फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Thieves not known, out of 666 cases of theft, FR lodged in 580

पुलिस का खेल: चोरों का नहीं सुराग..चोरी के 666 मुकदमों में से 580 में लगी एफआर

Thu, 18 Jul 2024 02:38 PM IST
चमन शर्मा अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Thu, 18 Jul 2024 02:38 PM IST
सार

चोरी से जुड़े मुकदमों को लेकर साफ है कि बाइक चोरी के अधिकतर मामलों में बाइक बरामद न होने पर पीड़ित बीमा क्लेम लेता है। उसके मुकदमे को एफआर करने पर ही क्लेम लिया जाता है। इसके चलते उनसे जुड़े मुकदमों में एफआर अधिकांश लगती है।

विज्ञापन
Thieves not known, out of 666 cases of theft, FR lodged in 580
पुलिस प्रतीकात्मक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पुलिस चोरी जैसे अपराध में अपराधियों को हर कीमत पर पकड़ने और माल बरामद करने का दावा करती है। मगर, विवेचकों के स्तर विवेचनाओं का बोझ कम करने की दशा में कदम उठाकर एक ही अपराध में पकड़े गए अपराधियों पर अन्य मुकदमे खोल दिए जाते हैं। यह दिखा दिया जाता है कि चोरी का माल बरामद नहीं हुआ। प्रयास जारी हैं। इसी का परिणाम है कि बड़ी संख्या में प्रतिवर्ष चोरी के मुकदमों में एफआर लगती है। इसी वर्ष पिछले छह माह में दर्ज चोरी के 666 मुकदमों में से 580 में पुलिस ने एफआर लगाई है।

विज्ञापन


चोरी से जुड़े मुकदमों को लेकर साफ है कि बाइक चोरी के अधिकतर मामलों में बाइक बरामद न होने पर पीड़ित बीमा क्लेम लेता है। उसके मुकदमे को एफआर करने पर ही क्लेम लिया जाता है। इसके चलते उनसे जुड़े मुकदमों में एफआर अधिकांश लगती है। इसी तरह चोरी के अन्य मुकदमों में पुलिस स्तर से माल बरामद न होने की दशा में लंबे प्रयास के बाद एफआर लगाई जाती है।
विज्ञापन


दूसरा यह भी होता है कि किसी एक घटना के संबंध में चोरी के आरोपी पकड़े गए तो फिर आसपास की कई घटनाएं उन्हीं पर खोल दी जाती हैं। हालांकि, उन घटनाओं से संबंधित माल बरामद नहीं होता। बस अपराधियों की स्वीकारोक्ति काफी रहती है। इसी तरह की गवाही अपने जिले के पिछले तीन वर्ष के आंकड़े दे रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन


अलीगढ़ जिले में चोरी के मुकदमों में माल बरामदगी का प्रतिशत भी बहुत अच्छा है। प्रदेश स्तर पर इसकी तारीफ हुई है। हां, जिन मुकदमों में माल का ब्योरा नहीं मिल पाता या सही तथ्य सामने नहीं आते। या रंजिशन मुकदमे लिखवाए जाते हैं। उनमें साक्ष्य के अभाव में एफआर लगाना लाजमी होता है। -संजीव सुमन, एसएसपी

उदाहरण ये भी

केस-1
वो चक्कर लगाते रहे, पुलिस एफआर लगा चुकी थी

26 अक्तूबर 2021 को देहलीगेट थाना क्षेत्र के नगला मसानी निवासी राजेश जोशी की ताला फैक्टरी से ताला तोड़कर चोर पीतल धातु, चाभी आदि समेत करीब दो लाख का माल चोरी कर ले गए थे। पीड़ित कारोबारी ने थाने में मुकदमा दर्ज भी कराया। तीन साल में न तो चोर पकड़े गए न ही चोरी गया माल बरामद हो सका। राजेश जोशी थाने और चौकी के चक्कर ही काटते रह गए। बाद में उन्हें पता चला कि पुलिस ने घटना के तीन महीने बाद ही केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।

केस -2 
थाने से मिल रही थी दिलासा, कोर्ट से मिली एफआर की सूचना

30 जनवरी 2022 को थाना क्वार्सी क्षेत्र के रावणटीला रोड के संजय कुमार के घर से चोर दिनदहाड़े ताला तोड़कर लाखों रुपये का सामान चोरी कर ले गए। पीड़ित ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस कई महीने तक विवेचना करती रही। फिर भी चोर पकड़े न जा सके। वे लगातार थाने चक्कर लगाते रहे। मगर पुलिस ने गुपचुप मुकदमे में एफआर लगा दी। कोर्ट से इसकी सूचना मिली। इसकी अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। थक हार कर संजय कुमार अपने घर बैठ गए।

ये है ब्योरा
वर्ष             वाहन चोरी/एफआर कुल चोरी/एफआर

2024             217/199             666/580            
2023             239/201             914/813
2022             242/200             917/703
नोट: यह आंकड़ा तीन वर्ष में एक जनवरी से 30 जून तक का है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed