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एंबुलेंस माफिया घोषित होंगे टिप्पा के भाई असलम-अशरफ
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जेएन मेडिकल कॉलेज से संगठित गिरोह के रूप में एंबुलेंस कारोबार संचालित कर रहे कुख्यात अपराधी अकरम टिप्पा के भाई असलम-अशरफ अब एंबुलेंस माफिया घोषित किए जाने की तैयारी में हैं। पुलिस स्तर से उनके खिलाफ गैंगेस्टर के साथ-साथ चिह्नित माफिया घोषित करने संबंधी औपचारिकताएं शुरू कर दी गई हैं। बता दें कि ये दोनों भाई काफी समय से पुलिस के रडार पर थे। पिछले दिनों इनके खिलाफ पुलिस ने शिकायत मिलने पर मुकदमा दर्ज कर यह कार्रवाई शुरू कर दी है।
ये हुआ पिछले दिनों घटनाक्रम
अतरौली के दीपक शर्मा आजाद की ओर से 25 मई को सिविल लाइंस पुलिस को यह तहरीर दी गई कि जेएन मेडिकल कॉलेज के बाहर अवैध रूप से एंबुलेंस गिरोह संचालित कर रहे दोनों भाई असलम व अशरफ ने आतंक मचा रखा है। ये अपने कुख्यात अपराधी रासुका में निरुद्ध भाई अकरम टिप्पा की धमकी देते हैं, जिस पर 29 मुकदमे दर्ज हैं। तहरीर के अनुसार देहात क्षेत्र से आने वाले मरीजों को ये निजी अस्पताल लांग लाइफ में ले जाते हैं। जो बात नहीं मानते उन्हें डराते धमकाते और पीटते हैं। एएमयू से नियमानुसार पंजीयन से संचालित एंबुलेंसों के संचालकों को भी अपने भाई की धमकी देते हैं। जिन अस्पतालों में ये मरीजों को ले जाते हैं। वहां न एमबीबीएस डॉक्टर हैं और न कोई बेहोशी का डॉक्टर। फिर वहां मरीजों से अवैध रूप से धन वसूली होती है। इस मामले में पुलिस ने दोनों पर मुकदमा दर्ज किया। तभी से ये फरार चल रहे हैं।
इस तरह है कमीशनखोरी का ये धंधा
पुलिस की अब तक की जांच में उजागर हुआ है कि इन दोनों भाइयों ने करीब डेढ़ दर्जन एंबुलेंस संचालित कर रखी हैं। दबंगई और मेडिकल कॉलेज के निचले स्तर के स्टाफ से साठगांठ के दम पर यहां से मरीजों को मनमर्जी रेफर करा लेते हैं। इसके बदले इन्हें मोटा कमीशन मिलता है। लांग लाइफ नाम से एक खुद की देखरेख में भी नर्सिंग होम संचालित कर रखा है। उजागर हुआ है कि कमीशन के लिए ये अलीगढ़ के तमाम निजी अस्पतालों के अलावा दूसरे शहरों तक में मरीज पहुंचाते हैं, जबकि एएमयू में पंजीकृत एंबुलेंस संचालक जो सिर्फ भाड़े पर मरीज लाते हैं, उन्हें मौका नहीं देते। जब कभी पंजीकृत एंबुलेंस संचालकों के दबाव में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के कुछ अधिकारी इनका विरोध करते हैं तो उन पर भी रौब गालिब करने, डराने, धमकाने तक से नहीं चूकते। पिछले दिनों इसी क्रम में एक मेडिकल कॉलेज के अधिकारी के घर फायरिंग की घटना भी हुई थी। इन पर पुलिस रिकार्ड में पांच मुकदमे पहले से दर्ज हैं।
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अब नकेल कसने की तैयारी
सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय के अनुसार पुलिस जांच में इन दोनों भाइयों पर अवैध रूप से संगठित होकर एंबुलेंस माफिया के रूप में कारोबार करना उजागर हुआ है। इनके खिलाफ गैंगेस्टर व माफिया पंजीकरण की कार्रवाई की तैयारी है। साथ में इनके कारोबार से जुड़ी एंबुलेंसों के पंजीकरण व अन्य अर्जित संपत्ति का ब्योरा जुटाया जाएगा, जिसमें आगे कार्रवाई तय की जाएगी। इस विषय पर तेजी से काम चल रहा है। जल्द कार्रवाई सार्वजनिक की जाएगी।
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ये हुआ पिछले दिनों घटनाक्रम
अतरौली के दीपक शर्मा आजाद की ओर से 25 मई को सिविल लाइंस पुलिस को यह तहरीर दी गई कि जेएन मेडिकल कॉलेज के बाहर अवैध रूप से एंबुलेंस गिरोह संचालित कर रहे दोनों भाई असलम व अशरफ ने आतंक मचा रखा है। ये अपने कुख्यात अपराधी रासुका में निरुद्ध भाई अकरम टिप्पा की धमकी देते हैं, जिस पर 29 मुकदमे दर्ज हैं। तहरीर के अनुसार देहात क्षेत्र से आने वाले मरीजों को ये निजी अस्पताल लांग लाइफ में ले जाते हैं। जो बात नहीं मानते उन्हें डराते धमकाते और पीटते हैं। एएमयू से नियमानुसार पंजीयन से संचालित एंबुलेंसों के संचालकों को भी अपने भाई की धमकी देते हैं। जिन अस्पतालों में ये मरीजों को ले जाते हैं। वहां न एमबीबीएस डॉक्टर हैं और न कोई बेहोशी का डॉक्टर। फिर वहां मरीजों से अवैध रूप से धन वसूली होती है। इस मामले में पुलिस ने दोनों पर मुकदमा दर्ज किया। तभी से ये फरार चल रहे हैं।
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इस तरह है कमीशनखोरी का ये धंधा
पुलिस की अब तक की जांच में उजागर हुआ है कि इन दोनों भाइयों ने करीब डेढ़ दर्जन एंबुलेंस संचालित कर रखी हैं। दबंगई और मेडिकल कॉलेज के निचले स्तर के स्टाफ से साठगांठ के दम पर यहां से मरीजों को मनमर्जी रेफर करा लेते हैं। इसके बदले इन्हें मोटा कमीशन मिलता है। लांग लाइफ नाम से एक खुद की देखरेख में भी नर्सिंग होम संचालित कर रखा है। उजागर हुआ है कि कमीशन के लिए ये अलीगढ़ के तमाम निजी अस्पतालों के अलावा दूसरे शहरों तक में मरीज पहुंचाते हैं, जबकि एएमयू में पंजीकृत एंबुलेंस संचालक जो सिर्फ भाड़े पर मरीज लाते हैं, उन्हें मौका नहीं देते। जब कभी पंजीकृत एंबुलेंस संचालकों के दबाव में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के कुछ अधिकारी इनका विरोध करते हैं तो उन पर भी रौब गालिब करने, डराने, धमकाने तक से नहीं चूकते। पिछले दिनों इसी क्रम में एक मेडिकल कॉलेज के अधिकारी के घर फायरिंग की घटना भी हुई थी। इन पर पुलिस रिकार्ड में पांच मुकदमे पहले से दर्ज हैं।
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अब नकेल कसने की तैयारी
सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय के अनुसार पुलिस जांच में इन दोनों भाइयों पर अवैध रूप से संगठित होकर एंबुलेंस माफिया के रूप में कारोबार करना उजागर हुआ है। इनके खिलाफ गैंगेस्टर व माफिया पंजीकरण की कार्रवाई की तैयारी है। साथ में इनके कारोबार से जुड़ी एंबुलेंसों के पंजीकरण व अन्य अर्जित संपत्ति का ब्योरा जुटाया जाएगा, जिसमें आगे कार्रवाई तय की जाएगी। इस विषय पर तेजी से काम चल रहा है। जल्द कार्रवाई सार्वजनिक की जाएगी।