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सारसौल बस अड्डा : घाटे का सौदा देख ठिठकीं कंपनियां
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शहर के सारसौल चौराहा पर स्थित सारसौल यानी सैटेलाइट बस अड्डे का निर्माण पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत होना है। शासन ने 262 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। 42 हजार वर्ग मीटर जमीन पर बस अड्डे का निर्माण होना है। लेकिन कंपनियां घाटे का सौदा देखकर आगे नहीं आ रही है। वर्तमान में यहां से 150 बसों का संचालन प्रतिदिन हो रहा है।
31 अक्तूबर 2018 को सारसौल चौराहे पर स्थित 42 हजार वर्ग मीटर जमीन को रोडवेज को आवंटित कर तत्कालीन मंडलायुक्त ने इस बस अड्डे का संचालन शुरू कराया था। तभी तय हुआ था कि यहां पर शहर का सबसे आधुनिक बस अड्डा बनाया जाएगा। यहां से दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, उत्तराखंड, हरियाणा की बसों का संचालन किया जाएगा। इसको लेकर तैयारियां शुरू हुईं। साल 2021 की शुरुआत में शासन ने 262 करोड़ रुपये का बजट तय किया। निर्माण के लिए निजी कंपनियों को आमंत्रित किया गया। उनको बताया गया कि यह बस अड्डा पीपीपी मॉडल पर आधारित होगा। मगर, कंपनियां इतनी बड़ी धनराशि देखकर पीछे हट गईं। जानकारों के मुताबिक, अगर कंपनियां यहां पर इतना बड़ा निवेश करती हैं तो उसकी लागत वसूलने में उनको कई साल लग सकते हैं। ऐसे में कंपनियां इस प्रोजेक्ट में दिलचस्पी नहीं ले रही हैं।
इधर, शासन और स्थानीय प्रशासन की मंशा है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस अड्डे का काम शुरू करा दिया जाए। जनप्रतिनिधि भी इसी प्रयास में हैं। सैटेलाइट बस अड्डे से वर्तमान में 150 बसों का संचालन प्रतिदिन हो रहा है। रोडवेज अधिकारियों के मुताबिक निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही यहां से बसों का संचालन बंद कर दिया जाएगा। मसूदाबाद और गांधी पार्क बस अड्डे से बसों का संचालन किया जाएगा। इस संबंध में आरएम परवेज खान ने बताया कि सैटेलाइट बस अड्डे के संबंध में शासन स्तर से ही निर्णय हो रहे हैं। अभी तक इसके निर्माण के संबंध में जानकारी नहीं मिली है।
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31 अक्तूबर 2018 को सारसौल चौराहे पर स्थित 42 हजार वर्ग मीटर जमीन को रोडवेज को आवंटित कर तत्कालीन मंडलायुक्त ने इस बस अड्डे का संचालन शुरू कराया था। तभी तय हुआ था कि यहां पर शहर का सबसे आधुनिक बस अड्डा बनाया जाएगा। यहां से दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, उत्तराखंड, हरियाणा की बसों का संचालन किया जाएगा। इसको लेकर तैयारियां शुरू हुईं। साल 2021 की शुरुआत में शासन ने 262 करोड़ रुपये का बजट तय किया। निर्माण के लिए निजी कंपनियों को आमंत्रित किया गया। उनको बताया गया कि यह बस अड्डा पीपीपी मॉडल पर आधारित होगा। मगर, कंपनियां इतनी बड़ी धनराशि देखकर पीछे हट गईं। जानकारों के मुताबिक, अगर कंपनियां यहां पर इतना बड़ा निवेश करती हैं तो उसकी लागत वसूलने में उनको कई साल लग सकते हैं। ऐसे में कंपनियां इस प्रोजेक्ट में दिलचस्पी नहीं ले रही हैं।
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इधर, शासन और स्थानीय प्रशासन की मंशा है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस अड्डे का काम शुरू करा दिया जाए। जनप्रतिनिधि भी इसी प्रयास में हैं। सैटेलाइट बस अड्डे से वर्तमान में 150 बसों का संचालन प्रतिदिन हो रहा है। रोडवेज अधिकारियों के मुताबिक निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही यहां से बसों का संचालन बंद कर दिया जाएगा। मसूदाबाद और गांधी पार्क बस अड्डे से बसों का संचालन किया जाएगा। इस संबंध में आरएम परवेज खान ने बताया कि सैटेलाइट बस अड्डे के संबंध में शासन स्तर से ही निर्णय हो रहे हैं। अभी तक इसके निर्माण के संबंध में जानकारी नहीं मिली है।
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