मामू भांजा प्रकरण: भीड़ हिंसा को मुद्दा बना रहा विपक्ष, निपटने की जुगत में है सत्ता पक्ष
मामू भांजा की घटना के मुख्य मुकदमे में भीड़ का जिक्र उसी रात शामिल किया गया। रात में ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर सुबह होते होते छह लोग गिरफ्तार कर लिए। जब इस मुकदमे की तहरीर सामने आई तो सभी दंग रह गए। मुकदमे की तहरीर में भीड़ हिंसा का स्पष्ट उल्लेख था। मुकदमे में भीड़ हिंसा के उल्लेख के बाद से पुलिस प्रशासन के अधिकारी, कानूनविद, सियासी लोग बहस में जुट गए हैं।
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मामू भांजा की घटना के मुख्य मुकदमे में भीड़ का जिक्र उसी रात शामिल किया गया। रात में ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर सुबह होते होते छह लोग गिरफ्तार कर लिए। जब इस मुकदमे की तहरीर सामने आई तो सभी दंग रह गए। मुकदमे की तहरीर में भीड़ हिंसा का स्पष्ट उल्लेख था। इसके पीछे की सियासत साफ समझ में आई कि यह मुकदमा सपा नेताओं की निगरानी में लिखवाया गया और उन्होंने ही यह मुकदमा दर्ज कराया है। चूंकि दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार ने भीड़ हिंसा में मृत्यु दंड तक का प्रावधान किया है। इसलिए भी इसे लेकर तरह तरह के मायने निकाले जा रहे हैं। वहीं मुकदमे में भीड़ हिंसा के उल्लेख के बाद से पुलिस प्रशासन के अधिकारी, कानूनविद, सियासी लोग बहस में जुट गए हैं।
इसके परिणाम क्या होंगे? इससे बचा जाए तो कैसे? बचा जा सकता है या नहीं? नहीं बचा जा सकता तो भविष्य में इससे कैसे निपटा जाएगा? इसके बाद दूसरा विषय है हत्या के बजाय मुकदमे को गैर इरादतन हत्या में तरमीम करने का तो इसमें भी पुलिस अब तक ढाई कदम चल चुकी है। पहला मुकदमा, दूसरा गिरफ्तारी और आधा कदम मुकदमे के आधे आरोपियों की गिरफ्तारी। तीनों स्तरों पर हत्या में लिखा पढ़ी हुई है। अब अगर कुछ बदलाव किया तो विरोध कौन झेलेगा? अगर विरोध हुआ तो उस विरोध से कैसे निपटा जाएगा? इस सवाल पर सभी मौन हैं। कुल मिलाकर इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर और फूंक फूंककर कदम उठाया जाएगा। उससे पहले परिवार के साथ-साथ सपा व कांग्रेस की एंट्री भी परेशानी का प्रमुख कारण बनी हुई है।
दिन भर चला बैठकों का दौर, नतीजा नहीं निकला
इस मामले में पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर से दिन भर बैठकों का दौर चला। एक बैठक सुबह के समय हुई। जिसमें अधिकारियों के साथ कुछ जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। फिर शाम को एक बैठक कर दौर चला। दोनों बैठकों के बाद किसी को कोई नतीजे का भरोसा नहीं मिला। बस यही आश्वासन दिया गया कि जो भी होगा, न्याय संगत होगा। किसी के साथ मामले में अन्याय नहीं होगा। यहां तक तर्क रखे गए कि अगर बात मुकदमा, धारा आदि की गलती की करें तो दो दो वीडियो फुटेज को नहीं झुठलाया जा सकता। वहीं आरोपी पक्ष की ओर से दी गई तहरीर पर चर्चा हुई। जिसमें यही कहा गया कि जो तहरीर दी गई है, उसमें लूट व दुष्कर्म के आरोपों को आरोपी के मृत्यु पूर्व बयान से मिलान पर साबित नहीं किया जा सकता। अगर मुकदमा हो सकता है तो सिर्फ चोरी के लिए घर में घुसने का हो सकता है। इसके बाद नेता बैठकों से वापस लौट गए।
एडीजी जोन भी पहुंचीं, बैठक में हुई मंत्रणा
इस घटना को लेकर बृहस्पतिवार दोपहर एडीजी जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ भी यहां पहुंचीं। उन्होंने पुलिस लाइन सभागार में कमिश्रर, आईजी, डीएम, एसएसपी, एसपी सिटी की मौजूदगी में बैठक कर मुद्दे पर चर्चा की। शहर के हालात की जानकारी ली। फिर माहौल को सामान्य रखने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की। बाद में सीओ व एसओ से भी बात की। करीब एक घंटे तक चली बैठक के बाद वे वापस लौट गईं। इस दौरान यही निर्देश दिए कि किसी भी कीमत पर शहर के हालात को सामान्य रखना है।
भाजपा के साथ संघ भी सक्रिय, रहेगी हालात पर नजर
इस घटना में अब तक जो हुआ है। उस पर भाजपा के साथ संघ भी जानकारी जुटा रहा है। फिलहाल बस एक ही बात हर स्तर पर तय की जा रही है। अभी हालात पर नजर रखी जाए। किसी भी स्तर पर कोई प्रतिक्रिया या शहर का माहौल न बिगड़ने दिया जाए। इसके बाद आगे नियमानुसार व जांच के आधार पर कार्रवाई तय की जाएगी।
परिवार से वार्ता व अधिकारियों से बैठकों के बाद तय हुआ है कि किसी निर्दोष को अब परेशान नहीं किया जाएगा। जो अब तक हुआ है, उसमें भी मदद मिलेगी। जो भड़काऊ बातें कर रहे हैं, उन पर कार्रवाई होगी।-कृष्णपाल सिंह लाला, भाजपा जिलाध्यक्ष