फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   SP had already known about the defeat in the election

चुनाव में हार को सपाई पहले ही जान गए थे

Sun, 04 Jul 2021 01:03 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jul 2021 01:03 AM IST
विज्ञापन
SP had already known about the defeat in the election
आशीष निगम, अलीगढ़।
विज्ञापन

जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में सपा की हार अप्रत्याशित नहीं है। जिला पंचायत सदस्यों के परिणाम घोषित होने के बाद से जारी घटनाक्रम लगातार सपा की हार की ओर इशारा कर रहे थे। पार्टी के नेता भी अच्छी तरह से जानते थे। अंदरखाने इस हार को मान भी चुके थे। बहरहाल, सपा लगातार दूसरी बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव हारी है।
इससे पहले वर्ष 2015 में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में प्रदेश में सपा का शासन था और तत्कालीन छर्रा विधायक ठा. राकेश सिंह की पत्नी डा. नीतू सिंह अध्यक्ष पद के लिए मैदान में थीं। उस चुनाव में सपा को नौ वोट मिले थे और बसपा प्रत्याशी उपेंद्र सिंह नीटू 33 मतों से जीते थे। नीटू को 52 से 42 वोट मिले थे।
विज्ञापन

अबकी बार फिर सपा अध्यक्ष पद के लिए ताल ठोक कर मैदान में आई। जीत के लिए रालोद और महान दल के साथ गठबंधन किया। सशक्त प्रत्याशी के रूप में पूर्व सीएम अखिलेश यादव की रिश्तेदार अर्चना यादव मैदान में उतरीं। इस बार जिला पंचायत में 52 की जगह 47 सीटें ही थीं। इस बार भी सपा 30 वोटों से हार गई। भाजपा प्रत्याशी विजय सिंह लगभग 30 मतों से विजयी हुई उनको 38 वोट मिले हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस हार को लेकर सपाई मीडिया और जनता के सामने अपनी झुंझलाहट तो दिखा रहे हैं, लेकिन उनकी हार की वजह पहले से ही सबके सामने थी। बीती 2 मई को जिला पंचायत सदस्यों के परिणाम आने के बाद सपाई खेमा सुसुप्त अवस्था में चला गया था। इसका पहला और सबसे बड़ा कारण संजय यादव का कोरोना संक्रमित होना था।
पत्नी अर्चना यादव के चुनाव प्रचार के दौरान ही 24 अप्रैल को संजय यादव संक्रमित हुए और वह एक महीने तक अस्पताल में रहे। एक महीने के लंबे वक्त में सपा खेमे में भाजपा की सेंध लग गई। जब कुछ सपा समर्थित जिपं सदस्य ही ‘बिक’ गए तो रालोद में भी घुसपैठ हो गई। बसपा के सात और कांग्रेस का एक सदस्य भी भाजपा के खेमे में चला गया।
ऐसा नहीं था कि सपा को आभास नहीं था। सपा नेताओं को एक एक सदस्य की जानकारी मिल रही थी। इसकी पुष्टि बीती 16 जून को रामघाट रोड स्थित होटल में प्रेस वार्ता में हुई। जब सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव ने माना था कि सपा अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले सरेंडर हो चुकी है। उन्होंने इस वार्ता में रालोद की उम्मीदवार राजकुमारी को अध्यक्ष पद के लिए समर्थन करने तक की बात कही थी। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता के साथ 17 जून के अंक में प्रकाशित किया था।

इधर, निर्दलीयों से कुछ आसरा था तो पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चौ. सुधीर सिंह उनको साथ लेकर भाजपाई हो गए। इतना सब होने के बाद सभी को इस बात का अनुमान हो गया था कि भाजपा की स्थिति सपा से मजबूत है। भाजपाई 38 सदस्यों के समर्थन का दावा कर रहे थे, जो सच साबित हुआ। सपा-रालोद गठबंधन 22 सदस्यों का दावा कर रहा था, लेकिन उसको आठ वोट ही मिले और ये खेमा चुनाव हार गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed