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किसान, कोल्ड स्टोर्स स्वामी, आढ़ती, व्यापारी सब मस्त, बस जनता पस्त
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दुबे के पड़ाव में आलू बेचता दुकानदार।
- फोटो : CITY OFFICE
आशीष निगम
बेहद स्वादिष्ट आलू वाली इस नामीगिरामी बेल्ट में ही लाखों लोग इससे दूर होने लगे हैं। कारण, इसका लगातार महंगे होते जाना है। सोमवार को फुटकर दुकानों में आलू 35 से 40 रुपये किलो के भाव में बिका। व्रत और सावन के कारण इसकी मांग इन दिनों कुछ ज्यादा है। आलू के अचानक इतने महंगे होने की वजहें जानी गई तो कुछ बातें सामने आईं। जिसमें फसल की कमी, आलू का बाहर जाना, बाहर से आलू नहीं आना और स्टाक डंप करना बड़ी वजहें हैं।
आलू कारोबार से जुड़े दिग्गज लोग भी मान रहे हैं कि कुछ लोगों ने स्टाक का बड़ा खेल खेला है, जिसकी वजह से ये 'आमÓ सब्जी इतनी 'खासÓ हो गई। कुल मिला कर किसान, कोल्ड स्टोर्स स्वामी, व्यापारी, आढ़ती, दुकानदार सब मस्त हैं। बस जनता पस्त है। जिला उद्यान अधिकारी नंद किशोर सहानिया कहते हैं कि लगभग तीन साल बाद आलू किसानों के दिन बहुरे हैं। उनको इस बार कुछ राहत मिली है। आलू का रकबा कम होने से भाव ज्यादा है। अभी बाहर का आलू आते ही दाम कम हो जाएगा। आलू के इस खेल पर अलीगढ़ कोल्ड स्टोरेज आनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गिरिराज गोदानी ने कहा कि लगातार दो साल से आलू का दाम कम रहने से किसानों को बहुत नुकसान हुआ था। इसलिए उन्होंने इस बार आलू कम रकबे में बोया, जिसका नतीजा है कि आलू आसमान चढ़ गया। कोल्ड स्टोर में 3797 आलू 22 से 23 रुपये किलो, सूर्या 26 से 27 रुपये, टी-7 24 से 25 रुपये के भाव में है। आलू का बीज दो से चार हजार रुपये प्रति 50 किलो है।
निरंजनपुरी में सब्जी बेच रहे राम सिंह ने बताया कि सोमवार को धनीपुर मंडी में 3797 आलू 22 रुपये, टी-7 प्रजाति 28 रुपये, छंटनी वाला चिप्सोना 30 रुपये, होलसेल चिप्सोना 25 रुपये किलो के भाव में मिला। अब इस दाम का आलू बाजार 35 रुपये के भाव में नहीं बिकेगा क्या..? वो भी तब जब इस उमस के मौसम में आलू बहुत जल्दी सड़ने लगता है। ग्राहक जब भाव पूछ कर आलू कम लेते हैं तो दुख होता है। आलू के क्षेत्र में ही आलू खाना मुश्किल हो गया। श्रीबलराम शीतगृह खैर के स्वामी श्रीकांत शर्मा कहते हैं कि किसान और कोल्ड स्टोर का आलू वाजिब दामों में है लेकिन कुछ जगहों पर फुटकर दुकानदार और कुछ लोग इसे जबरन महंगा बेच रहे हैं। इस पर कार्यवाही हो तो भी दाम कुछ कम हो सकते हैं।
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महंगा होने की तीन वजह
-जिले में इस बार 2019-20 की फसल में मार्च 2019 में बोई गई थी, जिसमें आलू का रकबा 27 हजार हेक्टेयर तक सिमट गया था। इसमें लगभग एक हजार हेक्टेयर की कमी हुई है। कारण ये था कि लगातार दो साल से आलू किसान घाटा उठा रहे थे। इसलिए उन्होंने फसल तो रखी, लेकिन रकबा कम कर दिया। इससे पहले के वर्षों में भी ऐसा हो चुका है। जिले में आलू की फसल 27 से 30 हजार हेक्टेयर के बीच कम ज्यादा होती रहती है। इसलिए पैदावार कम थी।
