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मुंडनपुर की जमीन पर हक को लेकर फंसा पेंच

Tue, 18 Dec 2018 01:40 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Published by: राजेश सिंह Updated Tue, 18 Dec 2018 01:40 AM IST
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Screwed over the land on the land of Mundanpur
वन विभाग के खिलाफ कलेक्ट्रेट पर प्रर्दशन करते ग्राम मंडनपुर के ग्रामीण - फोटो : Amar Ujala
अकराबाद  ब्लाक के इरखिनी मंडनपुर में वन विभाग और ग्रामीणों के बीच जमीन का विवाद गहरा गया है। इस संबंध में डीएम चंद्रभूषण सिंह ने वन विभाग के दस्तावेज तलब कर लिए हैं। जिला वन अधिकारी श्रीधर त्रिपाठी ने बताया कि इस मामले में वन विभाग की जमीन को खुर्दबुर्द करने में कुछ विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता सामने आ रही है, जिसमें जांच चल रही है। डीएम के निर्देश पर एडीएम प्रशासन अजय श्रीवास्तव ने तहसीलदार कोल गौतम सिंह को इस प्रकरण की जांच सौंप दी है। 
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मुंडनपुर निवासी ग्रामीणों ने सोमवार को प्रशासन द्वारा पट्टे की जमीन को कब्जामुक्त कराने, फसल जुतवाने का विरोध करते हुए दस्तावेजों की जांच के लिए एक ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा है। ग्रामीणों ने कहा कि उक्त प्रकरण की जांच कराकर ही कोई निर्णय लिया जाए। जिससे उनकी फसल भी बच जाए। कहा कि फसल ही उनके जीने का एकमात्र सहारा है। 29 नवंबर को प्रशासन ने वन विभाग का हक जताकर मंडनपुर के ग्रामीणों से 300 बीघा जमीन कब्जा मुक्त कराई थी। 
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इस दौरान प्रशासन कर्मियों को महिलाओं के विरोध का सामना भी करना पड़ा था। उक्त प्रकरण को लेकर कलेक्ट्रेट में सैकड़ों की संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें 1975, 1985 व 1993 में उपजिलाधिकारी द्वारा विधिवत खुले प्रस्ताव द्वारा भूमिहीन किसानों को नियमानुसार जमीन आवंटित की थी। जो राजस्व अभिलेखों में ऊसर भूमि दर्ज है। जिसके सभी दस्तावेज किसानों के पास मौजूद हैं। किसानों ने कहा कि 1982 से 1986 तक चली चकबंदी में कोई रकबा वन विभाग के नाम दर्ज नहीं था तो अब वन विभाग की जमीन बताकर उनसे क्यों छीनी जा रही है। अगर वन विभाग का मालिकाना हक दर्ज था तो प्रशासन ने किसानों को जमीन आवंटित क्यों की और चक कैसे काटे..? इसमें किसानों का क्या दोष है। किसानों ने कहा कि उन्होंने दिन रात मेहनत करके ऊसर भूमि को खेती योग्य बनाया है। जिसमें काफी श्रम, समय व धन खर्च हुआ है।
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इसी लिए उक्त प्रकरण की जांच की जाए और तब तक फसलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाए। इस संबंध में डीएम ने बन विभाग से दस्तावेज तलब कर लिए हैं। साथ ही किसानों को राहत दे दी है कि दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही कार्यवाही की जाएगी। इस मौके पर शिवचरन, फुलवारी, बनवारी, हरमुखराम, विजय सिंह, लक्ष्मण, भूरे, राजपाल, रामबाबू, त्रिलोक सिंह, ओमप्रकाश, रामप्रकाश, महेश आदि     मौजूद रहे। 
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