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लगता है पढ़ने और लिखने को अभी बहुत कुछ रह गया है : प्रो. इरफान हबीब

Thu, 12 Aug 2021 12:39 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 12 Aug 2021 12:39 AM IST
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there is still a lot left to read and write: Prof. Irfan Habib
प्रो. इरफान हबीब - फोटो : CITY OFFICE
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस और प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब 12 अगस्त (आज) 90 वर्ष के हो गए। इस लंबी जीवन यात्रा में उन्होंने इतिहास के लेखक के रूप में और इतिहास के शिक्षक के रूप में सफलतापूर्वक अपनी भूमिका अदा की है। प्रो. इरफान हबीब अपने तार्किक ऐतिहासिक ज्ञान के लिए जाने जाते हैं। साथ ही हिंदुत्व और मुस्लिम कट्टरपंथ के खिलाफ अपने मजबूत विचारों के लिए भी वह मशहूर हैं। अमर उजाला से विशेष बातचीत करते हुए प्रो. इरफान हबीब ने कहा कि ऐसा लगता है कि अभी भी पढ़ने और लिखने के लिए बहुत कुछ रह गया है। अब तक के जीवन सफर में जब मुड़कर देखता हूं तो अपनी ही की हुई गलतियां भी मालूम हो जाती हैं। लेकिन यह सब जिंदगी के साथ चलता रहता है।
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प्रो. इरफान हबीब कहते हैं कि उनके जन्मदिन पर उनके प्रशंसक छात्र और परिचित जो शुभकामनाएं दे रहे हैं, उसके लिए वह उनका आभार व्यक्त करते हैं। लोगों से उन्हें बहुत स्नेह मिला है। प्रो. इरफान हबीब का जन्म 1931 में गुजरात के वडोदरा में हुआ था। उनके पिता प्रो. हबीब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में इतिहास के ही प्रोफेसर थे। प्रो. इरफान हबीब की उच्च शिक्षा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से हुई है। 2005 में उनको भारत सरकार ने पद्मभूषण से सम्मानित किया। प्रो. इरफान हबीब रॉयल हिस्ट्री सोसाइटी ब्रिटेन सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। वे सिविल लाइन की बदरबाग कॉलोनी में रहते हैं और महामारी के दौरान अपना पूरा समय घर पर ही अध्ययन में बिता रहे हैं।
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प्रो. इरफान हबीब के जन्मदिन पर ऑनलाइन कार्यक्रम आज
अलीगढ़। प्रोफेसर इरफान हबीब के जन्मदिन पर सहमत सोशल साइंटिस्ट और तूलिका बुक्स की ओर से इन डिफेंस ऑफ हिस्ट्री नाम से एक ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें प्रसिद्ध इतिहासकार रोमिला थापर, अमिया कुमार बागची, आदित्य मुखर्जी, प्रभात पटनायक के साथ-साथ सीताराम येचुरी और प्रोफेसर शीरीन मूसवी शामिल होंगी।
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