-आलू के इस खेल में कुछ व्यापारी, अढ़ातियों और दुकानदारों ने स्टाक दबाने का भी काम किया, जिसकी वजह से बीच बीच में आलू की किल्लत और लॉकडाउन का हवाला देकर महंगा किया गया।
-पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने वहां का आलू बाहर नहीं जाने दिया, ताकि कीमतें काबू में रहें। इससे उलट यूपी का आलू पूरे देश में गया। अलीगढ़ से भी बड़ी मात्रा में आलू बाहर गया, जिससे आलू कम होता गया।
-पश्चिम बंगाल, कनार्टक और पंजाब से आने आलू के कारण यहां स्थानीय आलू की कीमतें काबू में रहती थीं, लेकिन अभी पंजाब का आलू नवंबर में आएगा। अभी तीन महीने का वक्त है। कनार्टक में आलू की पैदावार कम होने से वहां से आने की उम्मीद कम है।
-भीषण गरमी और उमस के इस मौसम में आलू जल्द ही सडने लगता है। नमी बहुत अधिक होने की वजह ये जल्द ही खराब होने लगता है। इस कारण आढ़त, दुकानों और घरों में इसका भंडारण भी सुरक्षित नहीं है।
अगस्त में गिर सकता है भाव
आलू व्यापारियों की मानें तो अगस्त महीने में कनार्टक से कुछ माल आने लगेगा। उसके बाद कोल्ड स्टोर से आलू निकलेगा और दाम कुछ कम होंगे। अभी जब तक वो आलू नहीं आएगा तब तक स्थानीय आलू का दाम चढ़ा रहेगा। जिले में कुल 109 में से 101 कोल्ड स्टोर्स में आलू और बाकी आठ में मीट स्टोरेज होता है। इन सभी की कुल भंडारण क्षमता 8.46 मीट्रिक टन है। वर्तमान में 25 फीसदी तक आलू की निकासी हो चुकी है। बाकी आलू अभी स्टाक में है। अगर रोजाना की जरूरत के हिसाब से आलू इन स्टोर्स से बाजार में आए तो दाम कम हो सकते हैं। मार्च में किसानों ने 450 रुपये प्रति 520 किलो की दर में आलू कोल्ड स्टोर्स में रखा था। लॉकडाउन के बाद ये रेट 750 रुपये तक पहुंच गए थे।
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बेहद स्वादिष्ट आलू वाली इस नामीगिरामी बेल्ट में ही लाखों लोग इससे दूर होने लगे हैं। कारण, इसका लगातार महंगे होते जाना है। सोमवार को फुटकर दुकानों में आलू 35 से 40 रुपये किलो के भाव में बिका। व्रत और सावन के कारण इसकी मांग इन दिनों कुछ ज्यादा है। आलू के अचानक इतने महंगे होने की वजहें जानी गई तो कुछ बातें सामने आईं। जिसमें फसल की कमी, आलू का बाहर जाना, बाहर से आलू नहीं आना और स्टाक डंप करना बड़ी वजहें हैं।
आलू कारोबार से जुड़े दिग्गज लोग भी मान रहे हैं कि कुछ लोगों ने स्टाक का बड़ा खेल खेला है, जिसकी वजह से ये 'आमÓ सब्जी इतनी 'खासÓ हो गई। कुल मिला कर किसान, कोल्ड स्टोर्स स्वामी, व्यापारी, आढ़ती, दुकानदार सब मस्त हैं। बस जनता पस्त है। जिला उद्यान अधिकारी नंद किशोर सहानिया कहते हैं कि लगभग तीन साल बाद आलू किसानों के दिन बहुरे हैं। उनको इस बार कुछ राहत मिली है। आलू का रकबा कम होने से भाव ज्यादा है। अभी बाहर का आलू आते ही दाम कम हो जाएगा। आलू के इस खेल पर अलीगढ़ कोल्ड स्टोरेज आनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गिरिराज गोदानी ने कहा कि लगातार दो साल से आलू का दाम कम रहने से किसानों को बहुत नुकसान हुआ था। इसलिए उन्होंने इस बार आलू कम रकबे में बोया, जिसका नतीजा है कि आलू आसमान चढ़ गया। कोल्ड स्टोर में 3797 आलू 22 से 23 रुपये किलो, सूर्या 26 से 27 रुपये, टी-7 24 से 25 रुपये के भाव में है। आलू का बीज दो से चार हजार रुपये प्रति 50 किलो है।
