Aligarh: दिसंबर में पूरा होना था सर्विस रोड निर्माण, फरवरी में भी चल रहा काम, दो माह से रुका फ्लाईओवर का कार्य
जिला प्रशासन ने दिसंबर तक सर्विस रोड का निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए थे, मगर फरवरी माह में भी सर्विस रोड का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। धुंआ और धूल से कई पुलिस वाले बीमार भी पड़ गए हैं।
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जाम से निपटने को क्वार्सी चौराहे पर फ्लाईओवर निर्माण का काम दो माह से रुका हुआ है। रूट डायवर्जन को एक ओर बनाई जा रही सर्विस रोड का काम भी धीमी गति से चलने से हजारों लोग परेशान हैं। जबकि जिला प्रशासन ने दिसंबर तक सर्विस रोड का निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए थे, मगर फरवरी माह में भी सर्विस रोड का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। धुंआ और धूल से कई पुलिस वाले बीमार भी पड़ गए हैं।
क्वार्सी चौराहे से रोजाना करीब 25-30 हजार वाहनों की आवाजाही होती है। अतरौली, बुलंदशहर, अनूपशहर, कानपुर नेशनल हाईवे, एटा और मीनाक्षी पुल की ओर आने-जाने वाले वाहनों की वजह से अक्सर यहां जाम लगा रहता है। इस कारण यहां 71.17 करोड़ रुपये की लागत से 627.793 मीटर लंबा और 16.8 मीटर चौड़ा फोरलेन फ्लाई ओवर बनाया जा रहा है। इसके बनने से जाम की स्थिति खत्म होगी। 27 सितंबर में स्वीकृति मिली थी। फरवरी-2024 से निर्माण कार्य शुरू हुआ, 28 जनवरी 2026 में निर्माण कार्य पूरा होना है।
सेतु निगम के द्वारा चौराहे के दोनों तरफ 12 पिलर बना दिए गए है। अब ऊपर का कार्य शुरू करने के लिए यातायात को डायवर्ट करना था। इसके लिए एक ओर पांच मीटर सर्विस रोड का निर्माण कार्य कराना था। जिसका कार्य दिसंबर में पूरा होना था। डीएम ने समीक्षा बैठक में इस पर नाराजगी जाहिर की थी। मगर उसके बावजूद कार्य में प्रगति नहीं आई और फरवरी माह बीतने को है, अभी भी सर्विस रोड का निर्माण चल रहा है। इसी गति से कार्य चलता रहा, ताे तय समय पर फ्लाई ओवर का निर्माण असंभव है। कार्यदायी संस्था नाले पर स्लैब डाल कर पुल बना रही है। जिससे वाहनों को आने जाने में कोई परेशानी न हो सके।
क्वार्सी चौराहे पर फ्लाई ओवर का निर्माण कार्य यातायात डायवर्ट होने के बाद तेजी से शुरू कराया जाएगा। ब्रिज के निर्माण के समय यातायात गुजरेगा तो परेशानी आएगी। इस कारण सर्विस रोड का निर्माण कराया जा रहा है। कुछ परेशानी के कारण सर्विस रोड निर्माण की गति धीमी है। मगर इसी माह इसे पूरा कर, मार्च से फ्लाई ओवर पर कार्य शुरू करा दिया जाएगा।-मोहित कुमार, डीपीएम, सेतु निगम