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अलीगढ़ महोत्सवः कोहिनूर मंच पर भक्ति और सूफियाना कलाम की वही बयार
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भजन गाती मैथिली ठाकुर।
- फोटो : CITY OFFICE
राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी में शुक्रवार की रात कोहिनूर मंच पर प्रसिद्ध भजन गायिका मैथिली ठाकुर ने अपने सूफियाना कलाम और भक्ति संगीत से सुनने वालों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन कमिश्नर गौरव दयाल, एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपाणी आदि ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत में मैथिली ने अमीर खुसरो की रचना छाप तिलक सब छीनी तोसे नेहा लगाई के प्रस्तुत की तो पंडाल में माहौल सूफियाना हो गया। इसके बाद दमा दम मस्त कलंदर, हम कथा सुनाते हैं, राम राम रटते रटते एक के बाद एक भक्ति रस में भीगी रचनाएं प्रस्तुत कीं तो सुनने वाले अध्यात्म की गंगा में डूब गए।
दर्शकों की बेहद मांग पर मैथिली ने एक राधा एक मीरा प्रस्तुत किया, जिसे बहुत पसंद किया गया। देर रात तक सुनने वाले भक्ति रस की गंगा में डुबकियां लगाते रहे।
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फिल्मों से आए ऑफर को इनकार कर देती हैं मैथिली
राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी में अपनी प्रस्तुति देने आई मैथिली ठाकुर ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि वह भजन के अलावा सूफियाना रचनाएं भी प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास फिल्मों के ऑफर आते हैं, लेकिन वह उसके लिए इंकार कर देती हैं। फिलहाल उनका पूरा फोकस सूफियाना कलाम और भक्ति संगीत पर है। मैथिली ठाकुर के साथ उनके पिता रमेश ठाकुर भी आए हुए थे। उन्होंने बताया कि वह मूल रूप से बिहार के मधुबनी के रहने वाले हैं, लेकिन दिल्ली में 25 साल से रह रहे हैं और संगीत की शिक्षा दे रहे हैं।
मैथिली और अपने अन्य बच्चों को उन्होंने ही संगीत की शिक्षा दी है। मैथिली इस समय दिल्ली विश्वविद्यालय के भारती कॉलेज में ग्रेजुएशन द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। वह संगीत से ही अपनी पढ़ाई पूरी कर रही हैं और संगीत से ही आगे शोध करने का इरादा है।
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कार्यक्रम का उद्घाटन कमिश्नर गौरव दयाल, एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपाणी आदि ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत में मैथिली ने अमीर खुसरो की रचना छाप तिलक सब छीनी तोसे नेहा लगाई के प्रस्तुत की तो पंडाल में माहौल सूफियाना हो गया। इसके बाद दमा दम मस्त कलंदर, हम कथा सुनाते हैं, राम राम रटते रटते एक के बाद एक भक्ति रस में भीगी रचनाएं प्रस्तुत कीं तो सुनने वाले अध्यात्म की गंगा में डूब गए।
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दर्शकों की बेहद मांग पर मैथिली ने एक राधा एक मीरा प्रस्तुत किया, जिसे बहुत पसंद किया गया। देर रात तक सुनने वाले भक्ति रस की गंगा में डुबकियां लगाते रहे।
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फिल्मों से आए ऑफर को इनकार कर देती हैं मैथिली
राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी में अपनी प्रस्तुति देने आई मैथिली ठाकुर ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि वह भजन के अलावा सूफियाना रचनाएं भी प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास फिल्मों के ऑफर आते हैं, लेकिन वह उसके लिए इंकार कर देती हैं। फिलहाल उनका पूरा फोकस सूफियाना कलाम और भक्ति संगीत पर है। मैथिली ठाकुर के साथ उनके पिता रमेश ठाकुर भी आए हुए थे। उन्होंने बताया कि वह मूल रूप से बिहार के मधुबनी के रहने वाले हैं, लेकिन दिल्ली में 25 साल से रह रहे हैं और संगीत की शिक्षा दे रहे हैं।
मैथिली और अपने अन्य बच्चों को उन्होंने ही संगीत की शिक्षा दी है। मैथिली इस समय दिल्ली विश्वविद्यालय के भारती कॉलेज में ग्रेजुएशन द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। वह संगीत से ही अपनी पढ़ाई पूरी कर रही हैं और संगीत से ही आगे शोध करने का इरादा है।