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अच्छी पहल: नहीं होगा बारिश का पानी बर्बाद, बूंदों को अब जमीन में उतारेगा रेलवे, ऐसे होगा यह काम

Sun, 04 Oct 2026 05:01 PM IST
Chaman Kumar Sharma रिंकू शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
रिंकू शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sun, 04 Oct 2026 05:01 PM IST
सार

रेलवे परिसरों में बारिश के पानी को सीधे जमीन में पहुंचाने के बजाय कई स्थानों पर फिल्ट्रेशन और फर्स्ट-फ्लश सिस्टम से गुजारा जा रहा है। इसके बाद पानी को रिचार्ज पिट, सोक पिट या पुराने बोर-कुओं तक पहुंचाया जाता है। इससे पानी नियंत्रित तरीके से जमीन में समाहित होता है और भूजल पुनर्भरण में मदद मिलती है।

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Rainwater harvesting structure to harvest rainwater
अलीगढ़ समेत तीनों मंडल में रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं - फोटो : रेलवे

विस्तार

अलीगढ़ रेलवे स्टेशन समेत उत्तर प्रदेश के बड़े रेलवे परिसरों में बारिश के पानी को बहकर बर्बाद होने से रोककर जमीन के भीतर पहुंचाने की कवायद तेज हो गई है। रेलवे की छतों, प्लेटफार्म और अन्य पक्के क्षेत्रों से एकत्र होने वाले बारिश के पानी को पाइपों के जरिये रिचार्ज पिट, सोक पिट, पुराने कुओं, सूखे बोरवेल और डीप बोर तक पहुंचाया जा रहा है। उत्तर मध्य रेलवे मे अब तक 124 वर्षा जल संचयन संरचनाएं तैयार हो चुकी हैं।

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अलीगढ़ के लिए यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है कि रेलवे स्टेशन और उससे जुड़े परिसरों में बड़े पैमाने पर पक्की सतह और भवन हैं। बारिश के दौरान इन सतहों पर गिरने वाला पानी यदि व्यवस्थित तरीके से रिचार्ज सिस्टम तक पहुंचाया जाए तो सतही बहाव कम करने के साथ भूजल पुनर्भरण में भी योगदान मिल सकता है। 
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तीन मंडलों में 124 संरचनाएं 
उत्तर मध्य रेलवे के तीनों मंडलों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था विकसित की गई है। इनमें आगरा मंडल में 38, प्रयागराज मंडल में 41 और झांसी मंडल में 45 संरचनाएं  शामिल हैं। रेलवे ने सभी स्थानों पर एक जैसी तकनीक अपनाने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार रिचार्ज व्यवस्था विकसित की है।

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अलीगढ़ से लेकर आगरा मंडल तक बढ़ रहा दायरा 
अलीगढ़ समेत आगरा मंडल के रेलवे परिसरों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगरा मंडल में 38 संरचनाएं पूरी हो चुकी हैं। इसके अलावा आगरा कैंट, आगरा फोर्ट और राजा की मंडी स्टेशनों के सर्विस भवनों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की गई है। 

कहीं पुराना कुआं, कहीं सूखा बोरवेल बनेगा सहारा
रेलवे ने वर्षा जल संचयन के लिए मौजूद परिसंपत्तियों को भी उपयोग में लेना शुरू किया है। जहां पुराने कुएं, सूखे बोरवेल या डीप बोर तकनीकी रूप से उपयुक्त हैं, वहां इन्हें ही रिचार्ज सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। इससे नई संरचनाएं बनाने की जरूरत कम होने के साथ रेलवे की निष्क्रिय परिसंपत्तियों का दोबारा उपयोग भी हो रहा है। झांसी मंडल में महोबा, पामां, मलासा, आटा, भुआ, मोंठ, चिरगांव, परिछा, झांसी और ग्वालियर समेत कई स्थानों पर अलग-अलग प्रणालियां विकसित की गई हैं। महोबा में छत से आने वाले पानी को पुराने कुएं तक पहुंचाया गया है, जबकि पामां में सूखे बोरवेल का इस्तेमाल किया जा रहा है।

कानपुर में छह संरचनाएं तैयार, अनवरगंज में दो 
कानपुर क्षेत्र में मलासा स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-1, आरयूबी-194 के निकट डीप बोर, पामां, भुआ और अटा स्टेशनों पर वर्षा जल संचयन का काम किया गया है। मलासा में हैंडपंप से जुड़े सूखे बोर को रिचार्ज करने के लिए जल तारा-टाइप व्यवस्था अपनाई गई है। पामां में सूखे बोरवेल और भुआ-अटा में सोक पिट आधारित प्रणालियां हैं। कानपुर क्षेत्र में अब तक छह संरचनाएं स्थापित हो चुकी हैं। अनवरगंज में दो संरचनाएं हैं और दो अन्य संरचनाएं अगले 10 दिन में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

पहले फिल्टर होगा पानी, फिर जमीन में पहुंचेगा 
रेलवे परिसरों में बारिश के पानी को सीधे जमीन में पहुंचाने के बजाय कई स्थानों पर फिल्ट्रेशन और फर्स्ट-फ्लश सिस्टम से गुजारा जा रहा है। इसके बाद पानी को रिचार्ज पिट, सोक पिट या पुराने बोर-कुओं तक पहुंचाया जाता है। इससे पानी नियंत्रित तरीके से जमीन में समाहित होता है और भूजल पुनर्भरण में मदद मिलती है।

एक बूंद, कई रास्ते 
उत्तर मध्य रेलवे की व्यवस्था में हर जगह अलग तकनीक है, लेकिन लक्ष्य एक है बारिश का पानी परिसर से बाहर बहकर जाने के बजाय उसे यथासंभव जमीन में वापस पहुंचाना। कहीं पुराने कुएं को नया उपयोग मिला है, कहीं सूखा बोरवेल फिर से काम आ रहा है और कहीं सोक पिट व रिचार्ज पिट बनाए गए हैं।

वर्षा जल संचयन के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं। उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर व्यर्थ जाने से रोकना, सतही बहाव कम करना और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना है। - डॉ. शिवम शर्मा, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज

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