू मास्टर को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर छह गोली लगने की बात सामने आई थी।
विवेचना के दाैरान जुड़े अन्य आरोपियों के नाम
गुड्डू मास्टर की हत्या मामले में विशाल सिंह की तहरीर पर क्वार्सी थाने में संकेत, निशांत और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या समेत गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ। विवेचना के दौरान जेल में बंद नीर प्रकाश उर्फ नीरू और मुकेश को भी आरोपी बनाया गया। पुलिस का आरोप था कि दोनों ने जेल से हत्या की साजिश रची। इसके अलावा रामू ठाकुर और प्रमोद कुमार शर्मा को भी हत्याकांड में आरोपी बनाया गया। इस तरह छह आरोपी मुकदमे में विचारण का सामना करने पहुंचे। अभियोजन ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखा। सुनवाई के दौरान संकेत की ओर से घटना के समय हाईकोर्ट में मौजूद होने का बचाव लिया गया और प्रवेश आईकार्ड व हाजिरी से संबंधित दस्तावेज पेश किए गए। हालांकि अदालत ने इस बचाव को स्वीकार नहीं किया और संकेत तथा निशांत को हत्या का दोषी ठहराया।