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सॉल्वर गैंग : खैर का फिर नाम बदनाम
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यह पहला मौका नहीं है, जब भरती परीक्षा में पेपर सॉल्वर गैंग के तार खैर से जुड़ रहे हैं। इससे पहले भी यूपी के कई जनपदों के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक की परीक्षाओं में खैर व गोंडा इलाके के सॉल्वरों के नाम सामने आते रहे हैं। हालांकि, ये पुलिस जांच का विषय है, मगर इस गैंग के भी तार गहरे होंगे। जिसकी जांच में पुलिस जुट गई है और फरार सरगना योगेंद्र व उसके साथियों की धरपकड़ के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रदेश भर में दरोगा भरती ऑनलाइन परीक्षा के लिए एनसीईआईटी को ठेका मिला है। जिसमें परीक्षा केंद्र पर एनसीईआईटी द्वारा एक-एक परीक्षा केंद्र प्रभारी तैनात किए जा रहे हैं। महर्षि गौतम इंटर कॉलेज केंद्र पर 21 नवंबर से परीक्षा शुरू हुई है। हिमांशु इसके प्रभारी तैनात किए गए हैं। पूछताछ में हिमांशु ने स्वीकारा कि उन्होंने खैर नारायणपुर के योगेंद्र नाम के व्यक्ति को कंप्यूटर लगाने का जिम्मा दिया था। इससे ज्यादा वे कुछ नहीं जानते। राजवीर ने स्वीकारा कि योगेंद्र ने ही उनके यहां कमरा किराये पर लिया। इसी तरह रामघाट रोड पर कंप्यूटर व इंटरनेट आदि की दुकान चलाने वाले दीपक उर्फ जीतू ने बताया कि योगेंद्र ने उसे यहां इंटरनेट लगाने के लिए काम सौंपा था।
ऐसे की जानी थी परीक्षा सॉल्व
गैंग ने स्कूल के पीछे वाले मकान में दीपक से इंटरनेट कनेक्शन लगवाया। उसके साथ एक वाईफाई राउटर भी लगाया और वहां पर अपना एक मेन सिस्टम इनस्टॉल किया, जिसको स्कूल की लैब से कनेक्ट करने के लिए एक फिजिकल लेन केबल डाली, जो उस मकान से होते हुए कॉलेज की लैब के मेन स्विच में कनेक्ट कर दी गई। ताकि उसका इंटरनेट कनेक्शन कॉलेज के लैब कम्यूटर्स के साथ कनेक्ट हो जाएं। उसके बाद उन्होंने अपने इंटरनेट के वाईफाई राउटर पर स्टैटिक आईपी स्थापित किया और उसमें डीएचसीपी इनेबल कर दिया, जिससे कॉलेज की लैब के सिस्टम चालू होते ही लोकल कनेक्टिविटी व इंटरनेट कनेक्टिविटी दोनों इनेबल हो जाती थी। जिससे वो आईपी की हेल्प से लैब का सिस्टम एनीडेस्क के जरिये रिमोट पर कनेक्ट कर लेते और उसका पूरा कंट्रोल अपने हाथ में लेकर आवेदक का पेपर सॉल्व किया करते।
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अब तक चला ट्रायल, आज होना था सॉल्व
दीपक उर्फ जीतू ने स्वीकारा कि 5-6 दिन पहले योगेन्द्र ने उसे जितेंद्र कुमार निवासी बी-233 लक्ष्मी गार्डन लोनी, जनपद गाजियाबाद की आईडी दी थी। जिस पर मैंने 21 नवंबर को इंटरनेट कनेक्शन राजवीर सिंह के घर में लगा दिया था। वहां 6-7 लोग 2 सीपीयू और 1 मॉनीटर पर दीपक की स्टेटिक आईपी से स्कूल की लैब में लगे कंप्यूटर की आईपी बदलकर उन्हें एनी डेस्क से अपने फोन पर सभी कंप्यूटर का एक्सेस ले रहे थे। 