फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   The Sangh Parivar came in opposition to the books of the authors of the Islamic State

एएमयू : इस्लामिक स्टेट के हिमायती लेखकों की किताबों की मुखालफत में आया संघ परिवार

Tue, 02 Aug 2022 01:15 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 02 Aug 2022 01:15 AM IST
विज्ञापन
The Sangh Parivar came in opposition to the books of the authors of the Islamic State
सोशल जस्टिस इन इस्लाम की किताब - फोटो : CITY OFFICE
कमल शर्मा
विज्ञापन

इस्लामिक स्टेट के हिमायती पाकिस्तान और इजिप्ट के लेखकों की किताबों को पूरी तरह से प्रतिबंधित कराने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सक्रिय हो गया है। इस बारे में संघ का प्रबुद्ध प्रकोष्ठ यह जानकारी करने में जुटा है कि देश के किन किन कालेज और विश्वविद्यालयों में इन लेखकों की किताबें पढ़ाई जा रही है। साथ ही इन लेखकों पर शोध किया जा रहा है, जिससे कि अन्य शिक्षण संस्थानों से इन किताबों को प्रतिबंधित कराया जा सके।
एएमयू के इस्लामिक स्टडीज विभाग में इन लेखकों की किताबों को प्रतिबंधित किए जाने की जानकारी मिलते ही संघ परिवार के प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने अलीगढ़ से यह जानकारी मांगी। जो कि यहां सेे भेज दी गई है। अब प्रबुद्ध प्रकोष्ठ की विभिन्न प्रांतों की शाखाएं इन किताबों के पढ़ाने के बारे में जानकारी कर रहीं हैं।
विज्ञापन

वहीं दूसरी ओर देश के 24 सामाजिक कार्यकर्ताओं की शिकायत पर इन लेखकों की किताबों के बारे में पीएमओ ने यूजीसी से जानकारी मांगी है। इस बारे में यूजीसी का पत्र आया, उसी के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) ने पाकिस्तानी लेखक मौलाना अबुल आला मौदूदी और इजिप्ट के लेखक सैयद कुतुब की सभी किताबें पाठ्यक्रम से हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। जामिया मिल्लिया और हमदर्द विवि तथा कई अन्य शिक्षण संस्थान की ओर से इस बारे में कोई कदम नहीं उठाया गया है। इन शिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रमों से इन किताबों को कैसे हटाया जाए, इस बारे में भी संघ परिवार के प्रबुद्ध प्रकोष्ठ की ओर से रणनीति तैयार की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

यूजीसी को किया ट्वीट
भाजपा नेता डा. निशित शर्मा ने भी यूजीसी को ट्वीट कर कहा है कि पाकिस्तानी और इजिप्ट के लेखक ने पुस्तक में इस्लामिक स्टेट की हिमायत की है। इसे कैसे लागू किया जाए और किस तरह का संविधान हो। इन सभी का उल्लेख इन किताबों में किया गया है। इनका कहना है कि इस मामले की पीएमओ को शिकायत होने पर ही एएमयू ने आनन फानन में इनके पाठ्यक्रमों पर रोक लगाई है। अभी भी कई विवि में इन किताबों को पढ़ाया जा रहा है, वहां पर भी जांच कराकर यूजीसी को रोक लगाई जानी चाहिए। क्योंकि सऊदी अरब, बांग्लादेश सहित दुनिया के कई इस्लामिक देश इन लेखकों की किताबों को पहले ही प्रतिबंधित कर चुके हैं।
दिल्ली, रामपुर और कश्मीर से प्रकाशित हुई हैं प्रतिबंधित की गईं किताबें
इस्लामिक स्टेट के हिमायती लेखकों की एक दर्जन से अधिक किताबों को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) ने प्रतिबंधित किया है। इन किताबों को प्रकाशित करने वाले इस्लामिक प्रकाशन दिल्ली, रामपुर और जम्मू कश्मीर के रहे हैं। ये प्रकाशक किताबों की बिक्री के हिसाब से पाकिस्तान और मिस्र को रायल्टी भेजते रहे हैं।
इन पुस्तकों को मरकजी मकतवा इस्लामिक दिल्ली पब्लिकेशन और मकतवा अल हतनात पब्लिकेशन रामपुर ने प्रकाशित किया है। जिन किताबों को प्रतिबंधित किया है उनमें टावर्डस अंडर स्टेडिंंग द कुरान, इस्लामिक वे ऑफ लाइफ, द इस्लामिक लॉ एंड कंय्टीूट्यूशन, इक़ॉनामिक सिस्टम ऑफ इस्लाम, तफीमुउल कुरान आदि हैं। ब्यूरो
विधान परिषद सदस्य मानवेंद्र सिंह का कहना है कि एएमयू में इस्लामिक स्टेट की हिमायत की किताबें पढ़ाने के बारे में हम पहले से कहते आए हैं। लेकिन इस बारे में सही समय पर सही कदम नहीं उठाया है। 1990 के दशक में कश्मीर से यहां एके 47 तक यहां आईं। उन दिनों तथाकथित सेक्यूलर लोग हमारे इस तरह के बयान की आलोचना करते रहे लेकिन सच्चाई सामने आ रही है।
अपने ही देश में विवादित रहे हैं दोनों लेखक
इस्लामिक स्टेट के हिमायती दोनों लेखक अपने देशों में ही नहीं, बल्कि दुनिया के इस्लामिक और गैर इस्लामिक देशों में विवादित रहे हैं। इसी वजह से अधिकांश देशों ने इनकी किताबों को प्रतिबंधित किया था। आरोप है कि इस्लामिक स्टेट की हिमायत की आड़ में युवाओं को सरकार की मुखालफत के लिए उकसाया गया। दोनों लेखक अपने - अपने देशों में इस तरह का अभियान चलाने में काफी हद तक सफलता भी रहे लेकिन बाद में इनको सजा भी हुई।
मिस्र निवासी लेखक सैयद इब्राहिम हुसैन उर्फ सैयद कुतुब पर 1965 में सरकार की मुखालफत करने के साथ-साथ तत्कालीन राष्ट्रपति जमाल अब्देल नासिर की हत्या की साजिश रचने का दोषी ठहराया गया था। उसी आधार पर उन्हें वहां की अदालत ने 1966 में फांसी पर लटका दिया था।

जमात - ए - इस्लामी हिंद के संस्थापक एवं पाकिस्तानी लेखक ने भी सैयद कुतुब की तरह इन किताबों के माध्यम से युवाओं को सैनिक सरकार के खिलाफ भड़काया था। जिसकी वजह से सैनिक शासन ने 1942 से 1967 तक की अवधि में पाकिस्तान की अनेक जेलों में पांच साल तक रखा। 1953 में उनकी पुस्तक कादियानी मसला को आधार बनाकर फौजी अदालत ने फांसी की सजा सुनाई। लेकिन बाद में कट्टरपंथियों के दबाव में उनकी फांसी की सजा आजीवन कारावास में तब्दील हो गई थी।

माइलस्टोंस इस्लामिक किताब

माइलस्टोंस इस्लामिक किताब- फोटो : CITY OFFICE

इस्लामिक पब्लिकेशन की पुस्तक

इस्लामिक पब्लिकेशन की पुस्तक- फोटो : CITY OFFICE

इस्लामिक पब्लिकेशन लिमिटेल लाहौर की पुस्तक

इस्लामिक पब्लिकेशन लिमिटेल लाहौर की पुस्तक- फोटो : CITY OFFICE

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed