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Aligarh News: नदी-नहरों पर बने पुलों पर सुरक्षा की अनदेखी

Tue, 24 Feb 2026 01:59 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 24 Feb 2026 01:59 AM IST
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Safety neglect on bridges built over rivers and canals
तलसेरा व नयाबास के बीच नहर का सायफन पुल की सुरक्षा दीवार। संवाद  - फोटो : samvad
नदी-नहरों पर बने पुल-पुलियों पर रेलिंग और बाउंड्री टूटी होने से हादसे थम नहीं रहे हैं। बिजौली में हरदोई रजबहा पर बिना रेलिंग के पुल से बरात की बस गिरने के अलावा जिले में कई स्थानों के बिना बाउंड्री के पुल हैं, जिसमें गोंडा में हाथरस ब्रांच नहर का पुल और सायफन पुल हादसों का कारण बने हुए हैं।
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गोंडा संवाददाता के अनुसार खैर-टैंटी गांव मार्ग स्थित नगला बिरखू के समीप से हाथरस ब्रांच की नहर गुजर रही है, नहर पर बना पुल काफी पुराना है। वर्ष 2016 में मार्ग का चौड़ीकरण हुआ तो मार्ग सात मीटर चौड़ा हो गया परन्तु पुल की चौड़ाई करीब चार मीटर ही रही। नगला बिरखू की ओर से खैर जाने के दौरान पुल से पहले हल्का मोड़ है, वहां पुल संकरे होने का कोई संकेतक नहीं है। मोड़ से बढ़ते ही संकरा पुल पर आने वाले वाहन अनियंत्रित होते हैं या तो वह बाउंड्रीवाॅल से टकराते हैं या नहर में गिर जाते हैं, जबकि यह मार्ग खैर क्षेत्र सहित, गोंडा के गांव के लोगों के लिए वृंदावन जाने के लिए सबसे मुफीद मार्ग है।
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सायफन पुल पर भी होते हैं हादसे

क्षेत्र से गुजर रही करबन नदी और हाथरस ब्रांच नहर गांव तलेसरा और नयाबास के बीच में एक-दूसरे को क्रास रही हैं। अंग्रेजों के समय में करबन नदी के ऊपर से नहर को गुजारने के लिए सायफन पुल का निर्माण वर्ष 1911 में कराया गया था, पुल पर उस समय सुरक्षा के लिहाज से लोहे की रेलिंग लगी हुई थी। समय बीतने के साथ ही अवांछनीय तत्वों ने पुल से रेलिंग धीरे-धीरे गायब कर दी। वर्तमान में नहर की ओर पुल पर बाउंड्रीवाॅल नाम मात्र को रह गई, जिसकी ऊंचाई एक फीट भी नहीं है जो नहर की ओर किसी को भी गिरने से रोकने में नाकाफी है।
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पुल के एक ओर नहर है दूसरी ओर करवन नदी। पुल के दोनों ओर पटरी मार्ग पर तीव्र मोड है, वाहन अगर तेज गति से पुल की ओर आए तो नहर में जाने का पूरा अंदेशा रहता है।

सीओ के पत्र के बाद भी नहीं लगे संकेतक

गोंडा। गांव नयाबास और तलेसरा के मध्य हाथरस ब्रांच नहर के सायफन पुल पर पुलिस के सिपाही की जान गए एक वर्ष से अधिक समय हो गया लेकिन जिम्मेदार विभाग इतना समय बीतने के बाद भी पुल पर यातायात सुरक्षा के इंतजाम नहीं कर सका, जबकि घटना के तुरंत बाद सुरक्षा के इंतजाम करने को निवर्तमान सीओ इगलास राजीव द्विवेदी ने डीएम और एसपी-यातायात को पुल से पहले संकेतक लगवाने को पत्र भी लिखा था, लेकिन इसकी भी अनदेखी कर दी गई।



24 फरवरी 2025 में थाना गभाना के गांव गांवरी निवासी नागेश सात बहनों के बीच इकलौता भाई था, मथुरा से लौटते समय देर रात को वह संकरे पुल से अनियंत्रित होकर बाइक सहित नहर में जा गिरा, रात भर परिजन तलाशते रहे। अगले दिन सुबह उसका शव बाइक सहित नहर में मिला। वहीं 22 नवंबर 2025 को खैर के गांव दरकन नगरिया निवासी नेपाल कैंटर वाहन लेकर आगरा से फरीदाबाद जा रहा था, पुल की बाउंड्रीवॉल तोड़ते हुए नहर में जा गिरा। घटना में चालक घायल हो गया।




गांव चूहरपुर किनमासा निवासी विजय सिंह के पुत्र दुर्गेश 5 दिसम्बर 2015 को पुलिस में भर्ती हुए थे। बीती 14 दिसम्बर 2024 को आगरा के जैतपुर थाने में तैनाती के दौरान दो दिन के अवकाश पर घर आए और रात साढे 10 बजे अपने दोस्त लोकेन्द्र के साथ नयाबास पर एक होटल से खाना खाकर कार से घर लौट रहे थे, इसी पुल के तीव्र मोड पर कार अनियंत्रित होकर नहर में जा गिरी, जिसमें सिपाही दुर्गेश की मौत हो गई और दोस्त लोकेन्द्र घायल हो गया, जिसकी बमुश्किल जान बच सकी थी।
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