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World Rabies Day: अलीगढ़ जिले में हर दिन 359 लोगों को काट रहे कुत्ते-बिल्ली और बंदर, बढ़ रहा रेबीज का खतरा

Sun, 28 Sep 2025 12:47 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 28 Sep 2025 12:47 PM IST
सार

कुत्ते से ही नहीं बल्कि बंदर, बिल्ली, नेवला और गिलहरी जैसे जानवरों के काटने से भी रेबीज होने का खतरा होता है। यह वायरस से फैलने वाला एक बेहद गंभीर रोग है।

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Rabies situation in Aligarh
रेबीज का खतरा - फोटो : Freepik.com

विस्तार

अलीगढ़ जिले में इस वर्ष 86 हजार से अधिक लोगों को कुत्ते, बिल्ली और बंदरों ने निशाना बनाया है। यानि हर दिन औसतन 359 लोगों को कुत्ता, बिल्ली और बंदर काट रहे हैं। इससे लोगों में रेबीज का खतरा बढ़ रहा है।

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28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रेबीज बीमारी से रोकथाम के बारे जागरूकता फैलाना है। कुत्ते से ही नहीं बल्कि बंदर, बिल्ली, नेवला और गिलहरी जैसे जानवरों के काटने से भी रेबीज होने का खतरा होता है। यह वायरस से फैलने वाला एक बेहद गंभीर रोग है। जनवरी से सितंबर तक आठ माह में 86 हजार लोगों को कुत्ता, बंदर और बिल्ली ने काटा है। इनमें 74 हजार से अधिक लोग कुत्ते, नौ हजार से अधिक लोग बंदर, 1755 लोग बिल्ली और 1098 लोग नेवला के काटने के शिकार हो चुके हैं।

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कुत्ता, बिल्ली, बंदर आदि के काटने से रेबीज होता है। जिले के सभी जिला स्तरीय अस्पतालों और सीएचसी पर एआरवी उपलब्ध है। डीडीयू अस्पताल और जिला अस्पताल में रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (आरआईजी) भी उपलब्ध है। डीडीयू में रेबीज क्लीनिक भी संचालित है। इस साल अभी तक एक भी रेबीज के मामले नहीं आए हैं। - डॉ. नीरज त्यागी, सीएमओ

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सिर्फ इंजेक्शन लगाने तक ही सीमित है रेबीज क्लीनिक
अलीगढ़ जिले में प्रदेश का पहला रेबीज क्लीनिक डीडीयू अस्पताल में स्थापित हुआ था। क्लीनिक में चिकित्सक, फार्मासिस्ट और वार्ड बॉय की तैनाती थी। यहां पर आने वाले गंभीर मरीजों का घाव को धुलने और उपचार करने की व्यवस्था थी लेकिन अब यह क्लीनिक सिर्फ इंजेक्शन लगाने तक ही सीमित रह गया है। क्लीनिक में प्रतिदिन 50 से 55 नए मरीज और 65 से 70 पुराने उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

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