25 नवंबर की सुबह ट्रायल हुआ तो उन लोगों का नेट नहीं चला। इस पर दीपक को व्हाट्सएप कॉल कर बुलाया गया। फिर दीपक वहां आया और राउटर व मॉडम लगाया। इस पर देखा कि एनी डेस्क का एक्सेस किसी और के पास था। वहां उनका नेट नहीं चल रहा था। दीपक को लगा कि उसका राउटर या मॉडम खराब है। सभी प्रयास के बाद भी इंटरनेट नहीं चला तो मोहन ने किसी से फोन पर बात कराई। उधर से दीपक को ‘स्टेटिक आईपी’ राउटर की जगह ‘फाइबर मॉडम’ में डलवाई और उस डिवाइस का डीएचसीपी अनेबल करने को कहा, जिससे उनका इंटरनेट चल गया। फिर राउटर डायनामिक पर करके लोकल आईपी सीपीयू को लेकर लोकल एरिया कनेक्शन में डलवाया और उसने एनी डेस्क से फिर से उन दोनों सिस्टम का एक्सेस अपने सिस्टम पर ले लिया। अभी तक इसका ट्रायल हुआ था। परीक्षा शुक्रवार को सॉल्व होनी थी।
सभी के लिए अलग-अलग रुपये तय थे
दीपक उर्फ जीतू के अनुसार उसे इस काम में एक लाख रुपये देना तय किया गया था। रुपये आज पहला पेपर सॉल्व होने के बाद मिलते। इसी तरह मकान स्वामी को 20 हजार रुपये प्रतिदिन देना तय थे। उसे भी यह रुपये आज के बाद मिलते। वहीं किन अभ्यर्थियों के पेपर सॉल्व होने थे, उनसे कितने रुपये मिलते। ये सभी बातें योगेंद्र की जानकारी में थीं।
आखिर हिमांशु ने योगेंद्र को क्यों दी चाबी
दीपक के अनुसार पूछताछ में साफ हुआ कि योगेंद्र ने उसे भरोसा दिलाया कि परीक्षा केंद्र इंचार्ज से उनकी बात हो गई है। वह भी हमारे साथ हैं। जब भी कंप्यूटर संबंधी समस्या आएगी तो उसको आकर हल करना होगा। इसके आधार पर ही हिमांशु को दबोा गया। जब उनसे कंप्यूटर लैब की चाबी मांगी गई तो उसने बताया कि चाबी योगेंद्र के पास है। इस पर पुलिस के कान खड़े हो गए और सवाल है कि चाबी उसके पास क्यों है। इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए पुलिस देर रात पूछताछ में जुटी थी।
ये आरोपी अभी फरार, सभी योगेंद्र के रिश्तेदार
पुलिस जांच के अनुसार सिर्फ योगेंद्र की एक व्यक्ति है, जिसका नाम, पता या मोबाइल नंबर गिरफ्तार तीनों जानते हैं। बाकी के सिर्फ नाम कुलदीप सिंह, योगेश उर्फ योगी चौधरी, उमेश, प्रदीप, मोहन, भूरा, बिटटू व राजवीर हैं। ये सभी योगेंद्र के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं।
कॉलेज में सिस्टम चलते ही मिल जाता था एक्सेस
हिमांशु ने बताया कि मकान में एक सिस्टम इंस्टाल किया, जिसको कॉलेज की लैब से कनेक्ट करने के लिए एक लैन केबल डाली। इसके बाद गिरोह के लोगों ने ऐसा नेटवर्क तैयार कर लिया, जिससे कॉलेज के कंप्यूटर चालू होते ही उनका एक्सेस मकान में लगे कंप्यूटर में आ जाता था। इसके बाद मकान में बैठे योगेंद्र व उसके साथी परीक्षा को हल करते। इसके लिए हिमांशु को प्रतिदिन एक लाख रुपये देने का आश्वासन दिया गया था।
छह केंद्रों पर आज परीक्षा, बदला स्टाफ
जिले में छह सेंटरों पर कुल 133 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। इनमें 25 नवंबर को परीक्षा हुई है। वहीं 27 नवंबर को फिर से परीक्षा होनी है। अब पूरा स्टाफ बदल दिया गया है।
ये हुआ बरामद
-1 कंप्यूटर सिस्टम मय मॉनीटर, 2 सीपीयू ,1 वाईफाई राउटर, 1 इंटरनेट डिवाइस, 11 1-1 मीटर की ग्रे रंग की लेन केबिल, 3 पावर एडपटर, 4 पावर कोड, 1 वीजीए पावर केबिल, 1 की-बोर्ड, 1 माउस, 1 मल्टी प्लग एक्सटेंशन बोर्ड, 2 पावर इलैक्ट्रीक प्लग, 7 हार्ड डिस्क, 1 काले रंग की लेन केविल आदि।
