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स्मार्ट सेंसर रखेंगे बूंद बूंद का हिसाब
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आशीष निगम, अलीगढ़।
नगर निगम की टंकी से पानी नहीं आ रहा है। पानी बहुत कम आ रहा है। पानी का प्रेशर कम है, इसलिए दूसरी और तीसरी मंजिल पर नहीं चढ़ रहा है। पाइप लाइन लीक है। पानी दूषित है, पीने लायक बिल्कुल नहीं है। पानी में बदबू आ रही है। अब इन सवालों के जवाब कंट्रोल रूम से मिलेंगे। शहर में नई पुरानी सभी पानी की टंकियों में पेयजल भरने से लेकर आपूर्ति तक पूरा सिस्टम आनलाइन निगरानी में आ रहा है।
इसको लेकर अमृत योजना के तहत सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन यानी स्काडा लागू हो रहा है, जिसमें पानी की टंकी में पानी भरने के बाद सेंसर से पता चलेगा कितना पानी भर गया है। उसके बाद वहां से पानी आपूर्ति होने पर उसकी धारा की तीव्रता, पानी की मात्रा, पानी की गुणवत्ता का पूरा लेखाजोखा होगा। पानी की टंकी से कहां कितना पानी आपूर्ति हुआ। ये भी पता चलेगा।
इसके लिए ट्यूबवेल में ही पूरा कंट्रोल पैनल, फ्लो मीटर, फ्लो रीडिंग मीटर, लेवल सेंसर, प्रेशर सेंसर, आटोमैटिक वाल्व सिस्टम लगाया जा रहा है। इन सभी डिजीटल उपकरणों को आनलाइन जोड़ा जाएगा। इसकी निगरानी के लिए नगर निगम के इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर में अलग से कंटशेल रूम बनेगा। ये ठीक उसी तर्ज पर काम करेगा जैसा कैमरों से चौराहों की निगरानी में हो रहा है। कंट्रोल रूम में बैठे कर्मी इसकी निगरानी कर पूरा डाटा अपडेट रखेंगे और अधिकारियों के पूछने पर बताएंगे। जनता भी अपने इलाके से संबंधित पानी की आपूर्ति का ब्यौरा ले सकेगी।
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1-कंट्रोल पैनल : नलकूप में लगने वाले इस पैनल से पूरा सिस्टम कंट्रोल होगा।
2-फ्लो मीटर : इससे नलकूप से निकलने वाले पानी और आपूर्ति हुए पानी की मात्रा नापी जाएगी।
3-फ्लो रीडिंग मीटर : फलो मीटर की रीडिंग का डिजीटली रिकार्ड करने का उपकरण।
4-लेवल सेंसर : ये भूजल का स्तर बताएगा, जिससे भविष्य की पेयजल योजना बनती रहेगी।
5-प्रेशर सेंसर : इससे पाइप लाइन का पूरा प्रेशर नाप कर उसको दुरुस्त रखा जाएगा।
6-आटोमैटिक वाल्व : इससे नलकूप को मानवरहित बना कर भी उसका संचालन किया जा सकेगा। इसके माध्यम से नलकूप का पूरा सिस्टम जुड़ा रहेगा।
स्काडा प्रोजेक्ट बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पेयजल की पूरी निगरानी का तंत्र विकसित होगा। कंट्रोल रूम से पूरे शहर की पानी की आपूर्ति पर नजर रखी जाएगी। कहीं भी खराबी की सूचना अविलंब मिलेगी। इससे उसको तत्काल दुरुस्त किया जा सकेगा। नलकूपों को संचालित करने में मनमानी नहीं हो पाएगी। पेयजल आपूर्ति का समय दुरुस्त होगा। -जीएस प्रियदर्शी, मंडलायुक्त एवं चेयरमैन स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट लिमिटेड।
केंद्र सरकार ने दिए हैं 1142.87 करोड़ रुपये
मृत (अटल मिशन फार रिजूवेशन एंड अर्बन ट्रांसफार्मेशन) योजना के अंतर्गत उप्र सरकार ने 60 नगर निकायों का चयन कर वहां आवश्यक बुनियादी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना शुरू किया है। वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक की मिशन अवधि पांच वर्ष तय है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 4922.46 के सापेक्ष 1142.87 करोड़ रुपये दिए हैं। प्रदेश सरकार ने केंद्रीय धनराशि तथा राज्य व नगर निकाय की अंश धनराशि से काम कराया है। इस योजना के तहत गलियां, मार्ग आदि का निर्माण हो रहा है। जिन क्षेत्रों में जलापूर्ति का अभाव था, वहां पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इसी तरह से सीवरेज का काम हो रहा है।
सूबे में अब तक 542847 पेयजल और 451691 सीवरेज संयोजन दिए
प्रदेश में अमृत योजना के तहत प्रदेश में अब तक पेयजल के 1094238 प्रस्तावित गृह संयोजन (कनेक्शन) के सापेक्ष 542847 संयोजन व सीवरेज के 969487 संयोजन के सापेक्ष 451691 संयोजन दिये जा चुके हैं। इस योजना में वित्तीय वर्ष 2019-20 में पेयजल की 14 परियोजना एवं 13 सीवरेज की परियोजनाएं संचालित हैं। इन 27 परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद कार्य शुरू हो गए हैं। इसी योजना के तहत अलीगढ़ में भी काम हो रहा है। अमृत योजना की शुरुआत से अब तक पेयजल की 163 एवं सीवरेज 96 परियोजना कुल 259 परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृत मिली है, जिसमें 243 परियोजनाएं निर्माणाधीन है। इनमें पेयजल की 44 एवं सीवरेज की 16 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
