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अलीगढ़ : कोर्ट में न ठहरी पुलिस रिपोर्ट... क्या लक्ष्मी मंदिर में नहीं हुआ था विस्फोट

Fri, 01 Apr 2022 12:21 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 01 Apr 2022 12:21 AM IST
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The police report did not stay in the court... was there no explosion in the Lakshmi temple?
गांधीपार्क क्षेत्र के अचलताल स्थित लक्ष्मी मंदिर परिसर में विस्फोट नहीं हुआ था? 13 साल पुरानी इस घटना में अदालत में पुलिस की रिपोर्ट ठहर नहीं सकी। इसी आधार पर अदालत ने मंदिर परिसर के एक कमरे में अवैध रूप से विस्फोटक रखने के आरोपी को बरी कर दिया। न्यायालय ने यह फैसला विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट और घायल के बयान से पुलिस रिपोर्ट का मिलान न होने पर सुनाया है।
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एडीजे-तीन की अदालत ने आबादी क्षेत्र में अवैध रूप से विस्फोटक रखने, उसके धमाके से कमरा गिरने, एक युवती के घायल होने आदि के मुकदमे में यह फैसला सुनाया गया है। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार घटना 24 फरवरी 2009 करीब 11 बजे की है। तत्कालीन एसओ गांधीपार्क नवाब सिंह पुलिस टीम के साथ अचलताल पर गश्त पर थे। तभी लक्ष्मी मंदिर से तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। वे पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे तो मंदिर परिसर का एक कमरा गिरा हुआ था और उसमें मंदिर पुजारी की बेटी पूजा मलबे में दबी हुई थी। पूजा को बाहर निकाला गया, जिसे घायल अवस्था में अस्पताल भेजा गया। इसी बीच वहां लोगों ने बताया कि मंदिर पुजारी के कमरे के बराबर वाला कमरा सुरेंद्र नगर के अरविंद शर्मा के पास किराये पर है, जिसमें वह अवैध विस्फोटक सामग्री रखे हुए हैं। इधर, सूचना पर अरविंद शर्मा मौके पर पहुंच गए, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया।
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सत्र परीक्षण के दौरान पुलिस गवाहों के अलावा घायल पूजा ने न्यायालय में बयान दिया कि कमरा खुद ही गिर गया था। किसी तरह का विस्फोट वहां नहीं हुआ था, जिससे उसके चोट आई थी। साथ में न्यायालय में पुलिस द्वारा पेश की गई विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में भी विस्फोटक सामग्री होने से धमाका होने की पुष्टि नहीं हुई। वहीं बचाव पक्ष की ओर से इन साक्ष्यों के आधार पर दलील दी गई कि मकान काफी पुराना था। वह खुद ही गिरा था। उसमें रखे कच्चे बर्तन, घड़े आदि फूटने की आवाज को पुलिस ने विस्फोटक की आवाज माना, जबकि वहां कोई विस्फोट नहीं हुआ। न्यायालय ने इन्हीं तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर अरविंद को बरी किया है। एडीजीसी कृष्ण मुरारी जौहरी ने न्यायालय द्वारा गवाही व साक्ष्य के अभाव में अदालत द्वारा आरोपी को बरी किए जाने की पुष्टि की है।
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