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जुलाई में मिलने वाले राशन कार्ड अक्तूबर में हो जाएंगे बेकार
अलीगढ़
Updated Fri, 29 May 2015 02:00 AM IST
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समाजवादी पार्टी की एक राजनीतिक जिद से प्रदेश के खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव से ठीक कुछ महीने पहले यूपीए सरकार ने खाद्य सुरक्षा कानून पूरे देश में लागू कर दिया था। लेकिन सपा सरकार ने इस अधिनियम को उस वक्त यूपी में लागू नहीं किया। अब सपा इसे पहली अक्तूबर से प्रदेश में लागू कर रही है। जिसके बाद खाद्य सुरक्षा कानून की शर्तों के अनुसार डिजिटल राशन कार्ड महिला मुखिया के नाम से बनेंगे। ऐसा होने पर अभी बन रहे सादा राशन कार्ड बेकार हो जाएंगे। जिससे करोड़ों रुपयों की बर्बादी तय है।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत महिला मुखिया के नाम से डिजिटलाइज्ड राशन कार्डों के सत्यापन एवं इसके बाद फाइनल सूची जारी कर कार्ड बनाने की योजना पर काम चल रहा है तो दूसरी तरफ पुराने पैटर्न पर कार्डों की प्रिंटिंग का काम भी जारी है। दरअसलए वर्ष 2009 में शासन ने राशन कार्डों के डिजिटलाइजेशन के आदेश किये थे। लेकिन किन्हीं कारणों से यह काम दो तीन वर्ष लटका रहा। अक्तूबर 2013 से कार्डों के अपग्रेडेशन का काम दोबारा शुरू हुआ। 9.35 लाख उपभोक्ता संख्या वाले जनपद में अब तक पुराने पैटर्न के तहत आठ लाख कार्ड प्रिंट हो चुके हैं। जुलाई तक इनका वितरण शुरू हो जाएगा।
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वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव से ठीक कुछ महीने पहले यूपीए सरकार ने खाद्य सुरक्षा कानून पूरे देश में लागू कर दिया था। लेकिन सपा सरकार ने इस अधिनियम को उस वक्त यूपी में लागू नहीं किया। अब सपा इसे पहली अक्तूबर से प्रदेश में लागू कर रही है। जिसके बाद खाद्य सुरक्षा कानून की शर्तों के अनुसार डिजिटल राशन कार्ड महिला मुखिया के नाम से बनेंगे। ऐसा होने पर अभी बन रहे सादा राशन कार्ड बेकार हो जाएंगे। जिससे करोड़ों रुपयों की बर्बादी तय है।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत महिला मुखिया के नाम से डिजिटलाइज्ड राशन कार्डों के सत्यापन एवं इसके बाद फाइनल सूची जारी कर कार्ड बनाने की योजना पर काम चल रहा है तो दूसरी तरफ पुराने पैटर्न पर कार्डों की प्रिंटिंग का काम भी जारी है। दरअसलए वर्ष 2009 में शासन ने राशन कार्डों के डिजिटलाइजेशन के आदेश किये थे। लेकिन किन्हीं कारणों से यह काम दो तीन वर्ष लटका रहा। अक्तूबर 2013 से कार्डों के अपग्रेडेशन का काम दोबारा शुरू हुआ। 9.35 लाख उपभोक्ता संख्या वाले जनपद में अब तक पुराने पैटर्न के तहत आठ लाख कार्ड प्रिंट हो चुके हैं। जुलाई तक इनका वितरण शुरू हो जाएगा।
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