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राम हो या फिर रावण...सब मांगें काम

Mon, 07 Sep 2020 01:39 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2020 01:39 AM IST
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Ramleela mahotsav will be organized
2019 में रामलीला महोत्सव के दौरान निकली भगवान की झांकी। फाइल फोटो। - फोटो : CITY OFFICE
राजा तिवारी
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शहर में रामलीला मंचन की वर्षों पुरानी परंपरा को बरकरार रखने की दिशा में सकारात्मक पहल से कलाकारों में ऊर्जा का संचार हुआ है। कोरोना के कारण मार्च से सितंबर तक हाथ पर हाथ धरे बैठे ‘राम’ और ‘रावण’ की भुजाएं फड़कने लगी हैं, क्योंकि उन्हें भी काम की तलाश है। कलाकारों और उनके परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने जिंदगी में पहले कभी ऐसा नहीं सोचा था कि ऐसे दिन भी आएंगे। इस संकट में अलीगढ़ के फैसले ने उनको एक उम्मीद दी है।
मथुरा में 1947 में स्थानीय रामलीला के आयोजन के लिए बने श्री आदर्श रामलीला मंडल (रजिस्टर्ड) मथुरा के कलाकार अलीगढ़ के कायल हो गए हैं। दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा जब 100 लोगों के साथ धार्मिक कार्यक्रम कराने की अनुमति दी गई तो अलीगढ़ रामलीला कमेटी ने भी रामलीला का आयोजन कराने का एलान कर दिया है। जबकि दिल्ली, मुंबई, बक्सर, चंडीगढ़, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा में रामलीला को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है।
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रामलीला महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष विमल अग्रवाल कहते हैं कि अलीगढ़ में रामलीला की परंपरा वर्षों पुरानी है। जिसे जीवंत रखने के लिए वह हर संभव प्रयास कर आयोजन कराएंगे। कलाकारों और मंडल स्वामी का कहना है कि कोरोना काल में दशहरे पर रावण पुतला दहन निश्चित ही एक सकारात्मक माहौल देगा। निसंदेह, रामलीला मंडलियों में ही नहीं, आज हर जगह रोजगार को लेकर जिस अनिश्चितता का माहौल है, उसमें रामलीला और दशहरा के मेले रोशनी की बड़ी किरण से कम नहीं है।
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दो महीने में मिलता है 1500 से अधिक को रोजगार
शहर में पांच जगह रामलीला और एक जगह रासलीला होती है, जबकि जिले में 35 जगहों पर लीलाएं अलग से होती हैं। एक लीला में औसत 15 से 20 लोग सदस्य होते हैं। इस लिहाज से 700 लोगों को सीधे और इनके साथ लगने वाले मेलों से हजार लोगों का रोजगार जोड़ लें तो दो महीनों तक 1700 लोगों को रोजगार मिलता है। अलीगढ़ में लीलाओं का मौसम श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से दशहरा और दीपावली के बाद तक रहता है। कोरोना के कारण अभी तक सन्नाटा है।
जिले में रोजगार स्थिति
- क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में 70 हजार बेरोजगार पंजीकृत है, अभी तक 63 हजार का सत्यापन चल रहा है। जाहिर है सत्यापन हो रहा है तो रोजगार नहीं मिला है।
- सेवायोजन कार्यालय में 8600 प्रवासी मजदूरों ने पंजीकरण कराया था। जिनका आंकड़ा सुरक्षित किया गया है। कितनों रोजगार मिला, इसका अलग से आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
- जिले की औद्योगिक इकाइयों में 50 हजार, मनरेगा में तकरीबन सवा लाख लोगों का रोजगार मिलना बताया जाता है। लेकिन फैक्ट्रियां अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल रही हैं।
- मनरेगा में एक लाख 6 हजार मजदूर पहले से पंजीकृत थे, 20 हजार प्रवासी और जुड़े। अब इनकी संख्या एक लाख 26 हजार पहुंच गई है। इतनी आबादी को एक साथ काम मिलना मुश्किल है।
कलाकारों का दर्द
- कोरोना संक्रमण काल कलाकारों के लिए बेहद खराब साबित हुआ। रामलीला और दशहरा मेला हो तो रामजी की कृपा बनी रहेगी। बड़ा आयोजन न भी हो लेकिन छोटे कार्यक्रम तो हो ही सकते हैं। कम से कम सैकड़ों कलाकारों को महीनों बाद मंच मिलेगा। महीनों की बेरोजगारी सहना अब मुश्किल है। अलीगढ़ की कमेटी की पहल अच्छी है।
- सूरज देव चतुर्वेदी। (राम)।
- रामलीला का मंचन मथुरा के चतुर्वेदी समाज की पुरानी परंपरा है। उसके बाद वृंदावन में सैकड़ों मंडल बने और हजारों कलाकार रामलीला, रासलीला, गौरांग लीला से जुड़े। कोरोना संक्रमण काल कलाकारों को बड़ी पीड़ा दे गया है। ऐसे में अलीगढ़ में आयोजन हुआ तो निश्चित रूप से समस्या हल होगी।
- सुनील चतुर्वेदी, रावण।
- लॉकडाउन से पहले राजस्थान के नारायणपुर में कार्यक्रम कर रहे थे। अगर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ आयोजन की अनुमति मिलती है तो मंचन का तरीका बदल देंगे। गले मिलने जैसे दृश्य का नए रूप में मंचन किया जाएगा। रावण और वानर सेना मुखौटा लगाकर मंचन करेगी। दिल से चाहते हैं कि जैसे राम मंदिर का भूमि पूजन हुआ, उसी प्रकार रामलीलाएं हों और रावण का पुतला दहन हो।

- मयंक देव चतुर्वेदी, (परशुराम, दशरथ)।
- राम नाम से राजनीति चमकाने वालों ने कोरोना संक्रमण काल में कलाकारों के लिए कुछ नहीं किया। इसलिए कलाकार परेशान हैं। ऐसे संकट में अलीगढ़ में रामलीला होती है तो कई लोगों को रोजगार मिलेगा। लीला करने की चौथी पीढ़ी का स्वाभिमान लेकर जैसे तैसे समय गुजार रहे हैं। आगे भी इसी तरह संस्कृति और भक्ति का प्रचार करते रहेंगे।
- राघवेंद्र देव चतुर्वेदी, मंडली स्वामी।
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