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नगर निगम की टंकी से पानी नहीं आ रहा है। पानी बहुत कम आ रहा है। पानी का प्रेशर कम है, इसलिए दूसरी और तीसरी मंजिल पर नहीं चढ़ रहा है। पाइप लाइन लीक है। पानी दूषित है, पीने लायक बिल्कुल नहीं है। पानी में बदबू आ रही है। अब इन सवालों के जवाब कंट्रोल रूम से मिलेंगे। शहर में नई पुरानी सभी पानी की टंकियों में पेयजल भरने से लेकर आपूर्ति तक पूरा सिस्टम आनलाइन निगरानी में आ रहा है।
इसको लेकर अमृत योजना के तहत सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन यानी स्काडा लागू हो रहा है, जिसमें पानी की टंकी में पानी भरने के बाद सेंसर से पता चलेगा कितना पानी भर गया है। उसके बाद वहां से पानी आपूर्ति होने पर उसकी धारा की तीव्रता, पानी की मात्रा, पानी की गुणवत्ता का पूरा लेखाजोखा होगा। पानी की टंकी से कहां कितना पानी आपूर्ति हुआ। ये भी पता चलेगा।
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इसके लिए ट्यूबवेल में ही पूरा कंट्रोल पैनल, फ्लो मीटर, फ्लो रीडिंग मीटर, लेवल सेंसर, प्रेशर सेंसर, आटोमैटिक वाल्व सिस्टम लगाया जा रहा है। इन सभी डिजीटल उपकरणों को आनलाइन जोड़ा जाएगा। इसकी निगरानी के लिए नगर निगम के इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर में अलग से कंटशेल रूम बनेगा। ये ठीक उसी तर्ज पर काम करेगा जैसा कैमरों से चौराहों की निगरानी में हो रहा है। कंट्रोल रूम में बैठे कर्मी इसकी निगरानी कर पूरा डाटा अपडेट रखेंगे और अधिकारियों के पूछने पर बताएंगे। जनता भी अपने इलाके से संबंधित पानी की आपूर्ति का ब्यौरा ले सकेगी।
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1-कंट्रोल पैनल : नलकूप में लगने वाले इस पैनल से पूरा सिस्टम कंट्रोल होगा।
2-फ्लो मीटर : इससे नलकूप से निकलने वाले पानी और आपूर्ति हुए पानी की मात्रा नापी जाएगी।
3-फ्लो रीडिंग मीटर : फलो मीटर की रीडिंग का डिजीटली रिकार्ड करने का उपकरण।
4-लेवल सेंसर : ये भूजल का स्तर बताएगा, जिससे भविष्य की पेयजल योजना बनती रहेगी।
5-प्रेशर सेंसर : इससे पाइप लाइन का पूरा प्रेशर नाप कर उसको दुरुस्त रखा जाएगा।
6-आटोमैटिक वाल्व : इससे नलकूप को मानवरहित बना कर भी उसका संचालन किया जा सकेगा। इसके माध्यम से नलकूप का पूरा सिस्टम जुड़ा रहेगा।
स्काडा प्रोजेक्ट बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पेयजल की पूरी निगरानी का तंत्र विकसित होगा। कंट्रोल रूम से पूरे शहर की पानी की आपूर्ति पर नजर रखी जाएगी। कहीं भी खराबी की सूचना अविलंब मिलेगी। इससे उसको तत्काल दुरुस्त किया जा सकेगा। नलकूपों को संचालित करने में मनमानी नहीं हो पाएगी। पेयजल आपूर्ति का समय दुरुस्त होगा। -जीएस प्रियदर्शी, मंडलायुक्त एवं चेयरमैन स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट लिमिटेड।
केंद्र सरकार ने दिए हैं 1142.87 करोड़ रुपये
मृत (अटल मिशन फार रिजूवेशन एंड अर्बन ट्रांसफार्मेशन) योजना के अंतर्गत उप्र सरकार ने 60 नगर निकायों का चयन कर वहां आवश्यक बुनियादी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना शुरू किया है। वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक की मिशन अवधि पांच वर्ष तय है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 4922.46 के सापेक्ष 1142.87 करोड़ रुपये दिए हैं। प्रदेश सरकार ने केंद्रीय धनराशि तथा राज्य व नगर निकाय की अंश धनराशि से काम कराया है। इस योजना के तहत गलियां, मार्ग आदि का निर्माण हो रहा है। जिन क्षेत्रों में जलापूर्ति का अभाव था, वहां पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इसी तरह से सीवरेज का काम हो रहा है।
सूबे में अब तक 542847 पेयजल और 451691 सीवरेज संयोजन दिए
प्रदेश में अमृत योजना के तहत प्रदेश में अब तक पेयजल के 1094238 प्रस्तावित गृह संयोजन (कनेक्शन) के सापेक्ष 542847 संयोजन व सीवरेज के 969487 संयोजन के सापेक्ष 451691 संयोजन दिये जा चुके हैं। इस योजना में वित्तीय वर्ष 2019-20 में पेयजल की 14 परियोजना एवं 13 सीवरेज की परियोजनाएं संचालित हैं। इन 27 परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद कार्य शुरू हो गए हैं। इसी योजना के तहत अलीगढ़ में भी काम हो रहा है। अमृत योजना की शुरुआत से अब तक पेयजल की 163 एवं सीवरेज 96 परियोजना कुल 259 परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृत मिली है, जिसमें 243 परियोजनाएं निर्माणाधीन है। इनमें पेयजल की 44 एवं सीवरेज की 16 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।