ये है गिरफ्तारी टीम
सीओ द्वितीय मोहसिन खान की अगुवाई में बन्नादेवी इंस्पेक्टर सुभाष सिंह, एसटीएफ इंस्पेक्टर रविंद्र सिंह, एसआई अरुण निगम, संजय कुमार, संजय सिंह, दीपक कुमार, वीरबोस, रवि वत्स, जानसन, अंकित शर्मा आदि शामिल रहे।
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प्रदेश भर में दरोगा भरती ऑनलाइन परीक्षा के लिए एनसीईआईटी को ठेका मिला है। जिसमें परीक्षा केंद्र पर एनसीईआईटी द्वारा एक-एक परीक्षा केंद्र प्रभारी तैनात किए जा रहे हैं। महर्षि गौतम इंटर कॉलेज केंद्र पर 21 नवंबर से परीक्षा शुरू हुई है। हिमांशु इसके प्रभारी तैनात किए गए हैं। पूछताछ में हिमांशु ने स्वीकारा कि उन्होंने खैर नारायणपुर के योगेंद्र नाम के व्यक्ति को कंप्यूटर लगाने का जिम्मा दिया था। इससे ज्यादा वे कुछ नहीं जानते। राजवीर ने स्वीकारा कि योगेंद्र ने ही उनके यहां कमरा किराये पर लिया। इसी तरह रामघाट रोड पर कंप्यूटर व इंटरनेट आदि की दुकान चलाने वाले दीपक उर्फ जीतू ने बताया कि योगेंद्र ने उसे यहां इंटरनेट लगाने के लिए काम सौंपा था।
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गैंग ने स्कूल के पीछे वाले मकान में दीपक से इंटरनेट कनेक्शन लगवाया। उसके साथ एक वाईफाई राउटर भी लगाया और वहां पर अपना एक मेन सिस्टम इनस्टॉल किया, जिसको स्कूल की लैब से कनेक्ट करने के लिए एक फिजिकल लेन केबल डाली, जो उस मकान से होते हुए कॉलेज की लैब के मेन स्विच में कनेक्ट कर दी गई। ताकि उसका इंटरनेट कनेक्शन कॉलेज के लैब कम्यूटर्स के साथ कनेक्ट हो जाएं। उसके बाद उन्होंने अपने इंटरनेट के वाईफाई राउटर पर स्टैटिक आईपी स्थापित किया और उसमें डीएचसीपी इनेबल कर दिया, जिससे कॉलेज की लैब के सिस्टम चालू होते ही लोकल कनेक्टिविटी व इंटरनेट कनेक्टिविटी दोनों इनेबल हो जाती थी। जिससे वो आईपी की हेल्प से लैब का सिस्टम एनीडेस्क के जरिये रिमोट पर कनेक्ट कर लेते और उसका पूरा कंट्रोल अपने हाथ में लेकर आवेदक का पेपर सॉल्व किया करते।
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अब तक चला ट्रायल, आज होना था सॉल्व
दीपक उर्फ जीतू ने स्वीकारा कि 5-6 दिन पहले योगेन्द्र ने उसे जितेंद्र कुमार निवासी बी-233 लक्ष्मी गार्डन लोनी, जनपद गाजियाबाद की आईडी दी थी। जिस पर मैंने 21 नवंबर को इंटरनेट कनेक्शन राजवीर सिंह के घर में लगा दिया था। वहां 6-7 लोग 2 सीपीयू और 1 मॉनीटर पर दीपक की स्टेटिक आईपी से स्कूल की लैब में लगे कंप्यूटर की आईपी बदलकर उन्हें एनी डेस्क से अपने फोन पर सभी कंप्यूटर का एक्सेस ले रहे थे। 25 नवंबर की सुबह ट्रायल हुआ तो उन लोगों का नेट नहीं चला। इस पर दीपक को व्हाट्सएप कॉल कर बुलाया गया। फिर दीपक वहां आया और राउटर व मॉडम लगाया। इस पर देखा कि एनी डेस्क का एक्सेस किसी और के पास था। वहां उनका नेट नहीं चल रहा था। दीपक को लगा कि उसका राउटर या मॉडम खराब है। सभी प्रयास के बाद भी इंटरनेट नहीं चला तो मोहन ने किसी से फोन पर बात कराई। उधर से दीपक को ‘स्टेटिक आईपी’ राउटर की जगह ‘फाइबर मॉडम’ में डलवाई और उस डिवाइस का डीएचसीपी अनेबल करने को कहा, जिससे उनका इंटरनेट चल गया। फिर राउटर डायनामिक पर करके लोकल आईपी सीपीयू को लेकर लोकल एरिया कनेक्शन में डलवाया और उसने एनी डेस्क से फिर से उन दोनों सिस्टम का एक्सेस अपने सिस्टम पर ले लिया। अभी तक इसका ट्रायल हुआ था। परीक्षा शुक्रवार को सॉल्व होनी थी।
