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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   The words of knowledge and science reach directly to the heart in their own language.

अपनी भाषा में सीधे दिल तक पहुंचती हैं ज्ञान-विज्ञान की बातें

Sun, 08 Aug 2021 12:52 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 08 Aug 2021 12:52 AM IST
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The words of knowledge and science reach directly to the heart in their own language.
डॉ. मंजू शर्मा। - फोटो : CITY OFFICE
मातृभाषा ही वह भाषा होती है, जिसमें व्यक्ति सोचता है और सपने देखता है। सोच और सपनों की ही बदौलत विज्ञान में बड़े-बड़े आविष्कार हुए हैं। विज्ञान, इंजीनियरिंग, इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी, बायोटेक आदि की पढ़ाई हिंदी या मातृभाषा में होने से विद्यार्थियों को निश्चित ही फायदा होगा, क्योंकि कोई व्यक्ति किसी विषय को अपनी भाषा में सर्वाधिक आसानी से समझ सकता है।
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विज्ञान तकनीक ऐसे विषय हैं, जिन्हें समग्रता मेें समझे बिना विशेषज्ञता हासिल नहीं की जा सकती है। समग्रता में समझने के लिए बात का दिल और दिमाग तक पहुंचना जरूरी है और अपनी भाषा में कही गई बात सीधे दिल और दिमाग तक पहुंचती है।
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ऐसा कहना है विज्ञान, इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी, बायोटेक के विद्वानों का, जिन्होंने शनिवार को अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान के तहत ‘हिंदी में तकनीकी शिक्षा, कितनी फायदेमंद, क्या हैं बाधाएं’ विषय पर अपने-अपने तर्क रखे।
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विचार विमर्श का निष्कर्ष यह है कि हिंदी में विज्ञान-तकनीक की शिक्षा विद्यार्थियों के लिए लाभप्रद तो है, लेकिन इन विषयों में हिंदी में अच्छी पुस्तकों का अभाव है। अगर यह अभाव दूर हो जाए तो तकनीकी शिक्षा उन विद्यार्थियों की पसंद बन सकती है, जो इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन अंग्रेजी माध्यम होने से वह अपना मुंह मोड़ लेते हैं।
हिंदी में गुणवत्तापरक पुस्तकों का अभाव
विज्ञान विषय को हिंदी माध्यम से पढ़ाएं तो विद्यार्थियों को समझने में आसानी होगी। विज्ञान के जो तकनीकी शब्द हैं, उन्हें हिंदी में लिखने के साथ-साथ अंग्रेजी में भी लिखा जाना चाहिए। विज्ञान विषय की ज्यादातर अच्छी किताबें अंग्रेजी में हैं, हिंदी में ज्यादा गुणवत्तापरक किताबें नहीं हैं। भारत सरकार अच्छे विद्वानों से विज्ञान, तकनीक विषयों की किताबें हिंदी भाषा में लिखवाए, ताकि सुगम और सरल तरीके से विद्यार्थी समझ सकें। हिंदी में पढ़ाने वाले योग्य शिक्षकों की पीढ़ी को भी तैयार करना जरूरी है।
-डॉ. रक्षपाल सिंह, रसायन विज्ञान के पूर्व शिक्षक और पूर्व अध्यक्ष, डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ आगरा
मातृभाषा से विज्ञान की होगी उन्नति
विज्ञान तकनीक ही नहीं कोई भी विषय हो, जब तक उसे छात्र अपनी मातृभाषा में ग्रहण नहीं करेगा, तब तक उस विषय की ठीक समझ नहीं बन पाएगी। मैं कई देशों का दौरा का चुका हैं, वहां विज्ञान उनकी मातृभाषा में ही पढ़ाया जाता है। यदि भारत में भी हिंदी या मातृभाषा में विज्ञान विषय पढ़ाने का विकल्प आ जाए तो बच्चों की विज्ञान के प्रति समझ और ज्यादा बढ़ जाएगी। इससे विज्ञान की उन्नति होगी और देश का विकास होगा।
-डॉ. मनोज शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, भौतिक विज्ञान विभाग, एसवी कॉलेज
हिंदी में तकनीक की पढ़ाई होगी बेहतर
हमारे यहां विद्यार्थियों की आवश्यकता के अनुसार उन्हें पालीटेक्निक की पढ़ाई हिंदी-अंग्रेजी माध्यम में कराई जाती है। मगर, हिंदी माध्यम में पढ़ाई विद्यार्थियों को अच्छी तरह से समझ में आती है, क्योंकि शुरू से ही हिंदी माध्यम में उनकी पढ़ाई-लिखाई होती है। अपनी मातृभाषा में विद्यार्थी जल्दी से वह व्याख्यान आसानी से ग्रहण कर लेते हैं, जबकि अंग्रेजी भाषा में दिक्कत होती है। हिंदी में विज्ञान व तकनीक पर अच्छी व गुणवत्तापरक किताबों की नितांत आवश्यकता है।
