{"_id":"5e10a6578ebc3e88152914fd","slug":"thankful-that-we-are-in-india-aligarh-news-ali223135252","type":"story","status":"publish","title_hn":"पाकिस्तान से आए सिख परिवारों की पीड़ा, ऐसी घटनाओं से जख्म हरे हो जाते हैं,","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पाकिस्तान से आए सिख परिवारों की पीड़ा, ऐसी घटनाओं से जख्म हरे हो जाते हैं,
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नई बस्ती के पास ही पंजाबी क्वार्टर कॉलोनी है, जिसे रिफ्यूजी क्वार्टर भी कहा जाता है। यहां पर 40 से ज्यादा सिख परिवार रहते हैं, जिनके माता-पिता या दादा-दादी 1947 में बंटवारे के वक्त पाकिस्तान से किसी तरह जान बचाकर यहां तक पहुंचे थे। इनमें एक 84 वर्षीय बुजुर्ग जोगिंदर कौर भी हैं। जिन्हें आज भी याद है कि किस तरह उनके मामा (जो आर्मी में थे) उन्हें हिंसक भीड़ से बचाते हुए सेना के ट्रक में छिपाकर भारत तक ले आए थे।
पंजाबी कॉलोनी में आए इन शरणार्थियों को भारत सरकार ने यहीं पर 80-80 गज के मकान आवंटित कर दिए थे। अभी पाकिस्तान के ननकाना साहिब में सिख श्रद्धालुओं के साथ हुई घटना के बाद इनकी जुबां पर एक ही बात थी कि जब-जब ऐसी घटना होती है, तब-तब उनके बुजुर्गों और परिवार को मिले जख्म ताजा हो जाते हैं। ऊपर वाले के शुक्रगुजार हैं कि यहां पर रह रहे हैं। वहां पर होते तो क्या होता? इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
रातों-रात वहां से भागना पड़ा था
हमारा बड़ा परिवार था। कपड़े और कपास का बड़ा कारोबार था। घर बहुत संपन्न था। रातों-रात वहां सब कुछ छोड़कर आना पड़ा। शुक्रगुजार हैं कि जिंदा हैं। बच्चे सलामत हैं। जब भी कभी वहां सिख समुदाय के साथ ऐसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं तो पुरानी घटना याद आ जाती है।
विज्ञापन
- जोगिंदर कौर, 84 वर्षीय बुजुर्ग, पंजाबी कॉलोनी में पाकिस्तान से आईं एक मात्र जीवित सदस्य
श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो
ननकाना साहिब की घटना सुनकर बहुत दुख हुआ। मैं स्वयं तो वहां नहीं गई हूं, लेकिन दिल में वहां जाने की इच्छा जरूर रहती है। ऐसी घटनाएं परेशान करती हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।
- नरेंद्र कौर, निवासी पंजाबी कॉलोनी
बुजुर्गों का फैसला सही था
हमारे पिता और दादा पाकिस्तान में अच्छा खासा कारोबार छोड़कर यहां पर आए थे। अक्सर हमें बताते थे कि बस किसी तरह जान बच पाई। कोठी, गोदाम, दुकान आदि सब कुछ छोड़ना पड़ा। ननकाना साहिब जैसी घटनाओं से लगता है कि हमारे बुजुर्गों ने सही फैसला लिया था।
- बलबिंदर सिंह, निवासी पंजाबी कॉलोनी
घरों में सलामती की प्रार्थना
हमारे कुछ दोस्त और परिचित (अन्य शहरों में रहने वाले) ननकाना साहिब में हैं। उनके विषय में चिंता होती है। सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। उनके घरों में उनकी सलामती की प्रार्थना हो रही है।
- रवि बाबू कालरा, निवासी पंजाबी कॉलोनी
विज्ञापन
पंजाबी कॉलोनी में आए इन शरणार्थियों को भारत सरकार ने यहीं पर 80-80 गज के मकान आवंटित कर दिए थे। अभी पाकिस्तान के ननकाना साहिब में सिख श्रद्धालुओं के साथ हुई घटना के बाद इनकी जुबां पर एक ही बात थी कि जब-जब ऐसी घटना होती है, तब-तब उनके बुजुर्गों और परिवार को मिले जख्म ताजा हो जाते हैं। ऊपर वाले के शुक्रगुजार हैं कि यहां पर रह रहे हैं। वहां पर होते तो क्या होता? इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
विज्ञापन
रातों-रात वहां से भागना पड़ा था
हमारा बड़ा परिवार था। कपड़े और कपास का बड़ा कारोबार था। घर बहुत संपन्न था। रातों-रात वहां सब कुछ छोड़कर आना पड़ा। शुक्रगुजार हैं कि जिंदा हैं। बच्चे सलामत हैं। जब भी कभी वहां सिख समुदाय के साथ ऐसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं तो पुरानी घटना याद आ जाती है।
विज्ञापन
- जोगिंदर कौर, 84 वर्षीय बुजुर्ग, पंजाबी कॉलोनी में पाकिस्तान से आईं एक मात्र जीवित सदस्य
श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो
ननकाना साहिब की घटना सुनकर बहुत दुख हुआ। मैं स्वयं तो वहां नहीं गई हूं, लेकिन दिल में वहां जाने की इच्छा जरूर रहती है। ऐसी घटनाएं परेशान करती हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।
- नरेंद्र कौर, निवासी पंजाबी कॉलोनी
बुजुर्गों का फैसला सही था
हमारे पिता और दादा पाकिस्तान में अच्छा खासा कारोबार छोड़कर यहां पर आए थे। अक्सर हमें बताते थे कि बस किसी तरह जान बच पाई। कोठी, गोदाम, दुकान आदि सब कुछ छोड़ना पड़ा। ननकाना साहिब जैसी घटनाओं से लगता है कि हमारे बुजुर्गों ने सही फैसला लिया था।
- बलबिंदर सिंह, निवासी पंजाबी कॉलोनी
घरों में सलामती की प्रार्थना
हमारे कुछ दोस्त और परिचित (अन्य शहरों में रहने वाले) ननकाना साहिब में हैं। उनके विषय में चिंता होती है। सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। उनके घरों में उनकी सलामती की प्रार्थना हो रही है।
- रवि बाबू कालरा, निवासी पंजाबी कॉलोनी