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अलीगढ़ : भूपेंद्र की ताजपोशी से जिले के चौधरियों की दौड़ तेज
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अभिषेक शर्मा
उत्तर प्रदेश में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पद पर भूपेंद्र चौधरी की ताजपोशी के बाद दिल्ली-लखनऊ के लिए जिले के चौधरियों की दौड़ तेज हो गई है। सब अपने अपने खेमे का पलड़ा भारी रखने की कवायद में हैं। खुद के खेमे से जिले के अध्यक्ष पद पर ताजपोशी के लिए अभी से गुणा-भाग लगाना शुरू कर दिया है।
2017-2022 में लगातार हारी जिले में रालोद
अलीगढ़ में इगलास व खैर सीट पर सर्वाधिक जाट मतदाता हैं। इसीलिए इगलास को मिनी छपरौली भी कहते हैं। चौ.चरण सिंह ने इगलास व खैर को अपनी कर्मस्थली बनाया। चरण सिंह की पत्नी व बेटी इगलास से व बेटी एक बार खैर से विधायक भी रहीं। इतिहास पर गौर करें तो इन दोनों सीटों पर चरण सिंह या उनके परिवार से आशीर्वाद प्राप्त लोग ही ज्यादा बार विधायक बने। लेकिन मोदी लहर में 2017 और 2022 के चुनाव में इन सीटों व जिले की तीसरी आंशिक रालोद प्रभाव वाली बरौली सीट पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। लोकसभा चुनावों में भी भाजपा को यही करिश्मा दोहराने की उम्मीद है।
ये हैं जिले की ताजा तस्वीर
मौजूदा जिलाध्यक्ष चौ.ऋषिपाल सिंह जाट समाज से ही हैं। उन्हें संगठन ने एमएलसी बनवाया है। नए प्रदेशाध्यक्ष के बाद इस पद पर नई तैनाती की उम्मीद की जा रही है। अगर ऋषिपाल सिंह के अलावा किसी और नाम पर विचार करना हुआ तो सियासी संतुलन साधने के लिए पार्टी ब्राह्मण या ठाकुर चेहरे पर भी दांव लगा सकती है।
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-बेशक भाजपा ने जाट चेहरा प्रदेशाध्यक्ष बनाया है। मगर भाजपा गलतफहमी में है। पार्टी ने ब्राह्मणों को हाशिए पर रखा है। इस निर्णय से न तो जाट रीझकर भाजपा को वोट देंगे न ही नाराज ब्राह्मण उसके पक्ष में आएंगे। इसका पार्टी को नुकसान होगा।-संतोष सिंह, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
-उपराष्ट्रपति या प्रदेशाध्यक्ष पद देकर भाजपा ने जाटों को लॉलीपॉप दिया है। मगर इसका चुनावी लाभ नहीं मिल पाएगा। समूचा जाट समाज आने वाले चुनाव में भाजपा के खिलाफ मतदान करेगा। -चौ.बिजेंद्र सिंह, पूर्व सांसद सपा नेता
-रालोद पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जो आदमी खुद चुनाव न जीता हो, उससे जाटों को कैसे खींचने की उम्मीद की जा सकती है। यह भाजपा की राजनीतिक चाल है। पहले सतपाल मलिक को ठिकाने लगाया। अब इनको। यह गरीब-अमीर की लड़ाई होने जा रही है।-कालीचरण सिंह, निवर्तमान जिलाध्यक्ष रालोद
-इस समय आम आदमी पार्टी की आंधी चल रही है। भाजपा कितने ही जतन क्यों न कर ले। किसी तरह का फर्क इस तरह के जतन से पड़ने नहीं वाला है।-सुनील यादव, जिलाध्यक्ष आप
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उत्तर प्रदेश में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पद पर भूपेंद्र चौधरी की ताजपोशी के बाद दिल्ली-लखनऊ के लिए जिले के चौधरियों की दौड़ तेज हो गई है। सब अपने अपने खेमे का पलड़ा भारी रखने की कवायद में हैं। खुद के खेमे से जिले के अध्यक्ष पद पर ताजपोशी के लिए अभी से गुणा-भाग लगाना शुरू कर दिया है।
2017-2022 में लगातार हारी जिले में रालोद
अलीगढ़ में इगलास व खैर सीट पर सर्वाधिक जाट मतदाता हैं। इसीलिए इगलास को मिनी छपरौली भी कहते हैं। चौ.चरण सिंह ने इगलास व खैर को अपनी कर्मस्थली बनाया। चरण सिंह की पत्नी व बेटी इगलास से व बेटी एक बार खैर से विधायक भी रहीं। इतिहास पर गौर करें तो इन दोनों सीटों पर चरण सिंह या उनके परिवार से आशीर्वाद प्राप्त लोग ही ज्यादा बार विधायक बने। लेकिन मोदी लहर में 2017 और 2022 के चुनाव में इन सीटों व जिले की तीसरी आंशिक रालोद प्रभाव वाली बरौली सीट पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। लोकसभा चुनावों में भी भाजपा को यही करिश्मा दोहराने की उम्मीद है।
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ये हैं जिले की ताजा तस्वीर
मौजूदा जिलाध्यक्ष चौ.ऋषिपाल सिंह जाट समाज से ही हैं। उन्हें संगठन ने एमएलसी बनवाया है। नए प्रदेशाध्यक्ष के बाद इस पद पर नई तैनाती की उम्मीद की जा रही है। अगर ऋषिपाल सिंह के अलावा किसी और नाम पर विचार करना हुआ तो सियासी संतुलन साधने के लिए पार्टी ब्राह्मण या ठाकुर चेहरे पर भी दांव लगा सकती है।
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-बेशक भाजपा ने जाट चेहरा प्रदेशाध्यक्ष बनाया है। मगर भाजपा गलतफहमी में है। पार्टी ने ब्राह्मणों को हाशिए पर रखा है। इस निर्णय से न तो जाट रीझकर भाजपा को वोट देंगे न ही नाराज ब्राह्मण उसके पक्ष में आएंगे। इसका पार्टी को नुकसान होगा।-संतोष सिंह, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
-उपराष्ट्रपति या प्रदेशाध्यक्ष पद देकर भाजपा ने जाटों को लॉलीपॉप दिया है। मगर इसका चुनावी लाभ नहीं मिल पाएगा। समूचा जाट समाज आने वाले चुनाव में भाजपा के खिलाफ मतदान करेगा। -चौ.बिजेंद्र सिंह, पूर्व सांसद सपा नेता
-रालोद पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जो आदमी खुद चुनाव न जीता हो, उससे जाटों को कैसे खींचने की उम्मीद की जा सकती है। यह भाजपा की राजनीतिक चाल है। पहले सतपाल मलिक को ठिकाने लगाया। अब इनको। यह गरीब-अमीर की लड़ाई होने जा रही है।-कालीचरण सिंह, निवर्तमान जिलाध्यक्ष रालोद
-इस समय आम आदमी पार्टी की आंधी चल रही है। भाजपा कितने ही जतन क्यों न कर ले। किसी तरह का फर्क इस तरह के जतन से पड़ने नहीं वाला है।-सुनील यादव, जिलाध्यक्ष आप