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अलीगढ़ः दूसरों के यहां पल रही हैं तीन बेटियां, इलाज के लिए नहीं है पैसा
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साहब दूसरों के यहां तीन छोटी-छोटी बेटियां पल रही हैं। ससुर पागल हैं। पति संदीप कुमार रोडवेज बस चलाते समय हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज में आईसीयू में भर्ती हैं। इलाज के लिए तीन लाख रुपये कर्ज लिया था। वह खत्म हो गया है। अब न तो इलाज के लिए रुपये बचे हैं और न ही इलाज के बाद बच्चों का पेट पालने के लिए। पति अब कभी बस नहीं चला पाएंगे। आखिर इन बच्चों को लेकर मैं क्या करूं। यह मानवीय गुहार रोडवेज चालक की पत्नी उकावली जलाली निवासी लता ने परिवहन निगम के अधिकारियों से लगाई है।
बुद्धविहार डिपो के एआरएम कार्यालय में शिकायती पत्र दर्ज कराते हुए लता ने परिवहन निगम के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग की है। लता गुप्ता ने बताया कि जब वह एआरएम दफ्तर पहुंची तो अधिकारी नहीं मिले। डाक से पत्र दर्ज कराकर मदद की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। उन्होंने बताया कि उनके पति 16 नवंबर को ड्यूटी करने गए थे। टाइमकीपर ने दिल्ली-हरदोई के 1106 किमी के रूट पर भेज दिया। 18 तारीख को सुबह दस बजे वापस आए ही थे कि दोबारा से दोपहर में बस ले जाने के लिए कहा। संदीप ने मना किया तो संविदा खत्म करने और रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी दी गई। मजबूरन में वह बस लेकर गए तो दिल्ली से हरदोई जाते समय नींद आ गई और हादसा हो गया। पति के पेट में स्टेयरिंग घुस गई। तीन लाख रुपये इलाज में कर्ज लेकर लगाए हैं। अब कोई जमीन जायदाद नहीं है। तीन छोटी-छोटी बेटियां पड़ोसियों के यहां पल रही हैं। ससुर पागल हैं। अभी तो पति आईसीयू में भर्ती हैं। इलाज के बाद घर भी गए तो क्या खाएंगे। इसे लेकर परेशान हूं। क्योंकि न तो अब इलाज के लिए रुपये हैं और न ही खाने के लिए। अधिकारियों ने मदद के नाम पर सिर्फ दस हजार रुपये देकर पल्ला झाड़ लिया है। अगर विभाग ने मदद नहीं की तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाऊंगी। आखिरकार मेरे पति का दोष क्या था।
शराब पीकर गाड़ी चला रहा था संदीप
-लता ने बताया कि जब वह एआरएम दफ्तर में शिकायती पत्र लेकर गईं तो वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने कहा कि पति शराब पीकर गाड़ी चला रहा था। इसीलिए हादसा हुआ था। इस पर जब अधिकारियों से कहा कि शराब पी रखी थी तो गाड़ी क्यों दी गई। इस पर कोई जवाब नहीं दे पाया। लता ने बताया कि अधिकारी मामले को दबाना चाहते हैं। अभी तक आरोपी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कर्मचारी की गलती की वजह से सड़क पर आने की नौबत आ गई है। इसका जिम्मेदार कौन है।
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अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
अमर उजाला ने 24 नवंबर के अंक में पेज नंबर दो पर महरावल हादसा : 11सौ किमी बस चलाकर आया था ड्राइवर... तीन घंटे बाद फिर थमा दी चाभी शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिसमें परिवहन निगम द्वारा यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने जैसे प्रकरण को गंभीरता से उठाया गया था। खबर के माध्यम से बताया गया कि 18 नवंबर की रात को महरावल पर हुआ बस हादसा चालक संदीप द्वारा लगातार बस चलवाना है। 1100 किमी का सफर तय कर अलीगढ़ पहुंचे संदीप को आराम की बजाए दोबारा से तीन घंटे बाद बस पकड़ा दी गई। जिससे यात्रा के दौरान नींद आ गई और हादसा हो गया। हरदोई की एक महिला यात्री की मौके पर मौत हो गई। जबकि ड्राइवर के पेट में स्टेयरिंग घुसने पर ऑपरेशन हुआ है।