सभी के लिए अलग-अलग रुपये तय थे
दीपक उर्फ जीतू के अनुसार उसे इस काम में एक लाख रुपये देना तय किया गया था। रुपये आज पहला पेपर सॉल्व होने के बाद मिलते। इसी तरह मकान स्वामी को 20 हजार रुपये प्रतिदिन देना तय थे। उसे भी यह रुपये आज के बाद मिलते। वहीं किन अभ्यर्थियों के पेपर सॉल्व होने थे, उनसे कितने रुपये मिलते। ये सभी बातें योगेंद्र की जानकारी में थीं।
आखिर हिमांशु ने योगेंद्र को क्यों दी चाबी
दीपक के अनुसार पूछताछ में साफ हुआ कि योगेंद्र ने उसे भरोसा दिलाया कि परीक्षा केंद्र इंचार्ज से उनकी बात हो गई है। वह भी हमारे साथ हैं। जब भी कंप्यूटर संबंधी समस्या आएगी तो उसको आकर हल करना होगा। इसके आधार पर ही हिमांशु को दबोा गया। जब उनसे कंप्यूटर लैब की चाबी मांगी गई तो उसने बताया कि चाबी योगेंद्र के पास है। इस पर पुलिस के कान खड़े हो गए और सवाल है कि चाबी उसके पास क्यों है। इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए पुलिस देर रात पूछताछ में जुटी थी।
ये आरोपी अभी फरार, सभी योगेंद्र के रिश्तेदार
पुलिस जांच के अनुसार सिर्फ योगेंद्र की एक व्यक्ति है, जिसका नाम, पता या मोबाइल नंबर गिरफ्तार तीनों जानते हैं। बाकी के सिर्फ नाम कुलदीप सिंह, योगेश उर्फ योगी चौधरी, उमेश, प्रदीप, मोहन, भूरा, बिटटू व राजवीर हैं। ये सभी योगेंद्र के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं।
कॉलेज में सिस्टम चलते ही मिल जाता था एक्सेस
हिमांशु ने बताया कि मकान में एक सिस्टम इंस्टाल किया, जिसको कॉलेज की लैब से कनेक्ट करने के लिए एक लैन केबल डाली। इसके बाद गिरोह के लोगों ने ऐसा नेटवर्क तैयार कर लिया, जिससे कॉलेज के कंप्यूटर चालू होते ही उनका एक्सेस मकान में लगे कंप्यूटर में आ जाता था। इसके बाद मकान में बैठे योगेंद्र व उसके साथी परीक्षा को हल करते। इसके लिए हिमांशु को प्रतिदिन एक लाख रुपये देने का आश्वासन दिया गया था।
छह केंद्रों पर आज परीक्षा, बदला स्टाफ
जिले में छह सेंटरों पर कुल 133 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। इनमें 25 नवंबर को परीक्षा हुई है। वहीं 27 नवंबर को फिर से परीक्षा होनी है। अब पूरा स्टाफ बदल दिया गया है।
ये हुआ बरामद
-1 कंप्यूटर सिस्टम मय मॉनीटर, 2 सीपीयू ,1 वाईफाई राउटर, 1 इंटरनेट डिवाइस, 11 1-1 मीटर की ग्रे रंग की लेन केबिल, 3 पावर एडपटर, 4 पावर कोड, 1 वीजीए पावर केबिल, 1 की-बोर्ड, 1 माउस, 1 मल्टी प्लग एक्सटेंशन बोर्ड, 2 पावर इलैक्ट्रीक प्लग, 7 हार्ड डिस्क, 1 काले रंग की लेन केविल आदि।
ये है गिरफ्तारी टीम
सीओ द्वितीय मोहसिन खान की अगुवाई में बन्नादेवी इंस्पेक्टर सुभाष सिंह, एसटीएफ इंस्पेक्टर रविंद्र सिंह, एसआई अरुण निगम, संजय कुमार, संजय सिंह, दीपक कुमार, वीरबोस, रवि वत्स, जानसन, अंकित शर्मा आदि शामिल रहे।