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Aligarh News: डीजे की तेज आवाज ने छीनी सराफ के सुनने की शक्ति
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शोभायात्रा में बज रहे डीजे की तेज आवाज से कस्बे एक सराफा कारोबारी धनीराम वर्मा के कानों की सुनने की क्षमता प्रभावित हो गई। परिजनों का कहना है कि उनके बाएं कान की 85 प्रतिशत नसों को नुकसान पहुंचा है। दाएं कान की सुनने की क्षमता भी प्रभावित हुई है। फिलहाल उनका बुलंदशहर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस संबंध में थाना पुलिस से भी शिकायत की गई है।
घटना 28 अप्रैल की शाम करीब साढ़े सात बजे की है। धनीराम वर्मा ने बताया कि उस समय कस्बे में एक शोभायात्रा निकल रही थी और उसमें चार-पांच बड़े डीजे बज रहे थे। वह अपनी दुकान पर बैठे थे। दुकान बंद कर वह घर पहुंचे तो लगा कि सुनाई कम दे रहा है और बाएं कान में सीटी सी बज रही है।
उन्होंने स्थानीय चिकित्सक को दिखाया, आराम नहीं लगा तो अगले दिन वह जेवर स्थित एक निजी हॉस्पिटल पहुंचे और वहां दिखाया, चिकित्सक ने दवा दी, लेकिन उसके बाद भी आराम नहीं लगा। इसके बाद वह बुलंदशहर स्थित एक निजी अस्पताल में पहुंचे वहां उनका इलाज चल रहा है।
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बेटे गौतम वर्मा ने चिकित्सकों के हवाले से दावा किया कि उनके पिता के बाएं कान की 85 प्रतिशत और दाएं कान की 15 से 20 प्रतिशत नसों को नुकसान पहुंचा है। इलाज के दौरान महंगे इंजेक्शन लग रहे हैं। हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी भी होगी, उसका खर्च अलग से होगा। कुल पांच लाख खर्च होंगे, जिसे वहन करना उनके परिवार के लिए संभव नहीं है।
व्यापारियों के साथ जाकर थाने में की शिकायत
धनीराम वर्मा के साथ स्थानीय व्यापारी लतेश कुमार, चमन प्रकाश, राजकुमार मित्तल, दिनेश कुमार, देवेन्द्र सिंह, नरेश, चंचल शर्मा, संजय कुमार सोमवार रात थाने पर पहुंचे और एसएसपी को संबोधित पत्र थानाध्यक्ष को सौंपा। इसमें इलाज के लिए परिवार की आर्थिक मदद करने और किसी भी कार्यक्रम में तेज आवाज में डीजे बजाने पर रोक लगाने की मांग की गई।
-व्यापारियों की समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और मामले की जांच कराई जाएगी। नरेंद्र कुमार शर्मा, थाना प्रभारी टप्पल
इस तरह से पहुंचता है कानों को नुकसान
-कान के अंदर छोटी बाल कोशिकाएं होती हैं जो ध्वनि तरंगों को विद्युत संकेतों में बदलकर मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं। तेज शोर इन्हें नष्ट कर देता है।
-कोशिकाएं दोबारा पैदा नहीं होतीं। शुरुआत में शोर से अस्थायी तौर पर सुनने में समस्या हो सकती है, लेकिन बार-बार संपर्क में आने से यह बहरापन बन जाता है।
- 80-90 डेसिबल से अधिक की आवाज कान की सुनने वाली नसों को कमजोर कर देती है, आवाज तो सुनाई देती है पर समझ नहीं पाता।
-120 से 140 डेसीबल वाली अत्यधिक तेज आवाज के कारण कान का पर्दा फटने का जोखिम भी बना रहता है।
ये लक्षण दिखे तो कराएं इलाज
-कानों में लगातार घंटी बजने, सीटी जैसी आवाज आने या झनझनाहट महसूस होना
-कान बंद या भरे हुए महसूस होना, जैसे कि अंदर कुछ फंस गया हो। आवाज साफ सुनाई न देना।
-कान का अंदरूनी हिस्सा संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है, तेज शोर से संतुलन बिगड़ना या चक्कर आने की समस्या हो सकती है।
रिपोर्ट देखने से लगता है कि तेज आवाज से नसों को नुकसान पहुंचा है। यह अस्थायी है, ठीक हो जाएंगे। जब भी तेज आवाज के पास से गुजरे या संपर्क में आए तो सावधान रहे और कानों को ढक लें। डॉक्टर नरेश शर्मा सीएमओ, जेएन मेडिकल कॉलेज
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घटना 28 अप्रैल की शाम करीब साढ़े सात बजे की है। धनीराम वर्मा ने बताया कि उस समय कस्बे में एक शोभायात्रा निकल रही थी और उसमें चार-पांच बड़े डीजे बज रहे थे। वह अपनी दुकान पर बैठे थे। दुकान बंद कर वह घर पहुंचे तो लगा कि सुनाई कम दे रहा है और बाएं कान में सीटी सी बज रही है।
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उन्होंने स्थानीय चिकित्सक को दिखाया, आराम नहीं लगा तो अगले दिन वह जेवर स्थित एक निजी हॉस्पिटल पहुंचे और वहां दिखाया, चिकित्सक ने दवा दी, लेकिन उसके बाद भी आराम नहीं लगा। इसके बाद वह बुलंदशहर स्थित एक निजी अस्पताल में पहुंचे वहां उनका इलाज चल रहा है।
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बेटे गौतम वर्मा ने चिकित्सकों के हवाले से दावा किया कि उनके पिता के बाएं कान की 85 प्रतिशत और दाएं कान की 15 से 20 प्रतिशत नसों को नुकसान पहुंचा है। इलाज के दौरान महंगे इंजेक्शन लग रहे हैं। हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी भी होगी, उसका खर्च अलग से होगा। कुल पांच लाख खर्च होंगे, जिसे वहन करना उनके परिवार के लिए संभव नहीं है।
व्यापारियों के साथ जाकर थाने में की शिकायत
धनीराम वर्मा के साथ स्थानीय व्यापारी लतेश कुमार, चमन प्रकाश, राजकुमार मित्तल, दिनेश कुमार, देवेन्द्र सिंह, नरेश, चंचल शर्मा, संजय कुमार सोमवार रात थाने पर पहुंचे और एसएसपी को संबोधित पत्र थानाध्यक्ष को सौंपा। इसमें इलाज के लिए परिवार की आर्थिक मदद करने और किसी भी कार्यक्रम में तेज आवाज में डीजे बजाने पर रोक लगाने की मांग की गई।
-व्यापारियों की समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और मामले की जांच कराई जाएगी। नरेंद्र कुमार शर्मा, थाना प्रभारी टप्पल
इस तरह से पहुंचता है कानों को नुकसान
-कान के अंदर छोटी बाल कोशिकाएं होती हैं जो ध्वनि तरंगों को विद्युत संकेतों में बदलकर मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं। तेज शोर इन्हें नष्ट कर देता है।
-कोशिकाएं दोबारा पैदा नहीं होतीं। शुरुआत में शोर से अस्थायी तौर पर सुनने में समस्या हो सकती है, लेकिन बार-बार संपर्क में आने से यह बहरापन बन जाता है।
- 80-90 डेसिबल से अधिक की आवाज कान की सुनने वाली नसों को कमजोर कर देती है, आवाज तो सुनाई देती है पर समझ नहीं पाता।
-120 से 140 डेसीबल वाली अत्यधिक तेज आवाज के कारण कान का पर्दा फटने का जोखिम भी बना रहता है।
ये लक्षण दिखे तो कराएं इलाज
-कानों में लगातार घंटी बजने, सीटी जैसी आवाज आने या झनझनाहट महसूस होना
-कान बंद या भरे हुए महसूस होना, जैसे कि अंदर कुछ फंस गया हो। आवाज साफ सुनाई न देना।
-कान का अंदरूनी हिस्सा संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है, तेज शोर से संतुलन बिगड़ना या चक्कर आने की समस्या हो सकती है।
रिपोर्ट देखने से लगता है कि तेज आवाज से नसों को नुकसान पहुंचा है। यह अस्थायी है, ठीक हो जाएंगे। जब भी तेज आवाज के पास से गुजरे या संपर्क में आए तो सावधान रहे और कानों को ढक लें। डॉक्टर नरेश शर्मा सीएमओ, जेएन मेडिकल कॉलेज