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चुनाव जीतते तो राजेंद्र सिंह बन जाते मुख्यमंत्री
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पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह के खासम-खास रहे डॉ. रक्षपाल सिंह ने कहा कि अगर वह चुनाव जीत जाते तो प्रदेश की राजनीति का परिदृश्य बदल जाता और वह मुख्यमंत्री बन जाते। पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह की 13वीं पुण्यतिथि पर उनसे जुड़े संस्मरण साझा करते हुए प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. रक्षपाल सिंह ने बताया, उनके राजेंद्र सिंह से 1974 से ही व्यक्तिगत संबंध थे।
इसी वर्ष वह इगलास विधानसभा से चुनाव लड़े थे तो उनके चुनाव प्रचार में भागीदारी की थी। 1977, 1980 व 1984 में इगलास विधान सभा से चुने गए। 1977 में जनता पार्टी की बनी सरकार में कृषि मंत्री व सिंचाई मंत्री बने। जबकि उनके घनिष्ठ मित्र मुलायम सिंह यादव को सहकारिता मंत्री बनाया गया था।
रक्षपाल सिंह ने कहा, जनता पार्टी के विघटन के बाद 1980 में हुए विधानसभा चुनाव में नई पार्टी लोकदल से राजेंद्र सिंह इगलास से जीते, लेकिन मुलायम सिंह चुनाव हार गए। इसके बाद राजेंद्र सिंह को विधानसभा में नेता विरोधी दल चुना गया। 1989 में अलीगढ़ के गांधी पार्क मैदान की चुनावी सभा में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने राजेंद्र सिंह की तारीफ करते हुए कहा था, ‘मैं स्वयं उनकी विद्वता व योग्यता का कायल हूं। विधानसभा में वह ही नहीं, बल्कि पूरा सदन उनके भाषण को गौर से सुनता था।’
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1989 में इगलास विधानसभा के चुनाव में चौधरी बिजेंद्र सिंह से 64 वोट से हारने के बाद राजेंद्र सिंह को बड़ा झटका लगा था। उस समय यदि राजेंद्र सिंह चुनाव जीत जाते तो प्रदेश की वर्तमान राजनीति की दिशा कुछ और हो सकती थी। 1989 में जनता दल में दो धड़े थे। एक मुलायम सिंह को प्रदेश का मुख्यमंत्री तो दूसरा चौधरी अजित सिंह को मुख्यमंत्री बनाना चाहता था।
राजेंद्र सिंह के हार जाने के बाद अजित सिंह के धड़े को झटका लगा। अजित सिंह ने राजेंद्र सिंह को लखनऊ पहुंचने व निर्वाचित विधायकों को एकत्रित करने के लिए कहा, लेकिन राजेंद्र सिंह ने कहा कि वह चुनाव हार चुके हैं। ऐसी स्थिति में आपका लखनऊ पहुंचना आवश्यक है और वह भी पहुंच जाएंगे। यहां चौधरी अजित सिंह की अनुभवहीनता सामने आ गई और वह मुख्यमंत्री पद के लिए होने वाले शक्ति परीक्षण वाले दिन ही लखनऊ पहुंच सके, जो मुलायम सिंह यादव के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
रक्षपाल सिंह ने बताया, मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में अलीगढ़ में हुए विधान परिषद के चुनाव में राजेंद्र सिंह को जनता दल का टिकट न दिए जाने के लिए लाबिंग हो चुकी थी। ऐसी विषम परिस्थिति में उन्हें (रक्षपाल सिंह), योगेश शर्मा एडवोकेट, चौ. जगवीर सिंह (पूर्व विधायक), चौधरी रामजीलाल, सुरेश वर्मा, चौ. डम्बर सिंह, यशपाल चौहान को राजेंद्र सिंह ने अपने आवास पर बुलाया और कहा कुछ भी हो, वह चुनाव लड़ेंगे। इसके बाद चार घंटे चली बैठक में चुनाव की रणनीति ऐसी बनी कि पूरी पार्टी ने राजेंद्र सिंह को चुनाव लड़ाया और उनकी ऐतिहासिक जीत हुई, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उन्हें अपनी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया। इस चुनाव के बाद राजेंद्र सिंह की राजनीति पर ब्रेक लग गया।
राजेंद्र सिंह का भावपूर्ण स्मरण
पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह की 13वीं पुण्यतिथि पर उनका भावपूर्ण स्मरण किया गया। लोक दल के राष्ट्रीय सचिव देवानंद ने राजेंद्र सिंह ने कृषि व सिंचाई मंत्री रहते हुए नवीन कृषि मंडियों का निर्माण कराया। सिंचाई के लिए कई नहर व बंबे बनवाए। अलीगढ़ के मानपुर में किसान पंचायत के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए किसानों की आवाज पूरे देश में राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में ही उठाई गई थी।
