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समझ में नहीं आती पढ़ाई, हॉर्न बंद कराओ भाई
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एसवी कॉलेज के सामने छर्रा अड्डा पुल पर हॉर्न बजाकर ओवरटेक करते वाहन।
- फोटो : CITY OFFICE
राजा तिवारी
शहर के प्रतिष्ठित कॉलेजों में शुमार श्री वार्ष्णेय महाविद्यालय (एसवी कालेज) के विद्यार्थियों को कई बार कक्षाओं में होने वाली पढ़ाई समझ में नहीं आती है। इसका प्रमुख कारण ध्वनि प्रदूषण है। सड़कों पर बेतरतीब दौड़ रहे वाहनों का शोर ही नहीं, बल्कि ट्रेनों के हॉर्न की तेज ध्वनि यहां विद्यार्थियों के कानों में चुभने लगी है। चलती कक्षा में अगर हॉर्न की आवाज आती है तो विषय पर ध्यान लगाने में विघ्न पड़ता है। विषय को समझने के लिए विद्यार्थियों को शिक्षकों से बार बार पूछना पड़ता है। नियमानुसार शिक्षण संस्थाओं के 100 मीटर के इर्दगिर्द ध्वनि प्रदूषण नहीं होना चाहिए। ये क्षेत्र साइलेंस जोन में होना चाहिए, लेकिन अलीगढ़ में अभी तक इसको लागू नहीं किया गया है।
दरअसल, एसवी कॉलेज के मुख्य परिसर के ठीक सामने जीटी रोड गुजरता है। इसके पीछे पास से ही रेलवे ट्रैक गुजरता है, जिसके ऊपर छर्रा अड्डा रेलवे क्रासिंग का ओवरब्रिज है। सड़क कॉलेज के सामने तो रेलवे ट्रैक इसके पीछे से गुजरता है। इससे दोनों ओर से जबरदस्त शोर होता है। ऐसे में शिक्षक, शिक्षिकाएं जब किसी विषय के महत्वपूर्ण मुद्दे को पढ़ा रहे होते हैं तो उनको भी परेशानी होती है। छात्र छात्राओं को भी कई बार आधी अधूरी बात सुनाई देती है। जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, भौतिक विज्ञान व रसायन विज्ञान विभाग की कक्षाओं में ट्रेनों के हॉर्न से परेशान होती हैं। वहीं एसवी कालेज के दूसरे परिसर में छर्रा अड्डा पुल के नीचे विधि और बीएड विभाग हैं। छर्रा अड्डा पुल से उतरने और चढ़ने वाले वाहनों के हार्न यहां पढ़ाई बाधित कर रहे हैं। म्यूजिकल हॉर्न, हाई प्रेशर हॉर्न बजने पर तो कक्षा में कुछ सुनाई ही नहीं देता है।
प्रेशर हॉर्न, म्यूजिकल हॉर्न हो या साधारण हॉर्न, सभी की आवाज परिसर में आती है। इससे पढ़ाई में व्यवधान पड़ता है। कई बार छर्रा अड्डा पुल पर जाम लगने पर हॉर्न का शोर और तेज हो जाता है। इससे पढ़ाई तो रुकती ही है, साथ ही चिड़चिड़ापन हो जाता है। यहां हॉर्न प्रतिबंधित होना चाहिए।
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हर्ष प्रताप सिंह सोलंकी, छात्र विधि विभाग।
रेल और वाहनों के हॉर्न कक्षाओं की पढ़ाई पर प्रभाव डालते हैं। हाई प्रेशर हॉर्न से ज्यादा परेशानी आती है। हॉर्न प्रतिबंधित हो जाएं तो समस्या का समाधान हो जाएगा।
डॉ. पंकज कुमार वार्ष्णेय, प्राचार्य एसवी कालेज।
अलीगढ़ मंडल के पढ़ते हैं विद्यार्थी
शहर के एसवी कालेज व डीएस कालेज ऐसे महाविद्यालय हैं। जहां अलीगढ़ जिले के अलावा हाथरस, एटा व कासगंज से विद्यार्थी आते हैं और उच्च शिक्षा ग्रहण करते हैं। इन कालेजों में सीटों की मारामारी भी इतनी रहती है कि अंतिम समय तक सभी आवेदनकर्ता इंतजार करते हैं।
शहर में चार स्थानों पर सेंटर प्वाइंट, दीनदयाल अस्पताल, ज्ञान सरोवर व आईटीआई इंडस्ट्रियल एरिया में हम ध्वनि प्रदूषण की जांच करते हैं। लगभग सभी जगह ध्वनि प्रदूषण सामान्य से कुछ ज्यादा है। कलेक्ट्रेट, कचहरी, अस्पताल, कमिश्नरी के साथ साथ शिक्षण संस्थान साइलेंस जोन में आते हैं। शिक्षण संस्थाओं के 100 मीटर तक तो हॉर्न बजना ही नहीं चाहिए। एसवी कॉलेज की समस्या के बाबत पता चला है। अब वहां पर जांच कराने के बाद साइलेंस जोन का पालन कराया जाएगा।
