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अलीगढ़ : नामांकन रद्द तो छोटा एक्शन, मुकदमा भी बनता है कानूनन
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एमएलसी स्थानीय निकाय के चुनाव में समाजवादी पार्टी प्रत्याशी जसवंत सिंह यादव पर लगा एक प्रस्तावक के फर्जी दस्तखत से नामांकन का आरोप बेहद गंभीर है। कानूनविदों की राय में सिर्फ नामांकन रद्द करना तो बहुत छोटा एक्शन है। इसमें मुकदमा भी बनता है। यह अलग बात है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद दस्तखत की जांच होगी और फिर कार्रवाई तय होगी। यह मुकदमा खुद प्रस्तावक, निर्वाचन कार्यालय या प्रशासन किसी भी पक्ष की ओर से दर्ज कराया जा सकता है।
यह बात यहां जगजाहिर है कि समाजवादी पार्टी प्रत्याशी व निवर्तमान एमएलसी जसवंत सिंह यादव के नामांकन पर भाजपा प्रत्याशी की ओर से आपत्ति लगाई गई, जिसमें तीन प्रस्तावकों के हस्ताक्षर गलत बताए गए। हालांकि उनमें से दो प्रस्तावक खुद सपा प्रत्याशी के समर्थन में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष पेश हुए, जबकि तीसरा प्रस्तावक पेश नहीं हुआ। उसके हस्ताक्षर को फर्जी माना गया और खुद तीसरे प्रस्तावक प्रमोद कुमार ने भी निर्वाचन अधिकारी को उसके फर्जी हस्ताक्षर से प्रस्तावक बनाकर नामांकन करने का शपथ पत्र दिया। इस आधार पर जसवंत यादव का नामांकन रद्द किया गया है। अब इसमें सही कौन है और गलत कौन है? ये तो जांच का विषय है। मगर कानूनन इसमें नामांकन रद्द करने के साथ-साथ मुकदमे की भी कार्रवाई बनती है। ये निर्वाचन प्रक्रिया के जानकार कानूनविद कहते हैं।
- किसी भी प्रकार का लाभ लेने के लिए अगर कोई किसी के हस्ताक्षर बनाकर किसी पटल पर पेश करता है तो यह धोखाधड़ी की संज्ञा है। मौजूदा प्रकरण में भी कुछ यही बात कथन के अनुसार स्पष्ट समझ में आ रही है। प्रारंभिक रूप से सपा प्रत्याशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो सकता है। यह मुकदमा कराने का अधिकार खुद प्रस्तावक, निर्वाचन अधिकारी या प्रशासन को है। ये अलग बात है कि मुकदमे के बाद दस्तखत की जांच होगी। जांच में तय पाया जाएगा कि कौन सही था और कौन गलत, उसके अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
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- चंद्रशेखर दीक्षित, वरिष्ठ अधिवक्ता
-किसी भी पटल पर इस तरह के फर्जी दस्तखत सहित दस्तावेज पेश करने पर सीधे तौर पर मुकदमा बनता है। अलग बात है कि निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के कारण निर्वाचन अधिकारी के बजाय सक्षम जिला प्रशासन के अधिकारी यह निर्णय लें या फिर खुद प्रस्तावक स्तर से निर्णय लिया जाए। सरकार की ओर से भी यह कार्रवाई की जा सकती है। हां, मुकदमे के आधार पर दस्तखत की जांच भी कराए जाने का प्रावधान है।
- प्रताप सिंह राघव, वरिष्ठ अधिवक्ता
-सपा प्रत्याशी पर नामांकन में एक प्रस्तावक के फर्जी दस्तखत मामले में मुकदमे का कानून है। बेशक वे अपनी दलील हाईकोर्ट जाने की कह रहे हैं। मगर प्रशासन या निर्वाचन अधिकारी के स्तर से सपा प्रत्याशी पर फर्जी प्रस्तावक दाखिल करने पर धोखाधड़ी का अपराध बनता है।
- जगदीश सारस्वत, अध्यक्ष दि अलीगढ़ बार
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यह बात यहां जगजाहिर है कि समाजवादी पार्टी प्रत्याशी व निवर्तमान एमएलसी जसवंत सिंह यादव के नामांकन पर भाजपा प्रत्याशी की ओर से आपत्ति लगाई गई, जिसमें तीन प्रस्तावकों के हस्ताक्षर गलत बताए गए। हालांकि उनमें से दो प्रस्तावक खुद सपा प्रत्याशी के समर्थन में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष पेश हुए, जबकि तीसरा प्रस्तावक पेश नहीं हुआ। उसके हस्ताक्षर को फर्जी माना गया और खुद तीसरे प्रस्तावक प्रमोद कुमार ने भी निर्वाचन अधिकारी को उसके फर्जी हस्ताक्षर से प्रस्तावक बनाकर नामांकन करने का शपथ पत्र दिया। इस आधार पर जसवंत यादव का नामांकन रद्द किया गया है। अब इसमें सही कौन है और गलत कौन है? ये तो जांच का विषय है। मगर कानूनन इसमें नामांकन रद्द करने के साथ-साथ मुकदमे की भी कार्रवाई बनती है। ये निर्वाचन प्रक्रिया के जानकार कानूनविद कहते हैं।
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- किसी भी प्रकार का लाभ लेने के लिए अगर कोई किसी के हस्ताक्षर बनाकर किसी पटल पर पेश करता है तो यह धोखाधड़ी की संज्ञा है। मौजूदा प्रकरण में भी कुछ यही बात कथन के अनुसार स्पष्ट समझ में आ रही है। प्रारंभिक रूप से सपा प्रत्याशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो सकता है। यह मुकदमा कराने का अधिकार खुद प्रस्तावक, निर्वाचन अधिकारी या प्रशासन को है। ये अलग बात है कि मुकदमे के बाद दस्तखत की जांच होगी। जांच में तय पाया जाएगा कि कौन सही था और कौन गलत, उसके अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
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- चंद्रशेखर दीक्षित, वरिष्ठ अधिवक्ता
-किसी भी पटल पर इस तरह के फर्जी दस्तखत सहित दस्तावेज पेश करने पर सीधे तौर पर मुकदमा बनता है। अलग बात है कि निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के कारण निर्वाचन अधिकारी के बजाय सक्षम जिला प्रशासन के अधिकारी यह निर्णय लें या फिर खुद प्रस्तावक स्तर से निर्णय लिया जाए। सरकार की ओर से भी यह कार्रवाई की जा सकती है। हां, मुकदमे के आधार पर दस्तखत की जांच भी कराए जाने का प्रावधान है।
- प्रताप सिंह राघव, वरिष्ठ अधिवक्ता
-सपा प्रत्याशी पर नामांकन में एक प्रस्तावक के फर्जी दस्तखत मामले में मुकदमे का कानून है। बेशक वे अपनी दलील हाईकोर्ट जाने की कह रहे हैं। मगर प्रशासन या निर्वाचन अधिकारी के स्तर से सपा प्रत्याशी पर फर्जी प्रस्तावक दाखिल करने पर धोखाधड़ी का अपराध बनता है।
- जगदीश सारस्वत, अध्यक्ष दि अलीगढ़ बार