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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जे के सीमेंट फैक्टरी को दिया नोटिस
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अलीगढ़ - कासिमपुर मार्ग स्थित जेके सीमेंट फैक्टरी से हो रहे प्रदूषण की शिकायत पर जांच के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फैक्टरी को नोटिस दिया है। इस मामले में जांच अधिकारी ने आख्या बोर्ड मुख्यालय को भी भेज दी है।
ग्रामीणों ने जेके सीमेंट फैक्टरी से हो रहे प्रदूषण की शिकायत प्रदूषण नियंत्रण विभाग में की थी। 21 जून के विभाग के अधिकारियों ने फैक्टरी का निरीक्षण किया। जांच में फैक्टरी के आसपास वातावरण में प्रदूषण पाया गया था। इसके बाद साथा निवासी कौशल चौहान ने 11 जुलाई को आईजीआरएस पोर्टल पर मुख्यमंत्री से फैक्टरी से हो रहे प्रदूषण की शिकायत की । उन की शिकायत पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अलीगढ़ के क्षेत्रीय अधिकारी जयपाल सिंह ने फैक्टरी में पहुंचकर जांच की। जांच में फैक्टरी के आसपास वातावरण और किसानों के खेतों में फसलों पर भी धूल जमी पाई गई। अधिकारी जयपाल सिंह का कहना है कि लोगों की शिकायत सही पाई गई है। आख्या बोर्ड मुख्यालय भेज दी है।
इधर, खेरूपुरा व साथा के लोगों का कहना है कि सीमेंट फैक्टरी से हमारी फसलें बर्बाद हो रहीं हैं। पैदावार भी कम होती है। कटाई के समय भी परेशानी होती है। सीमेंट के कण फसलों पर जमने के कारण हाथों में घाव हो जाते हैं। आंतों में जलन होने लग जाती है। इन किसानों का कहना है कि सीमेंट की धूल से फसल की पैदावार 25 प्रतिशत तक कम हो गई है। मकान की छतों पर भी सीमेंट की परत जम जाती है। पशुपालक बैकुंठी का कहना है कि सीमेंट की धूल से पशुओं को प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ रहा है।
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ग्रामीणों ने जेके सीमेंट फैक्टरी से हो रहे प्रदूषण की शिकायत प्रदूषण नियंत्रण विभाग में की थी। 21 जून के विभाग के अधिकारियों ने फैक्टरी का निरीक्षण किया। जांच में फैक्टरी के आसपास वातावरण में प्रदूषण पाया गया था। इसके बाद साथा निवासी कौशल चौहान ने 11 जुलाई को आईजीआरएस पोर्टल पर मुख्यमंत्री से फैक्टरी से हो रहे प्रदूषण की शिकायत की । उन की शिकायत पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अलीगढ़ के क्षेत्रीय अधिकारी जयपाल सिंह ने फैक्टरी में पहुंचकर जांच की। जांच में फैक्टरी के आसपास वातावरण और किसानों के खेतों में फसलों पर भी धूल जमी पाई गई। अधिकारी जयपाल सिंह का कहना है कि लोगों की शिकायत सही पाई गई है। आख्या बोर्ड मुख्यालय भेज दी है।
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इधर, खेरूपुरा व साथा के लोगों का कहना है कि सीमेंट फैक्टरी से हमारी फसलें बर्बाद हो रहीं हैं। पैदावार भी कम होती है। कटाई के समय भी परेशानी होती है। सीमेंट के कण फसलों पर जमने के कारण हाथों में घाव हो जाते हैं। आंतों में जलन होने लग जाती है। इन किसानों का कहना है कि सीमेंट की धूल से फसल की पैदावार 25 प्रतिशत तक कम हो गई है। मकान की छतों पर भी सीमेंट की परत जम जाती है। पशुपालक बैकुंठी का कहना है कि सीमेंट की धूल से पशुओं को प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ रहा है।
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