रामगोपाल, क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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शहर के प्रतिष्ठित कॉलेजों में शुमार श्री वार्ष्णेय महाविद्यालय (एसवी कालेज) के विद्यार्थियों को कई बार कक्षाओं में होने वाली पढ़ाई समझ में नहीं आती है। इसका प्रमुख कारण ध्वनि प्रदूषण है। सड़कों पर बेतरतीब दौड़ रहे वाहनों का शोर ही नहीं, बल्कि ट्रेनों के हॉर्न की तेज ध्वनि यहां विद्यार्थियों के कानों में चुभने लगी है। चलती कक्षा में अगर हॉर्न की आवाज आती है तो विषय पर ध्यान लगाने में विघ्न पड़ता है। विषय को समझने के लिए विद्यार्थियों को शिक्षकों से बार बार पूछना पड़ता है। नियमानुसार शिक्षण संस्थाओं के 100 मीटर के इर्दगिर्द ध्वनि प्रदूषण नहीं होना चाहिए। ये क्षेत्र साइलेंस जोन में होना चाहिए, लेकिन अलीगढ़ में अभी तक इसको लागू नहीं किया गया है।
दरअसल, एसवी कॉलेज के मुख्य परिसर के ठीक सामने जीटी रोड गुजरता है। इसके पीछे पास से ही रेलवे ट्रैक गुजरता है, जिसके ऊपर छर्रा अड्डा रेलवे क्रासिंग का ओवरब्रिज है। सड़क कॉलेज के सामने तो रेलवे ट्रैक इसके पीछे से गुजरता है। इससे दोनों ओर से जबरदस्त शोर होता है। ऐसे में शिक्षक, शिक्षिकाएं जब किसी विषय के महत्वपूर्ण मुद्दे को पढ़ा रहे होते हैं तो उनको भी परेशानी होती है। छात्र छात्राओं को भी कई बार आधी अधूरी बात सुनाई देती है। जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, भौतिक विज्ञान व रसायन विज्ञान विभाग की कक्षाओं में ट्रेनों के हॉर्न से परेशान होती हैं। वहीं एसवी कालेज के दूसरे परिसर में छर्रा अड्डा पुल के नीचे विधि और बीएड विभाग हैं। छर्रा अड्डा पुल से उतरने और चढ़ने वाले वाहनों के हार्न यहां पढ़ाई बाधित कर रहे हैं। म्यूजिकल हॉर्न, हाई प्रेशर हॉर्न बजने पर तो कक्षा में कुछ सुनाई ही नहीं देता है।
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प्रेशर हॉर्न, म्यूजिकल हॉर्न हो या साधारण हॉर्न, सभी की आवाज परिसर में आती है। इससे पढ़ाई में व्यवधान पड़ता है। कई बार छर्रा अड्डा पुल पर जाम लगने पर हॉर्न का शोर और तेज हो जाता है। इससे पढ़ाई तो रुकती ही है, साथ ही चिड़चिड़ापन हो जाता है। यहां हॉर्न प्रतिबंधित होना चाहिए।
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हर्ष प्रताप सिंह सोलंकी, छात्र विधि विभाग।
रेल और वाहनों के हॉर्न कक्षाओं की पढ़ाई पर प्रभाव डालते हैं। हाई प्रेशर हॉर्न से ज्यादा परेशानी आती है। हॉर्न प्रतिबंधित हो जाएं तो समस्या का समाधान हो जाएगा।
डॉ. पंकज कुमार वार्ष्णेय, प्राचार्य एसवी कालेज।
अलीगढ़ मंडल के पढ़ते हैं विद्यार्थी
शहर के एसवी कालेज व डीएस कालेज ऐसे महाविद्यालय हैं। जहां अलीगढ़ जिले के अलावा हाथरस, एटा व कासगंज से विद्यार्थी आते हैं और उच्च शिक्षा ग्रहण करते हैं। इन कालेजों में सीटों की मारामारी भी इतनी रहती है कि अंतिम समय तक सभी आवेदनकर्ता इंतजार करते हैं।
शहर में चार स्थानों पर सेंटर प्वाइंट, दीनदयाल अस्पताल, ज्ञान सरोवर व आईटीआई इंडस्ट्रियल एरिया में हम ध्वनि प्रदूषण की जांच करते हैं। लगभग सभी जगह ध्वनि प्रदूषण सामान्य से कुछ ज्यादा है। कलेक्ट्रेट, कचहरी, अस्पताल, कमिश्नरी के साथ साथ शिक्षण संस्थान साइलेंस जोन में आते हैं। शिक्षण संस्थाओं के 100 मीटर तक तो हॉर्न बजना ही नहीं चाहिए। एसवी कॉलेज की समस्या के बाबत पता चला है। अब वहां पर जांच कराने के बाद साइलेंस जोन का पालन कराया जाएगा।
रामगोपाल, क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।