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पुलिसकर्मी नहीं दिखाते दिलचस्पी: बस पकड़ा और जेल भेजा, गवाही को न आई पुलिस, अब मुकदमा ही छूटा

Sun, 13 Apr 2025 01:16 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 13 Apr 2025 01:16 PM IST
सार

मुकदमा 2004 का है, जिसमें पुलिस ने आरोपी तमंचे सहित पकड़ा। उसमें भी आज तक कोई गवाह न आने पर 28 जनवरी को इसी वर्ष गवाही का अवसर समाप्त किया गया। आरोपी बरी कर दिया गया। 
 

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Policemen do not show interest in pursuing cases
पुलिस - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

तमंचे-चाकू सहित अपराधियों की गिरफ्तारी का अभियान छेड़े रखने वाली पुलिस खुद के लिखवाए मुकदमों में दिलचस्पी नहीं लेती। इस का परिणाम है कि अदालत में ट्रायल के समय गवाही को पुलिस के न आने पर मुकदमे छूट जाते हैं। पुराने मुकदमों के निस्तारण के क्रम में सीजेएम न्यायालय से ऐसे ही तीन मुकदमों में आरोपी बरी हुए हैं, जिनमें पुलिस बार-बार तलबी के बाद भी गवाही के लिए आना तो दूर साक्ष्य तक पेश न कर सकी।

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पुराने मुकदमों के निस्तारण किया जा रहा है। कुछ मुकदमे तो अपराधियों द्वारा जुर्म स्वीकारने के आधार पर निस्तारित किए जा रहे हैं। जिनमें पुलिसकर्मी बार बार तलबी पर नहीं आते। उनमें साक्ष्य का अवसर समाप्त कर निर्णय सुनाया जाता है। उनके विषय में रिपोर्ट पुलिस अधिकारियों को दी जाती है।-सत्यानंद सिंह, वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी

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मॉनीटरिंग टीम की लगातार समीक्षा की जाती है। प्रयास हर संभव पुलिस के गवाहों को बुलाने का रहता है। कभी कभी सेवानिवृत्तों के पते तस्दीक न होने पर कुछ परेशानी होती है।-संजीव सुमन, एसएसपी

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इन मुकदमों में बरी हुए आरोपी

एक मुकदमा वर्ष 2000 का सिविल लाइंस का रात में लूट का है। जिसमें सिर्फ वादी रिक्शा पोलर गवाही के लिए आया। लूट के कुछ देर बाद ही आरोपी पुलिस ने चाकू सहित पकड़ा। उसका अलग से मुकदमा लिखा गया। उसमें भी कोई गवाह नहीं आया। दोनों मामलों में पुलिस को गवाही व साक्ष्य पेशी के लिए पर्याप्त अवसर दिए जाने के बाद भी किसी के न आने पर इसी वर्ष 29 जनवरी को अवसर समाप्त कर दिया गया। इसी तरह तीसरा मुकदमा 2004 का है, जिसमें पुलिस ने आरोपी तमंचे सहित पकड़ा। उसमें भी आज तक कोई गवाह न आने पर 28 जनवरी को इसी वर्ष गवाही का अवसर समाप्त किया गया। तीनों में आरोपी बरी कर दिए गए।

ये तथ्य भी जानें

  • 600 गिरफ्तारी शस्त्र अधिनियम में 2024 में हुईं
  • 165 गिरफ्तारी शस्त्र अधिनियम में 2025 में मार्च तक

ये हैं तीन कहानियां

  1. सिविल लाइंस में 2 जून 2000 को मुकदमा रिक्शा पोलर नसरुद्दीन ने थाने में बोल-बोलकर दर्ज कराया। जिसमें कहा कि वह रात दो बजे जमालपुर से स्टेशन जा रहा था। तभी हबीब हॉल के पास कुछ राहगीरों से लूट हुई। जिसमें एक व्यक्ति के चाकू भी लगा। सूचना पर पुलिस भी आई। वह खुद घायल राजवीर को एएमयू प्राक्टर ऑफिस लेकर गया। बाद में मुकदमा दर्ज कराने गया। मौके पर लूट करने वाले बदमाश का नाम पुरानी चुंगी का जुबैर अथर बताया जा रहा था। अदालत में वह गवाही के लिए बुलाया तो सभी बातों से मुकर गया। बस कहा कि वह जब जा रहा था तो रुपयों को लेकर कुछ लोगों में झगड़ा हो रहा था। वह रुक गया। वह किसी को नहीं जानता था। तभी पुलिस आई। उसे जबरन थाने बुलाया। वहां कुछ कागजों पर अंगूठे गवाही के लिए लगवा लिए थे। इसके अलावा अन्य कोई गवाह मुकदमे में नहीं पेश किया जा सका।
  2. थाना सिविल लाइंस के एसआई आसाराम यादव सिपाही मतीन, अवरेश, संदेश पुलिस जीप से 2 जून 2000 की रात गश्त पर थे। तभी उन्होंने प्रयासकर मेडिकल कालोनी से जुबैर अथर को चाकू व कुछ नकदी सहित गिरफ्तार कर लिया। थाने लाकर मुकदमा दर्ज किया। अगले दिन जेल भेजा गया। इस मुकदमे में आज तक कोई गवाह पेश नहीं किया जा सका।
  3. ये वाकया 2 अक्टूबर 2004 की रात का है। वादी मुकदमा बन्नादेवी के एसआई धर्मवीर की ओर से लिखवाया गया। वे रात में खुद सिपाही छोटेलाल, वीरेश व प्रेमचंद संग गश्त पर थे। तभी एलमपुर गडिय़ा इलाके में लईक उर्फ राजू निवासी भमोला सिविल लाइंस को एक अन्य साथी संग तमंचे सहित दबोचा। मुकदमे में जेल भेजा गया। चार्जशीट लईक राजू पर दायर हुई। न्यायालय में एक भी गवाह आज तक पेश नहीं किया जा सका।
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