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Aligarh News: नसबंदी हुई फेल, महिलाओं ने बच्चे पालने के लिए मांगा हर्जाना
Mon, 21 Sep 2020 08:43 PM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2020 08:43 PM IST
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गर्भवती महिला
- फोटो : pixabay
अभिषेक शर्मा
स्वास्थ्य विभाग के नसबंदी अभियान में आए दिन इस तरह की शिकायतें तो मिलती रहती हैं कि ऑपरेशन के बाद भी नसबंदी फेल हो गई। मगर, इस बार यहां नए तरह का प्रकरण सामने आया है। जवां व खैर की दो महिलाओं ने नसबंदी ऑपरेशन फेल होने पर स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया है और हर्जाना मांगते हुए पैदा होने वाले बच्चे के लिए भी खर्चा मांगा है।
केस:-1
खैर क्षेत्र की की रहने वाली महिला अपने अधिवक्ता योगेश सारस्वत के माध्यम से कहा है कि उसके पति मजदूरी करते हैं। उसके चार बच्चे पहले से ही हैं। 15 जनवरी 2019 को उसने इगलास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अपनी नसबंदी कराई थी। लेकिन 1 सितंबर 2019 को तबीयत खराब होने पर वह मलखान सिंह जिला अस्पताल पहुंची थी। वहां पर उसकी जांच की गई। उसे बताया गया कि वह 4 महीने की गर्भवती है। नसबंदी होने के बाद भी गर्भवती होने पर उसे सामाजिक लाज लज्जा का भी सामना करना पड़ा। इसके बाद पीड़ित ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को नोटिस भेजा। लेकिन कोई नहीं मिला। अब महिला ने स्थायी लोक अदालत में शपथ पत्र के साथ गुहार लगाई है। महिला ने छह लाख रुपये हर्जाना और जो भी अन्य व्यय मिलता हो, दिलाने का अनुरोध किया है। इसके बाद यह मामला सुनवाई के लिए विचारार्थ कर लिया गया है।
केस:-2
नसबंदी के बाद भी संतान पैदा होने का यह मामला जवां क्षेत्र से प्रकाश में आया है। महिला की ओर से उसके अधिवक्ता ने कहा है कि महिला ने 28 नवंबर 2017 को जवां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी कराई थी। महिला के 4 बच्चे पहले से ही हैं। इस वर्ष की शुरुआत में उसे पेट में कुछ तकलीफ होने पर अस्पताल जाना पड़ा। जहां उसे बताया गया कि वह गर्भवती है। इसके बाद महिला ने मोहनलाल गौतम जिला महिला अस्पताल में 25 अगस्त 2020 को एक बच्चे को जन्म दिया। महिला ने अब स्थायी लोक अदालत में बच्चे के भरण-पोषण की गुहार करते हुए दस लाख रुपये हर्जाना और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
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नसबंदी फेल हो सकती है। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा प्रावधान बनाए गए हैं। दावा करने पर मुआवजा का प्रावधान है। संबंधित महिला मुआवजा का दावा करने को स्वतंत्र है।
- डॉ. बीपी सिंह कल्याणी, सीएमओ
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स्वास्थ्य विभाग के नसबंदी अभियान में आए दिन इस तरह की शिकायतें तो मिलती रहती हैं कि ऑपरेशन के बाद भी नसबंदी फेल हो गई। मगर, इस बार यहां नए तरह का प्रकरण सामने आया है। जवां व खैर की दो महिलाओं ने नसबंदी ऑपरेशन फेल होने पर स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया है और हर्जाना मांगते हुए पैदा होने वाले बच्चे के लिए भी खर्चा मांगा है।
केस:-1
खैर क्षेत्र की की रहने वाली महिला अपने अधिवक्ता योगेश सारस्वत के माध्यम से कहा है कि उसके पति मजदूरी करते हैं। उसके चार बच्चे पहले से ही हैं। 15 जनवरी 2019 को उसने इगलास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अपनी नसबंदी कराई थी। लेकिन 1 सितंबर 2019 को तबीयत खराब होने पर वह मलखान सिंह जिला अस्पताल पहुंची थी। वहां पर उसकी जांच की गई। उसे बताया गया कि वह 4 महीने की गर्भवती है। नसबंदी होने के बाद भी गर्भवती होने पर उसे सामाजिक लाज लज्जा का भी सामना करना पड़ा। इसके बाद पीड़ित ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को नोटिस भेजा। लेकिन कोई नहीं मिला। अब महिला ने स्थायी लोक अदालत में शपथ पत्र के साथ गुहार लगाई है। महिला ने छह लाख रुपये हर्जाना और जो भी अन्य व्यय मिलता हो, दिलाने का अनुरोध किया है। इसके बाद यह मामला सुनवाई के लिए विचारार्थ कर लिया गया है।
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केस:-2
नसबंदी के बाद भी संतान पैदा होने का यह मामला जवां क्षेत्र से प्रकाश में आया है। महिला की ओर से उसके अधिवक्ता ने कहा है कि महिला ने 28 नवंबर 2017 को जवां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी कराई थी। महिला के 4 बच्चे पहले से ही हैं। इस वर्ष की शुरुआत में उसे पेट में कुछ तकलीफ होने पर अस्पताल जाना पड़ा। जहां उसे बताया गया कि वह गर्भवती है। इसके बाद महिला ने मोहनलाल गौतम जिला महिला अस्पताल में 25 अगस्त 2020 को एक बच्चे को जन्म दिया। महिला ने अब स्थायी लोक अदालत में बच्चे के भरण-पोषण की गुहार करते हुए दस लाख रुपये हर्जाना और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
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नसबंदी फेल हो सकती है। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा प्रावधान बनाए गए हैं। दावा करने पर मुआवजा का प्रावधान है। संबंधित महिला मुआवजा का दावा करने को स्वतंत्र है।
- डॉ. बीपी सिंह कल्याणी, सीएमओ