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फैक्ट्री में ली पनाह, वहां भी पहुंची मौत

Sun, 15 Nov 2015 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ आशीष निगम
अमर उजाला ब्यूरो/ आशीष निगम Updated Sun, 15 Nov 2015 01:36 AM IST
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Took refuge in the factory , there also came death
गुरुवार रात 11 बजे शोहराब का फून आया..। डरा हुआ बोला.. अब्बा दंगा हो गया है..। सब कह रहे हैं यहीं रुक जाओ..। जब बलवा कम हो तो घर चले जाना..। यहीं भाईजान की फैक्ट्री में कुछ दूसरे लेबर रुक रहे हैं उनके साथ ही रुक जाऊंगा..। सुबह आऊंगा..। शोहराब के पिता मो. चमन ने बताया कि कोई एक डेढ़ मिनट बात हुई। इसके बाद सुबह पांच बजे दूसरे लेबरों ने उसके ही फून से मुझे जगाया।
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लेबरों ने बताया कि बहुत तेज करंट लगने के बाद शोहराब बेहोश हो गया है..। सलमान नाम के लेबर ने बिजली की लाइन बंद कर दी है। इतना सुनकर पैरों तले जमीन खिसक  गई..। पूरे घर में बवाल की दहशत थी उस पर बेटे के साथ अनहोनी की खबर ने अंदर तक झकझोर दिया। उसकी मां आयशा गश खाकर गिर पड़ीं। कुछ लोगों को साथ लेकर फैक्ट्री पहुंचे और शोहराब को लेकर मेडिकल कॉलेज गए। जहां डॉक्टरों ने कहा कि बच्चा अब नहीं रहा..। घर में कोहराम मच गया। उसकी मैयत भी संकरी गलियों से होकर बहुत परेशानी से कब्रिस्तान पहुंची। पुलिस का कहना था कि जवान मौत देख कर कहीं बवाल और न बढ़ जाए.. इसलिए खामोशी से जनाजा निकाल लो..।
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देहलीगेट चौराहे से खैर रोड के रास्ते शाहजमाल कब्रिस्तान जाना था लेकिन उस्मानपाड़ा, जंगलगढ़ी के रास्ते शाहजमाल कब्रिस्तान पहुंचे। क्योंकि एसएसपी साहब अमन चैन बनाए रखने के लिए यही रास्ता बता चुके थे। सूनी आंखों को पोंछ कर चमन बोले.. पता नहीं था कि बवाल से बचने के लिए जो बच्चा घर से दूर रहा, पांच घंटे में ही उसकी मौत की खबर आएगी।
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गुरुवार की रात जब देहलीगेट के सरायमियां और कैलाश गली में बवाल हो रहा था तो गोलियां की गूंज से सहमे कई लोग अपनी जान बचाने को इधर उधर रुक गये थे। उसी दौरान शोहराब के साथ ये हादसा हुआ। चमन पहले परिवार के साथ देहलीगेट के हाथी वाला पुल के पास सड़क पर बने मकान में रहते थे लेकिन अब भुजपुरा में हरी मसजिद के पास किराए के मकान में रह रहे हैं।

शोहराब से छोटी बहन अरशी (18 साल) तेज बुखार के कारण ठा.मलखान सिंह जिला अस्पताल में भर्ती है। उससे छोटी गौसिया (16 साल), सोपिंया (13 साल), नवेद (12 साल), आदिल (10 साल), इलमा (8 साल), खुशनुमा (7 साल) हैं। 15 साल से ताला बनाने वाली पॉवर प्रेस में काम कर रहे चमन अपनी तीन अंगुलियां गंवा चुके हैं।


घर पर चमन के अलावा शोहराब ही कमाने वाला था, जिससे परिवार का गुजारा होता था। अब पूरा बोझ चमन के कंधों पर आ गया है। चमन बोले.. कि हिंदू मुसलमान के नाम पर राजनीति करने वाले लोग अगर लोगों को भड़काएं नहीं तो ये फसाद नहीं होंगे। अगर देहलीगेट में बवाल नहीं होता तो शोहराब भुजपुरा आ जाता और आज जिंदा होता..।
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