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Aligarh News: संत उड़िया बाबा ने 1930 में कराई थी मंदिर में मूर्तियों की स्थापना
Thu, 23 Jan 2025 12:54 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Thu, 23 Jan 2025 12:54 AM IST
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करीब सौ साल पुराना श्रीशिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का विशेष केंद्र है। प्रसिद्ध संत उड़िया बाबा ने शिव परिवार सहित श्रीराम दरबार, हनुमानजी, राधाकृष्ण, मां गंगा और भैरव बाबा के विग्रह की विधि-विधान से स्थापना कराई।
कस्बा निवासी अग्रवाल परिवार ने आबादी से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर ककइया ईंटों से मंदिर सहित कुएं का निर्माण कराया था। मंदिर का ढांचा बनकर तैयार ही हुआ था कि मंदिर की जमीन भीकमपुर रियासत के नवाब मुजमुल्ला खां और नवाब रहमतउल्ला के अधीन आ गई। इसी बीच दानदाता अग्रवाल परिवार के सदस्य छर्रा छोड़कर राजस्थान और फिरोजाबाद में जाकर बस गए थे। कस्बा निवासी बाबूराम शर्मा, लाला रेवती प्रसाद, लाला डालचंद्र गुप्ता, पं. श्याम सुंदर शर्मा, पं. रामप्रकाश पांडे, सेठ जाहरीमल गुप्ता, पन्नालाल माहेश्वरी, पं. वेदराम शर्मा के प्रयास के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर में प्लास्टर सहित अन्य कार्य करवाए। मंदिर परिसर में धर्मशाला का निर्माण कराया और गेट लगवाया।
बताते हैं कि प्रसिद्ध संत उड़िया बाबा देश का भ्रमण करते हुए यहां आए थे। श्रद्धालुओं की मांग पर उड़िया बाबा ने ही वर्ष 1930 में यहां शिवलिंग सहित मूर्तियों की स्थापना कराई थी। श्रद्धालुओं में विश्वास है कि भगवान शिव के समक्ष सच्चे मन से की गई मनोकामना जरूर पूर्ण होती है। यहां पर हर साल रामलीला का आयोजन होता है। शिव मंदिर के मैदान में सब्जी की बड़ी मंडी लगती है। सूत की पैंठ है।
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आजादी के बाद से हर साल होती है रामलीला
मंदिर में करीब 40 वर्ष से कार्यरत वरिष्ठ लिपिक दर्शनबाबू शर्मा बताते हैं कि वर्ष 1947 में देश के आजाद होने के बाद पहली बार शिव मंदिर के मैदान में हर्षोल्लास के साथ रामलीला का आयोजन किया गया था। तब से प्रतिवर्ष यहां रामलीला का आयोजन होता आ रहा है। 18-19 दिन तक चलने वाले महोत्सव में बड़ी संख्या में दर्शक रामलीला का मंचन देखने पहुंचते हैं।
छोटे मंदिर में 10 फरवरी को स्थापित होंगी मूर्तियां
श्रीशिव मंदिर पसिर में श्रद्धालुओं की ओर से एक छोटे मंदिर का निर्माण भी कराया गया है। इस मंदिर में 10 फरवरी को सूर्य देव, शनि देव, परशुराम, माता सरस्वती, गोमाता, हनुमानजी, भगवान श्रीकृष्ण, माता लक्ष्मी सहित भगवान विष्णु, श्रीगणेश और ब्रह्मा जी की मूर्तियों की स्थापना होगी।
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कस्बा निवासी अग्रवाल परिवार ने आबादी से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर ककइया ईंटों से मंदिर सहित कुएं का निर्माण कराया था। मंदिर का ढांचा बनकर तैयार ही हुआ था कि मंदिर की जमीन भीकमपुर रियासत के नवाब मुजमुल्ला खां और नवाब रहमतउल्ला के अधीन आ गई। इसी बीच दानदाता अग्रवाल परिवार के सदस्य छर्रा छोड़कर राजस्थान और फिरोजाबाद में जाकर बस गए थे। कस्बा निवासी बाबूराम शर्मा, लाला रेवती प्रसाद, लाला डालचंद्र गुप्ता, पं. श्याम सुंदर शर्मा, पं. रामप्रकाश पांडे, सेठ जाहरीमल गुप्ता, पन्नालाल माहेश्वरी, पं. वेदराम शर्मा के प्रयास के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर में प्लास्टर सहित अन्य कार्य करवाए। मंदिर परिसर में धर्मशाला का निर्माण कराया और गेट लगवाया।
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बताते हैं कि प्रसिद्ध संत उड़िया बाबा देश का भ्रमण करते हुए यहां आए थे। श्रद्धालुओं की मांग पर उड़िया बाबा ने ही वर्ष 1930 में यहां शिवलिंग सहित मूर्तियों की स्थापना कराई थी। श्रद्धालुओं में विश्वास है कि भगवान शिव के समक्ष सच्चे मन से की गई मनोकामना जरूर पूर्ण होती है। यहां पर हर साल रामलीला का आयोजन होता है। शिव मंदिर के मैदान में सब्जी की बड़ी मंडी लगती है। सूत की पैंठ है।
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आजादी के बाद से हर साल होती है रामलीला
मंदिर में करीब 40 वर्ष से कार्यरत वरिष्ठ लिपिक दर्शनबाबू शर्मा बताते हैं कि वर्ष 1947 में देश के आजाद होने के बाद पहली बार शिव मंदिर के मैदान में हर्षोल्लास के साथ रामलीला का आयोजन किया गया था। तब से प्रतिवर्ष यहां रामलीला का आयोजन होता आ रहा है। 18-19 दिन तक चलने वाले महोत्सव में बड़ी संख्या में दर्शक रामलीला का मंचन देखने पहुंचते हैं।
छोटे मंदिर में 10 फरवरी को स्थापित होंगी मूर्तियां
श्रीशिव मंदिर पसिर में श्रद्धालुओं की ओर से एक छोटे मंदिर का निर्माण भी कराया गया है। इस मंदिर में 10 फरवरी को सूर्य देव, शनि देव, परशुराम, माता सरस्वती, गोमाता, हनुमानजी, भगवान श्रीकृष्ण, माता लक्ष्मी सहित भगवान विष्णु, श्रीगणेश और ब्रह्मा जी की मूर्तियों की स्थापना होगी।