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अकाल के समय सर सैयद ने की थी राहत शिविरों में सेवा , आज भी एएमयू बखूबी कर रहा सामाजिक सरोकारों का निर्वहन
Sun, 14 Feb 2021 01:29 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
दीपक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
दीपक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Feb 2021 01:29 AM IST
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राजा जय किशन दास के संबंध में डॉ. सुनिज कुमार द्वारा लिखी गई पुस्तक
- फोटो : अमर उजाला
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के संस्थापक सर सैयद अहमद खान से लेकर आज तक एएमयू सामाजिक सरोकारों का निर्वहन बखूबी कर रहा है, जिस समय देश में अकाल पड़ा था, उस वक्त सर सैयद राहत शिविरों में जाकर सेवा कार्य करते थे। उसी परंपरा को बढ़ाते हुए कोरोना महामारी के समय भी एएमयू ने पीएम केयर फंड में साढ़े पांच करोड़ रुपये दान किए थे।
सन 1860 में अकाल के दौरान जब सर सैयद राहत शिविर में सहायता कर रहे थे, तभी उनकी मुलाकात राजा जय किशन दास से हुई थी, जो आगे चलकर उनके घनिष्ठ सहयोगी बने। सर सैयद और राजा जय किशन दास के संबंधों को किताब की शक्ल में एएमयू के असिस्टेंट प्रोफेसर सुनिज कुमार ने समेटा है। राजा जय किशन दास नाम से लिखी इस पुस्तक में राजा की पहली मुलाकात से लेकर और उनके अंतिम समय तक का विवरण दर्ज किया गया है।
पुस्तक में बताया गया है कि सन 1860 में उत्तर पश्चिम प्रांत में अकाल पड़ा था। इस दौरान मुरादाबाद में सर सैयद अहमद द्वारा राहत कार्य किया जा रहा था, यहीं पर राजा जय किशन दास से सर सैयद अहमद खान की पहली मुलाकात हुई थी। न्याय विभाग में कार्यरत सर सैयद का 1862 में मुरादाबाद से गाजीपुर के लिए तबादला हो गया था। 9 जनवरी 1864 को सर सैयद अहमद खान ने साइंटिफिक सोसायटी की स्थापना की, जिसमें राजा जय किशन दास को भी शामिल किया गया।
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1864 में सर सैयद अहमद खान का गाजीपुर से अलीगढ़ तबादला होने के बाद 2 जुलाई 1866 को ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता राजा जय किशन दास ने की। 1867 में राजा जय किशन दास ने अलीगढ़ के डिप्टी कलेक्टर का पदभार संभाला। तब सर सैयद अहमद ने राजा जय किशन दास को साइंटिफिक सोसायटी का सेक्रेटरी नियुक्त किया। इस तरह पुस्तक में सर सैयद और राजा जय किशन दास की नजदीकियों का विस्तार से वर्णन किया गया है। पुस्तक में यह भी जिक्र मिलता है कि 1905 में जब राजा जय किशन दास का देहांत हुआ, तब एमएओ कॉलेज में एक दिन का शोक अवकाश घोषित किया गया था।
- महामारी के दौरान राष्ट्र के लोगों की सहायता के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर के आह्वान पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों व अन्य स्टाफ ने अपना एक दिन का वेतन पीएम केयर्स फंड में दिया था। यह विश्वविद्यालय की देश के प्रति जिम्मेदारी है। - प्रोफेसर शाफे किदवई, एमआईसी, जनसंपर्क विभाग, एएमयू
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सन 1860 में अकाल के दौरान जब सर सैयद राहत शिविर में सहायता कर रहे थे, तभी उनकी मुलाकात राजा जय किशन दास से हुई थी, जो आगे चलकर उनके घनिष्ठ सहयोगी बने। सर सैयद और राजा जय किशन दास के संबंधों को किताब की शक्ल में एएमयू के असिस्टेंट प्रोफेसर सुनिज कुमार ने समेटा है। राजा जय किशन दास नाम से लिखी इस पुस्तक में राजा की पहली मुलाकात से लेकर और उनके अंतिम समय तक का विवरण दर्ज किया गया है।
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पुस्तक में बताया गया है कि सन 1860 में उत्तर पश्चिम प्रांत में अकाल पड़ा था। इस दौरान मुरादाबाद में सर सैयद अहमद द्वारा राहत कार्य किया जा रहा था, यहीं पर राजा जय किशन दास से सर सैयद अहमद खान की पहली मुलाकात हुई थी। न्याय विभाग में कार्यरत सर सैयद का 1862 में मुरादाबाद से गाजीपुर के लिए तबादला हो गया था। 9 जनवरी 1864 को सर सैयद अहमद खान ने साइंटिफिक सोसायटी की स्थापना की, जिसमें राजा जय किशन दास को भी शामिल किया गया।
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1864 में सर सैयद अहमद खान का गाजीपुर से अलीगढ़ तबादला होने के बाद 2 जुलाई 1866 को ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता राजा जय किशन दास ने की। 1867 में राजा जय किशन दास ने अलीगढ़ के डिप्टी कलेक्टर का पदभार संभाला। तब सर सैयद अहमद ने राजा जय किशन दास को साइंटिफिक सोसायटी का सेक्रेटरी नियुक्त किया। इस तरह पुस्तक में सर सैयद और राजा जय किशन दास की नजदीकियों का विस्तार से वर्णन किया गया है। पुस्तक में यह भी जिक्र मिलता है कि 1905 में जब राजा जय किशन दास का देहांत हुआ, तब एमएओ कॉलेज में एक दिन का शोक अवकाश घोषित किया गया था।
- महामारी के दौरान राष्ट्र के लोगों की सहायता के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर के आह्वान पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों व अन्य स्टाफ ने अपना एक दिन का वेतन पीएम केयर्स फंड में दिया था। यह विश्वविद्यालय की देश के प्रति जिम्मेदारी है। - प्रोफेसर शाफे किदवई, एमआईसी, जनसंपर्क विभाग, एएमयू