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निरंजनपुरी में सब्जी बेच रहे राम सिंह ने बताया कि सोमवार को धनीपुर मंडी में 3797 आलू 22 रुपये, टी-7 प्रजाति 28 रुपये, छंटनी वाला चिप्सोना 30 रुपये, होलसेल चिप्सोना 25 रुपये किलो के भाव में मिला। अब इस दाम का आलू बाजार 35 रुपये के भाव में नहीं बिकेगा क्या..? वो भी तब जब इस उमस के मौसम में आलू बहुत जल्दी सड़ने लगता है। ग्राहक जब भाव पूछ कर आलू कम लेते हैं तो दुख होता है। आलू के क्षेत्र में ही आलू खाना मुश्किल हो गया। श्रीबलराम शीतगृह खैर के स्वामी श्रीकांत शर्मा कहते हैं कि किसान और कोल्ड स्टोर का आलू वाजिब दामों में है लेकिन कुछ जगहों पर फुटकर दुकानदार और कुछ लोग इसे जबरन महंगा बेच रहे हैं। इस पर कार्यवाही हो तो भी दाम कुछ कम हो सकते हैं।
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महंगा होने की तीन वजह
-जिले में इस बार 2019-20 की फसल में मार्च 2019 में बोई गई थी, जिसमें आलू का रकबा 27 हजार हेक्टेयर तक सिमट गया था। इसमें लगभग एक हजार हेक्टेयर की कमी हुई है। कारण ये था कि लगातार दो साल से आलू किसान घाटा उठा रहे थे। इसलिए उन्होंने फसल तो रखी, लेकिन रकबा कम कर दिया। इससे पहले के वर्षों में भी ऐसा हो चुका है। जिले में आलू की फसल 27 से 30 हजार हेक्टेयर के बीच कम ज्यादा होती रहती है। इसलिए पैदावार कम थी।
-आलू के इस खेल में कुछ व्यापारी, अढ़ातियों और दुकानदारों ने स्टाक दबाने का भी काम किया, जिसकी वजह से बीच बीच में आलू की किल्लत और लॉकडाउन का हवाला देकर महंगा किया गया।
-पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने वहां का आलू बाहर नहीं जाने दिया, ताकि कीमतें काबू में रहें। इससे उलट यूपी का आलू पूरे देश में गया। अलीगढ़ से भी बड़ी मात्रा में आलू बाहर गया, जिससे आलू कम होता गया।
-पश्चिम बंगाल, कनार्टक और पंजाब से आने आलू के कारण यहां स्थानीय आलू की कीमतें काबू में रहती थीं, लेकिन अभी पंजाब का आलू नवंबर में आएगा। अभी तीन महीने का वक्त है। कनार्टक में आलू की पैदावार कम होने से वहां से आने की उम्मीद कम है।
-भीषण गरमी और उमस के इस मौसम में आलू जल्द ही सडने लगता है। नमी बहुत अधिक होने की वजह ये जल्द ही खराब होने लगता है। इस कारण आढ़त, दुकानों और घरों में इसका भंडारण भी सुरक्षित नहीं है।
अगस्त में गिर सकता है भाव
आलू व्यापारियों की मानें तो अगस्त महीने में कनार्टक से कुछ माल आने लगेगा। उसके बाद कोल्ड स्टोर से आलू निकलेगा और दाम कुछ कम होंगे। अभी जब तक वो आलू नहीं आएगा तब तक स्थानीय आलू का दाम चढ़ा रहेगा। जिले में कुल 109 में से 101 कोल्ड स्टोर्स में आलू और बाकी आठ में मीट स्टोरेज होता है। इन सभी की कुल भंडारण क्षमता 8.46 मीट्रिक टन है। वर्तमान में 25 फीसदी तक आलू की निकासी हो चुकी है। बाकी आलू अभी स्टाक में है। अगर रोजाना की जरूरत के हिसाब से आलू इन स्टोर्स से बाजार में आए तो दाम कम हो सकते हैं। मार्च में किसानों ने 450 रुपये प्रति 520 किलो की दर में आलू कोल्ड स्टोर्स में रखा था। लॉकडाउन के बाद ये रेट 750 रुपये तक पहुंच गए थे।