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सरकारी स्कूल का गेट ढहने से बच्चे की मौत
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Tue, 06 Dec 2016 01:59 AM IST
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Public school gate collapsed child deaths
- फोटो : Amar Ujala
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घटिया निर्माण और शिक्षकों की संवेदनहीनता ने छह साल के छात्र की जान ले ली। थाना दादों के गांव सांकरा स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय का गेट अचानक कक्षा एक के छात्र के ऊपर ढह गया। हादसा होते ही स्कूल के शिक्षक उसको मलबे में दबा छोड़कर भाग निकले।
जानकारी मिलने पर परिजनों ने उसे मलबे से निकाला पर तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी। साल भर पहले ही स्कूल के हेड मास्टर ने ही सरकारी धन से बाउंड्री और गेट का निर्माण कराया था। सोमवार सुबह स्कूल में पढ़ने पहुंचे कुछ बच्चे गेट पर लटककर खेलने लगे।
इसी बीच गेट भरभराकर ढह गया। सांकरा निवासी कक्षा एक का छात्र सूरज कुमार पुत्र रामऔतार शर्मा इसके मलबे के नीचे दब गया। ग्रामीणों का आरोप है कि तीनों शिक्षक बच्चे को इसी हालत में छोड़कर भाग निकले। गेट-बाउंड्री के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग हुआ था, इसीलिए साल भर में ही गेट गिर गया। मौके पर पहुंचे परिजनों ने बच्चे को बाहर निकाला।
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परिवार की ओर से घटना की शिकायत बेसिक शिक्षा विभाग एवं पुलिस से नहीं की गई।
मृतक के पिता रामऔतार शर्मा का कहना है कि शव का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे इसलिए शिकायत नहीं की। शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। चार भाइयों में सूरज सबसे छोटा था। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस बच्चे को समय रहते उचित उपचार मिल जाता तो उसे बचाया जा सकता था।
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जानकारी मिलने पर परिजनों ने उसे मलबे से निकाला पर तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी। साल भर पहले ही स्कूल के हेड मास्टर ने ही सरकारी धन से बाउंड्री और गेट का निर्माण कराया था। सोमवार सुबह स्कूल में पढ़ने पहुंचे कुछ बच्चे गेट पर लटककर खेलने लगे।
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इसी बीच गेट भरभराकर ढह गया। सांकरा निवासी कक्षा एक का छात्र सूरज कुमार पुत्र रामऔतार शर्मा इसके मलबे के नीचे दब गया। ग्रामीणों का आरोप है कि तीनों शिक्षक बच्चे को इसी हालत में छोड़कर भाग निकले। गेट-बाउंड्री के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग हुआ था, इसीलिए साल भर में ही गेट गिर गया। मौके पर पहुंचे परिजनों ने बच्चे को बाहर निकाला।
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परिवार की ओर से घटना की शिकायत बेसिक शिक्षा विभाग एवं पुलिस से नहीं की गई।
मृतक के पिता रामऔतार शर्मा का कहना है कि शव का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे इसलिए शिकायत नहीं की। शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। चार भाइयों में सूरज सबसे छोटा था। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस बच्चे को समय रहते उचित उपचार मिल जाता तो उसे बचाया जा सकता था।