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कोल विस सीट पर सपा के टिकट दावेदारों के बीच कड़ा मुकाबला
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क्वार्सी सपा कार्यालय में मोहम्मद सगीर के सपा में आने पर स्वागत करते जिलाध्यक्ष गिरीश यादव।
- फोटो : CITY OFFICE
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आशीष निगम
कोल विधानसभा की सीट पर सपा के टिकट को लेकर अभी से घमासान शुरू हो गया है। हालांकि, चुनाव होने में लगभग सवा साल का वक्त बचा है। वजह ये है कि सपा के अधिकांश मुस्लिम नेता जिले में कोल और शहर विधानसभा को ही तरजीह देते हैं। तीसरे नंबर पर छर्रा विधानसभा और फिर बाकी विधानसभाएं हैं। इसका सबसे बड़ा कारण जिले की अधिकांश मुस्लिम आबादी इन्हीं दो विधानसभाओं में रहती है। जिससे सपा को परंपरागत वोट मिलने की उम्मीद रहती है। छर्रा विधानसभा में सपा का यादव-मुस्लिम समीकरण फिट होता है, इसलिए तीसरे नंबर पर ये विधानसभा पसंदीदा रहती है। यही नहीं भौगोलिक रूप से शहर और कोल विधानसभा के समानांतर ही एटा चुंगी बाईपास रोड से छर्रा विधानसभा शुरू हो जाती है।
कोल विधानसभा के टिकट के दावेदारों में प्रमुख रूप से युवजन सभा के प्रदेश सचिन सलमान शाहिद, ख्वाजा हसन जिब्रान, मो. उस्मान, अज्जू इस्हाक सहित कई और दावेदार हैं। अब पूर्व विधायक जमीरउल्लाह और मो. सगीर की सपा में एंट्री से टिकट का मुकाबला और कांटे का हो गया है। जिसमें जमीरउल्लाह कोल विधानसभा से वर्ष 2012 में विधायक चुने गए और वर्ष 2017 में निर्दलीय चुनाव लड़ कर दस हजार से अधिक वोट ले गए थे। हालांकि, सभी की लखनऊ तक पहुंच है। सब अपनी अपनी बिसात बिछा रहे हैं।
खैर, टिकट की इस लड़ाई में अभी कोई और बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम भी हो सकता है। क्योंकि अभी कांग्रेस और बसपा के दावेदार मैदान में आने बाकी हैं। असदुद्दीन औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम से उम्मीदवार सामने आना बाकी है। बिहार में पांच सीटें जितने के बाद ये पार्टी भी मुस्लिम बहुल विधानसभाओं में मजबूत हो रही है। इसका भी असर देखने को मिलेगा। ऐसे में सपा के कुछेक दावेदारों का रुझान दूसरे विकल्पों पर भी हो सकता है, जो आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है।
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कोल विधानसभा की सीट पर सपा के टिकट को लेकर अभी से घमासान शुरू हो गया है। हालांकि, चुनाव होने में लगभग सवा साल का वक्त बचा है। वजह ये है कि सपा के अधिकांश मुस्लिम नेता जिले में कोल और शहर विधानसभा को ही तरजीह देते हैं। तीसरे नंबर पर छर्रा विधानसभा और फिर बाकी विधानसभाएं हैं। इसका सबसे बड़ा कारण जिले की अधिकांश मुस्लिम आबादी इन्हीं दो विधानसभाओं में रहती है। जिससे सपा को परंपरागत वोट मिलने की उम्मीद रहती है। छर्रा विधानसभा में सपा का यादव-मुस्लिम समीकरण फिट होता है, इसलिए तीसरे नंबर पर ये विधानसभा पसंदीदा रहती है। यही नहीं भौगोलिक रूप से शहर और कोल विधानसभा के समानांतर ही एटा चुंगी बाईपास रोड से छर्रा विधानसभा शुरू हो जाती है।
कोल विधानसभा के टिकट के दावेदारों में प्रमुख रूप से युवजन सभा के प्रदेश सचिन सलमान शाहिद, ख्वाजा हसन जिब्रान, मो. उस्मान, अज्जू इस्हाक सहित कई और दावेदार हैं। अब पूर्व विधायक जमीरउल्लाह और मो. सगीर की सपा में एंट्री से टिकट का मुकाबला और कांटे का हो गया है। जिसमें जमीरउल्लाह कोल विधानसभा से वर्ष 2012 में विधायक चुने गए और वर्ष 2017 में निर्दलीय चुनाव लड़ कर दस हजार से अधिक वोट ले गए थे। हालांकि, सभी की लखनऊ तक पहुंच है। सब अपनी अपनी बिसात बिछा रहे हैं।
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खैर, टिकट की इस लड़ाई में अभी कोई और बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम भी हो सकता है। क्योंकि अभी कांग्रेस और बसपा के दावेदार मैदान में आने बाकी हैं। असदुद्दीन औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम से उम्मीदवार सामने आना बाकी है। बिहार में पांच सीटें जितने के बाद ये पार्टी भी मुस्लिम बहुल विधानसभाओं में मजबूत हो रही है। इसका भी असर देखने को मिलेगा। ऐसे में सपा के कुछेक दावेदारों का रुझान दूसरे विकल्पों पर भी हो सकता है, जो आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है।
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