Aligarh Police: हथियार चलाना भूल रहे पुलिस वाले...इस साल 4095 ने नहीं फोड़ा एक भी कारतूस
प्रति सप्ताह शुक्रवार को पुलिस लाइन में परेड होती है। जिसमें अक्सर हथियार संचालन और उनके किस मौके पर प्रयोग को लेकर बारीकी से जानकारियां दी जाती हैं। अपने जिले में छोटे हथियारों का फायरिंग प्रशिक्षण पीएसी 38 की रेंज में व बड़े हथियारों का बदायूं में होता है।
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विस्तार
पुलिस प्रशिक्षण के दौरान हथियार चलाना और खोलना दोनों सिखाए जाते हैं। ट्रेनिंग के बाद भी प्रशिक्षण केंद्रों पर समय समय पर फायरिंग का प्रशिक्षण होता है। असलहों की तमाम बारीकियां बताई जाती हैं। लेकिन पुलिस वाले ट्रेनिंग के इस सबसे अहम पाठ को ही भूलते जा रहे हैं। इसकी बड़ी वजह तैनाती के दौरान प्रशिक्षण न होना भी माना जाता है। अगर अलीगढ़ की ही बात करें तो यहां केवल नौ फीसदी पुलिस वालों को ही इस वित्तीय वर्ष में फायरिंग की ट्रेनिंग दी जा सकी है। यानी 4000 ने कोई कारतूस नहीं फोड़ा। एटा में तो किसी भी पुलिस वाले को प्रशिक्षण नहीं दिया जा सका है।
फायरिंग प्रशिक्षण के लिए हर साल पुलिस को कारतूसों का कोटा आवंटित होता है। इसी कोटे के आधार पर फायरिंग कराई जाती है। नियम यह है कि साल भर में हर पुलिस कर्मी बट पर जाकर फायरिंग करेगा। लेकिन लगातार बढ़ते ड्यूटियों के बोझ के कारण फायरिंग हो ही नहीं पा रही है। यही वजह है कि इस वित्तीय वर्ष में अभी तक केवल 9 फीसदी पुलिस वाले फायरिंग कर सके हैं। जनपद में पुलिस कर्मियों की संख्या 4500 है लेकिन केवल 4095 फायरिंग ही नहीं कर सके हैं।
दरोगा से ये हुई लापरवाही
गभाना की घटना की लापरवाही पर गौर करें तो जिस दरोगा की पिस्टल फंसी, उसे हथियार किसी दूसरे को नहीं देना चाहिए था। अगर व्यवहार में दूसरे दरोगा ने पिस्टल ले भी ली तो उसे पेट के सहारे पिस्टल लगाकर उसका स्लाइडर नहीं दबाना चाहिए था। बाकायदा नियमानुसार पिस्टल की नाल जमीन की ओर कर स्लाइडर खींचना था। ये लापरवाही भी उस दरोगा के स्तर से हुई, जो दो थानों का प्रभारी भी रहा है। इस तरह की बातें हमेशा पुलिस प्रशिक्षण के दौरान सिखाई जाती हैं। प्रति सप्ताह शुक्रवार को पुलिस लाइन में परेड होती है। जिसमें अक्सर हथियार संचालन और उनके किस मौके पर प्रयोग को लेकर बारीकी से जानकारियां दी जाती हैं। अपने जिले में छोटे हथियारों का फायरिंग प्रशिक्षण पीएसी 38 की रेंज में व बड़े हथियारों का बदायूं में होता है।
ये हैं हालात
अब बीटवार प्रशिक्षित होंगे पुलिसकर्मी, बनेगी क्यूआरटी
पुलिसकर्मियों के हथियार प्रशिक्षण को लेकर अब बीटवार नई व्यवस्था रेंज स्तर पर बनाई गई है। जिसमें बीटवार सिपाहियों को एक निर्धारित समय के लिए पुलिस लाइन बुलाया जाएगा। इनकी एक क्यूआरटी बनेगी। यह क्यूआरटी हथियार संचालन, रखरखाव से लेकर बीट के कामकाज को बारीकी से सीखेगी। अच्छा काम करने वालों को सम्मानित किया जाएगा।
आईजी शलभ माथुर ने चारों जिलों के एसएसपी को निर्देशित किया है। जिसमें तय किया है कि सभी थानों की एक बीटवार लिस्ट बनाकर पुलिस लाइन में क्यूआरटी बनाई जाएगी। इसके लिए एक निर्धारित समय तय होगा। इस क्यूआरटी की एक निर्धारित संख्या होगी। जिसमें क्रमवार एक थाने से एक बीट कर्मचारी को संबद्ध किया जाएगा। जहां उन्हें बीट के कामकाज, हथियारों का संचालन, रखरखाव आदि का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जख्मी दरोगा से शुरू हुई घटना पर पूछताछ
इस मामले में एसपी सिटी ने अपनी विवेचना शुरू कर दी है। 19 जुलाई को डॉक्टरों की सलाह पर इंस्पेक्टर गभाना को दरोगा से बातचीत के लिए भेजा गया। हालांकि अभी दरोगा ने घटना के बाद दिए गए बयान वाली कहानी ही दोहराई है। अभी ज्यादा बोलने की मनाही है। चूंकि दो पेज का इत्तेफाकिया दर्ज किया गया है। इसलिए उसकी शब्द व शब्द तस्दीक होनी है। एसपी सिटी ने बताया कि डॉक्टरों की अनुमति पर शनिवार को फिर पूछताछ होगी और बयान दर्ज किए जा सकेंगे।
ये हैं नियम और स्थितियां
-थाने के हथियार जांच और मरम्मत को प्रतिमाह पहुंचते लाइन से ऑर्मर के पास
थानों के हथियार में बड़ी कमी होने पर उन्हें मरम्मत के लिए भेजा जाता है सीतापुर
-साल में क्रमवार रेंज खाली होने पर होता फायरिंग-रखरखाव का प्रशिक्षण
-त्रैमासिक व वार्षिक मुआयने में साफ सफाई व रखरखाव की होती जांच
मंडल में इस वर्ष फायरिंग प्रशिक्षण की स्थिति
-अलीगढ़ में महज 9 फीसदी
-एटा में फायरिंग कराई ही नहीं गई
-हाथरस में 90 फीसदी
-कासगंज में 45 फीसदी