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अलीगढ़ः मॉब लिंचिंग से सुरक्षा, सीए, एनआरसी कानून वापस हो
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एएमयू कोऑर्डिनेशन कमेटी की कार्यकारिणी की बैठक में मॉब लिंचिंग से सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ सीए व एनआरसी कानून को वापस लेने का प्रस्ताव पारित किया गया। एएमयू ओल्ड ब्वायज लॉज में कमेटी के नेता आमिर मिंटोई, साबिर बेग एवं डॉ. सुल्तान उल हक ने कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल में मुसलमानों के मुद्दे कहीं सुनाई नहीं दे रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कोऑडिनेशन कमेटी में कुछ प्रस्ताव पारित किए गए हैं।
नेताओं ने कहा कि मॉब लिंचिंग में मारे गए लोगों को मुआवजा, पुलिस और अर्धसैनिक बलों में अल्पसंख्यकों की भर्ती, मंडल आयोग और रंगनाथ आयोग की रिफारिशों के अनुसार सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में मुसलमानों के लिए आरक्षण, वक्फ संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराने, उत्तर प्रदेश में उर्दू को दूसरी अधिकारिक राजभाषा मानने संबंधित प्रस्ताव पारित किए गए हैं। नेताओं ने कहा कि बिना भेदभाव सभी पार्टियों के नेताओं के पास प्रस्ताव को पहुंचाया जाएगा और उनसे मांग करेंगे कि मुसलमानों के मुद्दों पर अपना रवैया खुलकर सामने रखें। डॉ. सुल्तान उल हक ने कहा कि किसी पार्टी को जिताने या हराने के लिए वोट नहीं दें बल्कि अपने मुद्दों पर बात और काम करवाने के लिए वोट दें।
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नेताओं ने कहा कि मॉब लिंचिंग में मारे गए लोगों को मुआवजा, पुलिस और अर्धसैनिक बलों में अल्पसंख्यकों की भर्ती, मंडल आयोग और रंगनाथ आयोग की रिफारिशों के अनुसार सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में मुसलमानों के लिए आरक्षण, वक्फ संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराने, उत्तर प्रदेश में उर्दू को दूसरी अधिकारिक राजभाषा मानने संबंधित प्रस्ताव पारित किए गए हैं। नेताओं ने कहा कि बिना भेदभाव सभी पार्टियों के नेताओं के पास प्रस्ताव को पहुंचाया जाएगा और उनसे मांग करेंगे कि मुसलमानों के मुद्दों पर अपना रवैया खुलकर सामने रखें। डॉ. सुल्तान उल हक ने कहा कि किसी पार्टी को जिताने या हराने के लिए वोट नहीं दें बल्कि अपने मुद्दों पर बात और काम करवाने के लिए वोट दें।
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