-रामजीलाल, प्रधानाचार्य, महामाया पालीटेक्निक कॉलेज, अलीगढ़
परास्नातक में हिंदी माध्यम का हो विकल्प
वनस्पति विज्ञान की अधिकतर पाठ्य सामग्री अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है। हिंदी भाषा में अच्छी किताबों का अभाव है। इस दिशा में प्रयास किया जाना जरूरी है। जब विद्यार्थी बीएससी करता है तो उसके पास हिंदी व अंग्रेजी भाषा विकल्प होते हैं, लेकिन एमएससी में उसके पास केवल अंग्रेजी भाषा का विकल्प बचता है। ऐसे में विद्यार्थियों को पढ़ने-समझने में दिक्कतें होती हैं। अगर इसमें भी हिंदी भाषा का विकल्प हो तो बेहतर होगा।
-डॉ. मुकेश भारद्वाज, असिस्टेंट प्रोफेसर, वनस्पति विज्ञान, डीएस कॉलेज
आईटी का पूरा पाठ्यक्रम हिंदी में नहीं
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए हिंदी में अच्छी में अच्छी किताबें नहीं हैं। पूरा पाठ्यक्रम भी हिंदी में नहीं है। हिंदी भाषा के हिसाब से इंजीनियरिंग लैब का पाठ्यक्रम बनना चाहिए। अगर अच्छी किताबें हिंदी में आ जाएं तो हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए तकनीकी की पढ़ाई आसान हो जाएगी।
आईटी में जो तकनीकी शब्द होते हैं, जिनका हिंदी में अनुवाद करने के बजाय उन्हें हिंदी लिपि में लिखा जाए। जैसे कंप्यूटर को संगणक न लिखकर कंप्पयूटर ही लिखा जाए।
-डॉ. आनंद शर्मा, विभागाध्यक्ष, इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी, अलीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, अलीगढ़
बायोटेक में समुचित साहित्य का अभाव
जैव प्रौद्योगिकी जैसे नए विषयों का हिंदी में पठन-पाठन सदैव कौतूहल का विषय है। इसके तमाम लाभ हैं। मातृभाषा में पढ़ाई की जाए तो विषय की दुरूहता दूर हो सकती है और विद्यार्थी को तकनीकी संकल्पनाओं को समझने में आसानी होगी।
कठिन से कठिन अभिक्रियाओं व जैविक चक्रों को अपनी भाषा में कंठस्थ करना अत्यंत आसान हो जाता है। मगर हिंदी भाषा में पठन-पाठन में दिक्कतें आती हैं, क्योंकि इसमें इन विषयों पर समुचित साहित्य का अभाव है। सही शब्दकोष की अनुपलब्धता है।
-डॉ. सुदीप तिवारी, विभागाध्यक्ष, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, आईआईएमटी
ये हैं विद्वानों की सलाह
-हिंदी में पढ़ाने वाले योग्य शिक्षकों की पीढ़ी को तैयार करना जरूरी।
-हिंदी में पढ़ाने से बच्चों के मन में विज्ञान के प्रति रुझान बढ़ेगा।
- मातृभाषा में दुरूह विषय को भी समझना आसान होता है।
- हिंदी में विज्ञान-तकनीक की गुणवत्तापरक किताबों की सख्त जरूरत है।
-कई देशों में विज्ञान की पढ़ाई मातृभाषा में होती है, तो हमारे यहां क्यों नहीं।
विज्ञान को लेकर भावी योजनाएं
विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले एसवी कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के मिशन और विजन पर काम जारी है। इसमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार जुटा है। मंत्रालय के कई प्रोजेक्ट हैं, जिनमें विज्ञान को हिंदी या मातृभाषा में पढ़ाया जाना भी शामिल है।
ऐसे लिखें शुद्ध हिंदी
आज हिंदी भाषी प्रदेशों में भी हिंदी अशुद्ध बोली और लिखी जा रही है। इसका प्रमुख कारण है व्याकरण के ज्ञान का अभाव। अधिकतर लोग हिंदी को बहुत आसान समझते हैं, हिंदी जितनी सरल है उतनी ही कठिन भी है। हिंदी के शब्दों को शुद्ध व सही लिखने के लिए कुछ नियमों का ज्ञान अनिवार्य है।
इन नियमों में एक महत्वपूर्ण नियम है, संयुक्त वर्ण संबंधी नियम। जिन वर्ण या अक्षरों में खड़ी पाई है जैसे, ख, ग, घ, त, थ, ध, न, प, म आदि, इन वर्णों में संयुक्त रूप बनाने के लिए खड़ी पाई को हटाकर ही दूसरा व्यंजन जोड़ा जाये। जैसे... प्+य=प्या+र=प्यार, ख्+या+ति=ख्याति, स+त्+का+र=सत्कार, त+थ्+य=तथ्य, ध्+या+न=ध्यान आदि । जिस वर्ण के नीचे हलन्त लगा है, वह वर्ण आधा होता है।

-डॉ. मंजू शर्मा, हिंदी विभाग की पूर्व अध्यक्ष, टीकाराम कन्या महाविद्यालय

डॉ. मनोज शर्मा

डॉ. मनोज शर्मा- फोटो : CITY OFFICE

डॉ. मुकेश भारद्वाज

डॉ. मुकेश भारद्वाज- फोटो : CITY OFFICE

डॉ. रक्षपाल सिंह।

डॉ. रक्षपाल सिंह।- फोटो : CITY OFFICE

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