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कुर्सी और संपत्ति के लिए हुई थी साधु आश्रम के प्राचार्य की हत्या

Thu, 09 Jan 2020 01:57 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jan 2020 01:57 AM IST
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Sadhu Ashram
हरदुआगंज थाना क्षेत्र के साधु आश्रम स्थित श्रीसर्वदानंद महाविद्यालय के प्राचार्य डा. हरवीर सिंह की हत्या का आरोप उनके सगे भाई रनवीर, तीन भतीजों व उनके तीन सहयोगियों पर आ गया है। आरोप है कि यह हत्या उन्होंने कुर्सी व संपत्ति को हथियाने के लिए की थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद प्राचार्य के दूसरे भाई धर्मवीर और उनके बेटे छत्रपाल ने कोर्ट के सामने सच्चाई पेश कर यह साबित किया है। न्यायालय मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की कोर्ट ने सभी आरोपियों को सम्मन जारी कर दिए हैं। बता दें कि अमर उजाला ने घटना के बाद नामजदगी पर सवाल उठाते हुए खबर प्रकाशित भी की थी।
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बदायूं के दुर्गपुर जरीफ नगर निवासी प्राचार्य डॉ. हरवीर सिंह की 29 नवंबर 2013 को कालीनदी किनारे गोली मारकर की गई थी। इस हत्याकांड में मृतक के भतीजे रामपाल सिंह पुत्र रनवीर ने गांव ग्वालरा निवासी महान प्रताप सिंह, उनके भाई रवि प्रताप उर्फ विंका प्रधान, बॉबी बिट्टू के अलावा भवनगढ़ी के जयवीर उर्फ हपुआ, भीमा, योगेंद्र व राजू पर जमीन के विवाद में हत्या करने का मुकदमा लिखाया था। इधर, अविवाहित प्राचार्य की कुर्सी व 33 लाख रुपये और आठ बीघा जमीन के लिए उनके दो भाइयों रनवीर सिंह व धर्मवीर सिंह में विवाद होने लगा। बाप-चाचा के बीच छिड़ी जंग के बीच रामपाल ने खुद को मृतक का उत्तराधिकारी बताते हुए संपत्ति की दवेदारी कर 2014 में बदायूं कोर्ट में अर्जी दी थी। खबर पर धर्मवीर ने खुद को और रनवीर सहित बहन किशन देवी को उत्तराधिकारी बनाने की अर्जी इसी कोर्ट में दे दी।
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यह दोनों मामले कोर्ट में लंबित हैं। वहीं, रामपाल के दूसरे भाई नेत्रपाल ने हरदुआगंज के गांव सफेदपुरा के तत्कालीन प्रधान के लेटर हेड पर खुद को प्राचार्य का दत्तक पुत्र दर्शाते हुए न्यायालय सिविल जज अलीगढ़ के यहां से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र हासिल कर लिया। इस पर चाचा धर्मवीर ने आपत्ति दर्ज करा दी थी। आपत्ति पर अगस्त 2018 में न्यायालय सिविल जज, सीनियर डिवीजन अलीगढ़ ने नेत्रपाल का उत्तराधिकार प्रमाण पत्र निरस्त कर मुकदमा दर्ज कराया था। साथ ही धर्मवीर व उनके पुत्र छत्रपाल को पक्षकार बनाने का आदेश दिया था। पक्षकार बनाने के डेढ़ साल बाद छत्रपाल ने हत्या के चश्मदीद भोला उर्फ राजकुमार निवासी भवनगढ़ी व बृजमोहन निवासी ग्वालरा को सामने लाकर हत्याकांड की हकीकत सामने ला दी। न्यायालय सीजेएम ने रामपाल, नेत्रपाल, किशनपाल व ताऊ रनवीर सहित हरदुआगंज के गांव भवनगढ़ी निवासी नारायण सिंह, बच्चू सिंह व बरौठा निवासी अभय चौहान को हत्या का आरोपी मानते हुए बीती छह जनवरी को एसएसपी बदायूं व अलीगढ़ को सम्मन तामील कराने को भेजे हैं।
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रामपाल ने कुर्सी के लिए रची साजिश
छत्रपाल सिंह के मुताबिक रामपाल संस्कृत विषय में आचार्य पास है। डॉ. हरवीर सिंह चार माह बाद रिटायर्ड होने वाले थे। रामपाल ने मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पाने के लालच में हत्या की थी। नारायण, बच्चू व अभय चौहान ने प्राचार्य के नौ लाख रुपये के कर्ज से छुटकारा पाने को रामपाल का साथ देते हुए उनकी हत्या की थी।
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