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बॉलीवुड में जाने के लिए बेताब हैं मैथिली ठाकुर

Wed, 05 Feb 2020 02:09 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 05 Feb 2020 02:09 AM IST
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Singer Maithili Thakur in Aligarh
कोहिनूर मंच पर अपनी प्रस्तुति देती गायिका मैथिली ठाकुर। - फोटो : CITY OFFICE
राजा तिवारी
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देश में वर्ष 2017 से अपनी गायकी की छाप छोड़ने वाली मैथिली ठाकुर बॉलीवुड में जाने को बेताब हैं। अगर उन्हें मौका मिलेगा तो वह बॉलीवुड में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। इतना ही नहीं बॉलीवुड में ब्रज की छाप भी छोड़ेंगे। क्योंकि उन्हें ब्रज भाषा बहुत प्यारी लगती है। यह बातें मैथिली ठाकुर ने अमर उजाला को दिए अपने साक्षात्कार में कहीं। मैथिली मंगलवार को नुमाइश के कोहिनूर मंच पर भजन संध्या करने आईं थी।
मैथिली ने बताया कि उनके पिता रमेश ठाकुर ही उनके गुरु हैं। गाना और बजाना उन्होंने ही सिखाया है। गाने बजाने की शिक्षा बचपन से ही शुरू हो गई थी। इसलिए बचपन में ही पिता रमेश ठाकुर ने मैथिली ठाकुर, अयाची ठाकुर और ऋषभ की संगत बना दी। तीनों मिलकर घंटों अभ्यास किया हैं। जब उन्हें अपनी संगत मजबूत होती दिखाई दी तो वर्ष 2017 में अपनी वीडियो सोशल मीडिया पर डालना शुरू कर दिया। मैथिली की गायकी और भाइयों की संगत को देश ने खूब प्यार दिया। आज मैथिली के सोशल मीडिया अकाउंट, पेज और वीडियो चैनल पर लाखों की संख्या में फॉलोवर हैं। वह मधुबनी बिहार की रहने वाली हैं। इस समय दिल्ली के द्वारिका में रहकर भारती कालेज दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। भाई ऋषभ ठाकुर कक्षा 11 और छोटा भाई अयाची ठाकुर कक्षा सात में पढ़ रहे हैं। उन्होंने अलीगढ़ वासियों से कहा कि जब तक उन्हें बुलाते रहेंगे, वह अलीगढ़ आती रहेंगी।
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हारमोनियम से है प्यार
मैथिली ठाकुर ने बताया कि वह कीबोर्ड भी बजा लेती हैं। लेकिन उन्हें हारमोनियम से अधिक प्यार है। घर में 16-17 हारमोनियम हैं। मैथिली ने बताया कि उनके पास जर्मनी, समोसा और पाली टाना हारमोनियम की कई वैरायटी हैं।
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सीखना चाहती हैं सभी भाषाएं
मैथिली ने बताया कि देश उनसे खूब प्यार करता है। इसलिए वह देश के विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में जाती हैं। अलग-अलग जगहों की भाषाएं बहुत अच्छी लगती हैं। वह सभी भाषा सीखने की कोशिश करती हैं। लोगों से बात कर शब्दों का अर्थ समझना और इंटरनेट के सहारे भाषा को सीखने की कोशिश करती हैं। उन्हें सबसे अच्छी ब्रज भाषा लगती है। जिसे वह समझ तो जाती हैं, लेकिन बोल नहीं पाती हैं।

एक दिन में आते हैं हजारों व्हाट्सएप मैसेज
मैथिली के मोबाइल में प्रतिदिन हजारों की संख्या में व्हाट्सएप मैसेज आते हैं। मैथिली ने बताया कि औसतन पांच हजार से अधिक मैसेज प्रतिदिन आते हैं। वह बहुत संकोच में रहती हैं कि लोगों के जवाब नहीं दे पातीं। इसलिए वह सोशल मीडिया पर लाइव आती रहती हैं। जहां वह अधिक से अधिक प्रशंसकों से वार्ता कर सकें।
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