संदीप की पत्नी का शिकायती पत्र अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं मानवीयता के आधार पर उसकी मदद कराएंगे। उसके शिकायती पत्र का संज्ञान लेकर कार्रवाई करेंगे, लेकिन उससे पहले मानवीयता के आधार पर जल्द ही मदद की जाएगी।
- मो. परवेज खान, क्षेत्रीय प्रबंधक परिवहन निगम
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बुद्धविहार डिपो के एआरएम कार्यालय में शिकायती पत्र दर्ज कराते हुए लता ने परिवहन निगम के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग की है। लता गुप्ता ने बताया कि जब वह एआरएम दफ्तर पहुंची तो अधिकारी नहीं मिले। डाक से पत्र दर्ज कराकर मदद की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। उन्होंने बताया कि उनके पति 16 नवंबर को ड्यूटी करने गए थे। टाइमकीपर ने दिल्ली-हरदोई के 1106 किमी के रूट पर भेज दिया। 18 तारीख को सुबह दस बजे वापस आए ही थे कि दोबारा से दोपहर में बस ले जाने के लिए कहा। संदीप ने मना किया तो संविदा खत्म करने और रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी दी गई। मजबूरन में वह बस लेकर गए तो दिल्ली से हरदोई जाते समय नींद आ गई और हादसा हो गया। पति के पेट में स्टेयरिंग घुस गई। तीन लाख रुपये इलाज में कर्ज लेकर लगाए हैं। अब कोई जमीन जायदाद नहीं है। तीन छोटी-छोटी बेटियां पड़ोसियों के यहां पल रही हैं। ससुर पागल हैं। अभी तो पति आईसीयू में भर्ती हैं। इलाज के बाद घर भी गए तो क्या खाएंगे। इसे लेकर परेशान हूं। क्योंकि न तो अब इलाज के लिए रुपये हैं और न ही खाने के लिए। अधिकारियों ने मदद के नाम पर सिर्फ दस हजार रुपये देकर पल्ला झाड़ लिया है। अगर विभाग ने मदद नहीं की तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाऊंगी। आखिरकार मेरे पति का दोष क्या था।
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शराब पीकर गाड़ी चला रहा था संदीप
-लता ने बताया कि जब वह एआरएम दफ्तर में शिकायती पत्र लेकर गईं तो वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने कहा कि पति शराब पीकर गाड़ी चला रहा था। इसीलिए हादसा हुआ था। इस पर जब अधिकारियों से कहा कि शराब पी रखी थी तो गाड़ी क्यों दी गई। इस पर कोई जवाब नहीं दे पाया। लता ने बताया कि अधिकारी मामले को दबाना चाहते हैं। अभी तक आरोपी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कर्मचारी की गलती की वजह से सड़क पर आने की नौबत आ गई है। इसका जिम्मेदार कौन है।
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अमर उजाला ने 24 नवंबर के अंक में पेज नंबर दो पर महरावल हादसा : 11सौ किमी बस चलाकर आया था ड्राइवर... तीन घंटे बाद फिर थमा दी चाभी शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिसमें परिवहन निगम द्वारा यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने जैसे प्रकरण को गंभीरता से उठाया गया था। खबर के माध्यम से बताया गया कि 18 नवंबर की रात को महरावल पर हुआ बस हादसा चालक संदीप द्वारा लगातार बस चलवाना है। 1100 किमी का सफर तय कर अलीगढ़ पहुंचे संदीप को आराम की बजाए दोबारा से तीन घंटे बाद बस पकड़ा दी गई। जिससे यात्रा के दौरान नींद आ गई और हादसा हो गया। हरदोई की एक महिला यात्री की मौके पर मौत हो गई। जबकि ड्राइवर के पेट में स्टेयरिंग घुसने पर ऑपरेशन हुआ है।
संदीप की पत्नी का शिकायती पत्र अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं मानवीयता के आधार पर उसकी मदद कराएंगे। उसके शिकायती पत्र का संज्ञान लेकर कार्रवाई करेंगे, लेकिन उससे पहले मानवीयता के आधार पर जल्द ही मदद की जाएगी।
- मो. परवेज खान, क्षेत्रीय प्रबंधक परिवहन निगम