खिरनीगेट स्थित श्री लख्मीचंद पांड्या खंडेलवाल दिगंबर जैन मंदिर में दसलक्षण पर्व के छठवें दिन उत्तम संयम धर्म आराधना के मौके पर आचार्य निर्भय सागर ने कहा कि संयम ही जीवन का शृंगार है। मनुष्य संयम धारण कर सकता है, इसलिए समस्त जीवों में वह श्रेष्ठ है, जिसके जीवन में संयम नहीं, उसका जीवन बिना ब्रेक की गाड़ी जैसा है। संयम बिना प्राणी अधूरा है।
उन्होंने कहा कि जो इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर लेता है, वह निर्वाण प्राप्त कर सकता है। जीवन में नियंत्रण जरूरी है। अश्व को लगाम, हाथी को अंकुश, ऊंट को नुकील और वाहन के लिए ब्रेक जरूरी है। इससे पहले सुबह मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा, सामूहिक पूजन आदि हुआ। दोपहर को श्री पार्श्वनाथ पंचायत में श्री शीतलनाथ विधान के पुण्यार्जक अरुण जैन, प्रदीप जैन परिवार एवं हेमंत कुमार जैन, अनीता जैन परिवार रहे। सायंकालीन संगीतमय आरती, गुरुभक्ति, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं दिगम्बर जैन महा समिति इकाई संख्या एक के मेधावी छात्र-छात्रा अलंकरण समारोह में पुरस्कृत किए गए। मुख्य अतिथि देशदीपक जैन, केंद्र अधीक्षक नरौरा परमाणु विद्युत केंद्र, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर कुलपति आरएमपीयू थे। यहां बाल ब्रह्मचारी मनीष भैया, मानस जैन, डॉ. मानव जैन, प्रद्युम्न कुमार जैन, शैलेंद्र जैन, सुरेश जैन, अम्बुज जैन, मयंक जैन, मुनेश जैन, राजीव जैन, मनोज जैन, अंशुल जैन, संजय जैन, दीपक जैन आदि मौजूद रहे।