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ADA: करोड़ों की सरकारी संपत्तियों के अवैध आवंटन पर उठे सवाल, अधिकारी-कर्मचारियों की संलिप्तता तो नहीं

Mon, 20 May 2024 05:28 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Mon, 20 May 2024 05:28 AM IST
सार

एडीए के पूरे फर्जीवाड़े में अकेले संपत्ति लिपिक सतीश कुमार की ही भूमिका रही है ? अथवा इस पूरे खेल में एडीए के अन्य अधिकारी व कर्मचारियों की भी संलिप्तता है ? इन सवालों के जवाब तो प्रकरण की निष्पक्ष जांच के बाद ही मिल सकेंगे ।

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Questions raised on illegal allocation of government properties worth crores
अलीगढ़ विकास प्राधिकरण - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) में करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्तियों के अवैध आवंटन का खुलासा होने के बाद तमाम सवाल भी खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में अकेले संपत्ति लिपिक सतीश कुमार की ही भूमिका रही है ? अथवा इस पूरे खेल में एडीए के अन्य अधिकारी व कर्मचारियों की भी संलिप्तता है ? इन सवालों के जवाब तो प्रकरण की निष्पक्ष जांच के बाद ही मिल सकेंगे । चर्चा है कि इस फर्जीवाड़े में एडीए के कुछ अन्य अफसरों की संदिग्ध भूमिका भी सामने आ रही है, जिनकी जड़ें काफी गहरी हैं। पत्रावलियों में कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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वर्ष 2011 से 2017 तक अपात्रों को एडीए की संपत्तियों के आवंटन से जुड़ी कुछ फाइलों पर तो बाकायदा जिम्मेदार अफसरों के भी हस्ताक्षर हैं। जिनको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकतर फर्जीवाड़े इसी अवधि में हुए हैं। मामले का खुलासा होने पर पूर्व संपत्ति लिपिक सतीश कुमार समेत छह लोगों के खिलाफ क्वार्सी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसी सिलसिले में सपा नेता शिशुपाल सिंह समेत दो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। एडीए की संपत्ति कब्जाने के अलावा उसकी खरीद- बिक्री करने वालों की भी लंबी चेन है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस जमीन का स्वामित्व एडीए का है, उस जगह का नक्शा भी एडीए ने ही पूर्व में पास किया। नक्शा ही पास नहीं किया बल्कि कपाउंडिंग भी कर डाली। ऐसे में सवाल उठता है कि क्षेत्रीय एई व जेई समेत अन्य पटलों पर मौके पर क्या जांच की गई ?
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अलीगढ़ विकास प्राधिकरण को 2004 में मानव कल्याण समिति से हुए समझौते में स्वर्णजयंती नगर में 1480 वर्गमीटर के कुल आठ प्लॉट मिले थे। जिसके बाद एडीए ने इन प्लॉटों को आवंटन किया। प्लॉट संख्या एन-सात को छोड़ते हुए सभी का आवंटन कर दिया गया। यह सभी प्लॉट स्वर्णजयंती नगर में प्राइम लोकेशन पर थे। एडीए की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन सपा जिलाध्यक्ष ने एन-सात भूखंड पर अवैध कब्जा कर लिया। इसका बैनामा भी उनके नाम हो गया। इस भूखंड का नक्शा स्वीकृत कराए जाने के लिए 2019 में एडीए में आवेदन किया गया।
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हैरत की बात है कि तत्कालीन एडीए अफसरों ने भी आंखें बंद कर इसका नक्शा स्वीकृत कर दिया। एडीए के स्वामित्व वाले भूखंड एन-7 का नक्शा ही नहीं एडीए ने पास किया बल्कि कपाउंड भी किया था। एडीए उपाध्यक्ष अपूर्वा दुबे ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में गहनता से जांच चल रही है, जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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