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लापरवाही की नहीं सीमा नुमाइश का नहीं है बीमा
अमर उजाला ब्यूरो/ अलीगढ़।
Updated Sun, 07 Feb 2016 02:03 AM IST
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हमारे साथ तो कोई हादसा होगा ही नहीं! ऐसा मान लेने की मानसिकता केवल आम लोगों की ही नहीं बल्कि अलीगढ़ की प्रसिद्ध राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी (अलीगढ़ महोत्सव-2016) के आयोजकों की भी है। महज प्रीमियम का कुछ पैसा बचाने के लिए नुमाइश प्रशासन ने इस बार नुमाइश का बीमा ही नहीं कराया है।
ऐसे में नुमाइश में आने वाले हजारों लोग, दुकानदार, दर्शक औैर उनके करोड़ों रुपये के सामान की सुरक्षा ऊपर वाले के ही भरोसे हैं। चार साल पहले प्रशासन ने कृष्णांजलि नाट्यशाला और उसमें बैठे दर्शकों का बीमा कराया था। लेकिन इस बार ऐसा न करने के लिए प्रशासन की दलील है कि प्रीमियम का पैसा बेकार जाता है। इसलिए बीमा जरूरी नहीं।
नुमाइश परिसर में दो हजार कच्ची और पक्की दुकानों का बीमा नहीं कराया गया। इनमें अधिकांश कपड़े, शॉल, कंबल, खिलौने सहित सैकड़ों की तादात में टेंट हैं। कश्मीर सहित अन्य प्रदेशों से आए दुकानदारों के यहां 40-40 लाख रुपये तक का माल है। एक अनुमान के तहत नुमाइश परिसर में सौ करोड़ से ज्यादा का माल है और लगभग 20 हजार दर्शक और दुकानदार हर समय रहते हैं। रात आठ बजे के बाद यह संख्या पचास हजार तक पहुंच जाती है।
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बड़े आयोजनों के दौरान हादसा होने में हैरत नहीं। मेरठ, इलाहाबाद, लखनऊ, कोलकाता, दिल्ली जैसे स्थानों पर धार्मिक और सामाजिक समारोहों में हादसे हुुए और कई जानें भी गईं। पिछले वर्ष कृष्णांजलि नाट्यशाला सहित दो स्थानों पर आग लगी थी। इसके बाद ही इस बार शायद यह बातें भुला दी गईं। ऐसे हालात में प्रदेश सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के स्पष्ट निर्देश हैं कि जनता की सुरक्षा में कोई कोताही नहीं बरती जाए।
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ऐसे में नुमाइश में आने वाले हजारों लोग, दुकानदार, दर्शक औैर उनके करोड़ों रुपये के सामान की सुरक्षा ऊपर वाले के ही भरोसे हैं। चार साल पहले प्रशासन ने कृष्णांजलि नाट्यशाला और उसमें बैठे दर्शकों का बीमा कराया था। लेकिन इस बार ऐसा न करने के लिए प्रशासन की दलील है कि प्रीमियम का पैसा बेकार जाता है। इसलिए बीमा जरूरी नहीं।
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नुमाइश परिसर में दो हजार कच्ची और पक्की दुकानों का बीमा नहीं कराया गया। इनमें अधिकांश कपड़े, शॉल, कंबल, खिलौने सहित सैकड़ों की तादात में टेंट हैं। कश्मीर सहित अन्य प्रदेशों से आए दुकानदारों के यहां 40-40 लाख रुपये तक का माल है। एक अनुमान के तहत नुमाइश परिसर में सौ करोड़ से ज्यादा का माल है और लगभग 20 हजार दर्शक और दुकानदार हर समय रहते हैं। रात आठ बजे के बाद यह संख्या पचास हजार तक पहुंच जाती है।
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बड़े आयोजनों के दौरान हादसा होने में हैरत नहीं। मेरठ, इलाहाबाद, लखनऊ, कोलकाता, दिल्ली जैसे स्थानों पर धार्मिक और सामाजिक समारोहों में हादसे हुुए और कई जानें भी गईं। पिछले वर्ष कृष्णांजलि नाट्यशाला सहित दो स्थानों पर आग लगी थी। इसके बाद ही इस बार शायद यह बातें भुला दी गईं। ऐसे हालात में प्रदेश सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के स्पष्ट निर्देश हैं कि जनता की सुरक्षा में कोई कोताही नहीं बरती जाए।