देवानंद ने कहा कि राजेंद्र सिंह ने राजनीतिक जीवन में धोखा खाया, लेकिन कभी किसी को धोखा नहीं दिया। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत चेयरमैन महिपाल सिंह के पुत्र राजेंद्र प्रसाद, राधेश्याम कुशवाह, राहुल कुमार, डॉ. गौरव कुमार, जगवीर सिंह, युवा जिलाध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रशांत चौधरी, नरेंद्र सिंह, भागीरथ आदि मौजूद रहे।
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इसी वर्ष वह इगलास विधानसभा से चुनाव लड़े थे तो उनके चुनाव प्रचार में भागीदारी की थी। 1977, 1980 व 1984 में इगलास विधान सभा से चुने गए। 1977 में जनता पार्टी की बनी सरकार में कृषि मंत्री व सिंचाई मंत्री बने। जबकि उनके घनिष्ठ मित्र मुलायम सिंह यादव को सहकारिता मंत्री बनाया गया था।
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रक्षपाल सिंह ने कहा, जनता पार्टी के विघटन के बाद 1980 में हुए विधानसभा चुनाव में नई पार्टी लोकदल से राजेंद्र सिंह इगलास से जीते, लेकिन मुलायम सिंह चुनाव हार गए। इसके बाद राजेंद्र सिंह को विधानसभा में नेता विरोधी दल चुना गया। 1989 में अलीगढ़ के गांधी पार्क मैदान की चुनावी सभा में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने राजेंद्र सिंह की तारीफ करते हुए कहा था, ‘मैं स्वयं उनकी विद्वता व योग्यता का कायल हूं। विधानसभा में वह ही नहीं, बल्कि पूरा सदन उनके भाषण को गौर से सुनता था।’
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1989 में इगलास विधानसभा के चुनाव में चौधरी बिजेंद्र सिंह से 64 वोट से हारने के बाद राजेंद्र सिंह को बड़ा झटका लगा था। उस समय यदि राजेंद्र सिंह चुनाव जीत जाते तो प्रदेश की वर्तमान राजनीति की दिशा कुछ और हो सकती थी। 1989 में जनता दल में दो धड़े थे। एक मुलायम सिंह को प्रदेश का मुख्यमंत्री तो दूसरा चौधरी अजित सिंह को मुख्यमंत्री बनाना चाहता था।
राजेंद्र सिंह के हार जाने के बाद अजित सिंह के धड़े को झटका लगा। अजित सिंह ने राजेंद्र सिंह को लखनऊ पहुंचने व निर्वाचित विधायकों को एकत्रित करने के लिए कहा, लेकिन राजेंद्र सिंह ने कहा कि वह चुनाव हार चुके हैं। ऐसी स्थिति में आपका लखनऊ पहुंचना आवश्यक है और वह भी पहुंच जाएंगे। यहां चौधरी अजित सिंह की अनुभवहीनता सामने आ गई और वह मुख्यमंत्री पद के लिए होने वाले शक्ति परीक्षण वाले दिन ही लखनऊ पहुंच सके, जो मुलायम सिंह यादव के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
रक्षपाल सिंह ने बताया, मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में अलीगढ़ में हुए विधान परिषद के चुनाव में राजेंद्र सिंह को जनता दल का टिकट न दिए जाने के लिए लाबिंग हो चुकी थी। ऐसी विषम परिस्थिति में उन्हें (रक्षपाल सिंह), योगेश शर्मा एडवोकेट, चौ. जगवीर सिंह (पूर्व विधायक), चौधरी रामजीलाल, सुरेश वर्मा, चौ. डम्बर सिंह, यशपाल चौहान को राजेंद्र सिंह ने अपने आवास पर बुलाया और कहा कुछ भी हो, वह चुनाव लड़ेंगे। इसके बाद चार घंटे चली बैठक में चुनाव की रणनीति ऐसी बनी कि पूरी पार्टी ने राजेंद्र सिंह को चुनाव लड़ाया और उनकी ऐतिहासिक जीत हुई, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उन्हें अपनी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया। इस चुनाव के बाद राजेंद्र सिंह की राजनीति पर ब्रेक लग गया।
राजेंद्र सिंह का भावपूर्ण स्मरण
पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह की 13वीं पुण्यतिथि पर उनका भावपूर्ण स्मरण किया गया। लोक दल के राष्ट्रीय सचिव देवानंद ने राजेंद्र सिंह ने कृषि व सिंचाई मंत्री रहते हुए नवीन कृषि मंडियों का निर्माण कराया। सिंचाई के लिए कई नहर व बंबे बनवाए। अलीगढ़ के मानपुर में किसान पंचायत के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए किसानों की आवाज पूरे देश में राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में ही उठाई गई थी।
देवानंद ने कहा कि राजेंद्र सिंह ने राजनीतिक जीवन में धोखा खाया, लेकिन कभी किसी को धोखा नहीं दिया। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत चेयरमैन महिपाल सिंह के पुत्र राजेंद्र प्रसाद, राधेश्याम कुशवाह, राहुल कुमार, डॉ. गौरव कुमार, जगवीर सिंह, युवा जिलाध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रशांत चौधरी, नरेंद्र सिंह, भागीरथ आदि मौजूद रहे।