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हवा में उड़ रहे थे चीथड़े, जिसने देखा सहम गया

Sat, 09 Sep 2017 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
अमर उजाला ब्यूूराे Updated Sat, 09 Sep 2017 01:07 AM IST
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The winds blowing in the air, who saw it
अलीगढ़ - सूतमील बीमा नगर में हुई घटना के बाद लगी भीड़। - फोटो : Amar Ujala
सूतमिल बीमानगर में शुक्रवार सुबह हुए विस्फोट के बाद गर्द और गुबार के बीच इंसानी जिस्म के  उड़ते चीथड़े देखकर जीटी रोड से गुजर रहे लोगों का कलेजा मुंह को आ गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए वाहनों को छोड़कर भाग रहे थे।
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पूर्व सरकारी पशु चिकित्सक डॉ. रामशरन शर्मा कहते हैं कि वह पास में ही दूध लेने गए थे। जब वह लौट रहे थे तो देखा कि बहुत तेज विस्फोट के बाद उनके घर के पास बड़ा सा धूल का गुबार उठ रहा है। कुछ देर तक यह गुबार कायम रहा और उसमें जिस्म के अवशेष हवा में उछलकर नीचे गिर रहे थे।
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जीटी रोड पर यह नजारा देखकर लोग चीख रहे थे। महिलाओं का दहशत के मारे बुरा हाल था। जीटी रोड पर गुजर रहे लोगों ने समझा कि कोई बम विस्फोट हुआ है, तो वे अपने को सुरक्षित करने के लिए बदहवासी में भागे जा रहे थे। विस्फोट इतना भीषण था कि आसपास की गलियों में बने मकानों के वॉश बेसिन उखड़ कर गिर गए। 
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महावीर गंज से दिल्ली की ओर जा रहे एक परिवार ने विस्फोट के बाद अपनी कार छोड़कर दिल्ली रोड पर ही भागना शुरू कर दिया। जीटी रोड से गुजर रही एटा डिपो की एक बस की छत पर मलबे का एक टुकड़ा आकर गिरा, तो बस में बैठे यात्रियों की चीख निकल गई। चालक तेजी से बस को निकाल भी नहीं सकता था, क्योंकि और भी गाड़ियां फंसी थीं। यह हालात करीब एक घंटे तक रहे।

हादसे में मिट गया गंगासरन का परिवार
इस हादसे में गंगासरन का परिवार ही मिट गया। विस्फोट में दो बेटे कुंवरपाल और आशु की तो मौके पर ही मौत हो गई। जबकि पत्नी पुष्पा ने मेडिकल कालेज में दम तोड़ दिया। विस्फोट के बाद उनका एक पैर और हाथ जिस्म से अलग हो गया था। गंगा सरन की हालत बहुत खराब है। 

गंगासरन टहलने गए थे, बच गए

जिस वक्त विस्फोट हुआ, उस वक्त गंगासरन घर में नहीं थे। वह सुबह-सुबह टहलने के लिए जीटी रोड की ओर गए थे। यही वजह है कि वह हादसे की चपेट में नहीं आए। तेज धमाके के बाद गंगासरन ने सोचा कि किसी टायर का ट्रक फटा होगा, क्योंकि सुबह  जीटी रोड से काफी ट्रक गुजरते हैं। लेकिन जब धूल और गर्द का गुबार देखा, तो वह  अपने घर की ओर दौड़ पड़े। जहां गंगासरन का घर हुआ करता था, वहां कुछ ही सेकेंडों में सिर्फ मलबा दिखाई दे रहा था।


आधे घंटे बाद होती स्कूली बच्चों की भीड़, ज्यादा होता नुकसान

घटना स्थल के पास ही दो निजी और एक सरकारी स्कूल है। अगर यह हादसा आधा घंटा बाद होता तो स्कूलों में पढ़ने जाने वाले बच्चे भी चपेट में आ सकते थे। तब नुकसान ज्यादा होता। घटना स्थल के सामने वाले घर में रहने वाले डॉ. रामसरन शर्मा कहते हैं कि सुबह सात बजे के  वक्त गली में बच्चों व उनको छोड़ने आने वाले अभिभावकों की बहुत ज्यादा भीड़ हो जाती है। 


 
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