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UP: नोएडा जा रहे किसान नेता राकेश टिकैत को पुलिस ने रोका, बोले- अब होगी आरपार की लड़ाई

Wed, 04 Dec 2024 02:49 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 04 Dec 2024 02:49 PM IST
सार

अलीगढ़ जिले के टप्पल में पुलिस ने किसान नेता राकेश टिकैत को रोक लिया। जिसके बाद बड़ी संख्या में किसान टप्पल बॉर्डर पर जमा हो गए। किसानों को रोककर उन्हें बस में भरकर पुलिस थाने ले आई।

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Police stopped Rakesh Tikait who was going to Noida said-now there will be a fight to end
राकेश टिकैत को पुलिस ने रोका - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बुधवार को नोएडा जा रहे किसान नेता राकेश टिकैत को यमुना-एक्सप्रेसवे पर पुलिस ने रोक लिया। पुलिस उन्हें टप्पल थाने ले आई। किसान नेता ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान न होने पर वह लखनऊ तक ट्रैक्टर यात्रा शुरू करेंगे। अब आरपार की लड़ाई होगी। 

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दलित प्रेरणा स्थल से किसानों को हटाकर जेल भेजने से नाराज भारतीय किसान यूनियन ने बुधवार को नोएडा ग्रीनो के जीरो प्वांट पर महापंचायत बुलाई है। इसको लेकर बड़ी संख्या में किसान टप्पल बॉर्डर पर जमे हुए हैं।
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जिन्हें मनाने के लिए डीएम, एसएसपी समेत पुलिस -प्रशासनिक अधिकारी सुबह से ही किसान नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। किसान नोएडा महापंचायत में जाने की जिद पर अड़े हुए हैं। इसी बीच टप्पल में यमुना एक्सप्रेस वे पर राकेश टिकैत और किसानों को रोककर उन्हें बस में भरकर पुलिस थाने ले आई।
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नोएडा कूच कर रहे किसानों को टप्पल हाईवे पर रोका, हंगामा प्रदर्शन
दलित प्रेरणा स्थल से किसानों को हटाकर जेल भेजने से नाराज भारतीय किसान यूनियन ने बुधवार को ग्रीनों के जीरो पॉइंट पर महापंचायत बुलाई है।  इसको लेकर बड़ी संख्या में किसान टप्पल बॉर्डर पर जमे हुए हैं।  जिन्हें मनाने के लिए डीएम, एसएसपी समेत पुलिस -प्रशासनिक अधिकारी सुबह से ही किसान नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। किसान नोएडा महापंचायत में जाने की जिद पर अड़े हुए हैं।

पुलिस प्रशासन से हुई नोंकझोंक

टप्पल थाना क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर किसानों और प्रशासन के बीच तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत और अन्य किसान नेता नोएडा कूच के लिए निकले थे। पुलिस ने यमुना एक्सप्रेसवे पर उनकी कार को रोक दिया, जिससे मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई। राकेश टिकैत और उनके साथ मौजूद सैकड़ों किसान नेता यमुना एक्सप्रेसवे के बीचों-बीच पैदल चलते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। टिकैत एक कार में सवार थे, जिसे पुलिस ने बीच रास्ते में रोक लिया। किसानों ने नोएडा की ओर कूच करने पर जोर दिया, लेकिन भारी पुलिस बल ने उन्हें रोकने की पूरी तैयारी कर रखी थी।

पुलिस ने यमुना एक्सप्रेसवे पर किसानों को रोकने के लिए कई वाहनों को सड़क पर खड़ा कर दिया और एक साइड को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और राकेश टिकैत के बीच तीखी बहस हुई। टिकैत ने आरोप लगाया कि प्रशासन किसानों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है। मौके पर अलीगढ़ के जिलाधिकारी (DM), एसएसपी, एसपी ग्रामीण, और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने पहुंचकर स्थिति को संभालने की कोशिश की व भारी पुलिस बल ने यमुना एक्सप्रेसवे पर किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग कर दी।


राकेश टिकैत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, "हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए जा रहे थे, लेकिन प्रशासन ने हमें जबरन रोका। किसानों को परेशान किया जा रहा है। हमारी गाड़ियों को रोकने के लिए वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश कर रही है।" पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे पर किसानों को रोकने का फैसला कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया गया। प्रशासन ने कहा कि किसानों को पहले ही सूचित कर दिया गया था कि बिना अनुमति के किसी भी तरह का मार्च या प्रदर्शन नहीं किया जा सकता।

इस दौरान यमुना एक्सप्रेसवे की एक साइड पूरी तरह अवरुद्ध होने के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस ने वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट करने की कोशिश की, लेकिन सड़क पर गाड़ियों की भीड़ बढ़ती गई।

भूमि अधिग्रहण पर उचित मुआवजे की मांग

1. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 64% अतिरिक्त मुआवजा लागू किया जाए।
2. किसानों की खाली जमीनों पर सरकारी कब्जा खत्म किया जाए।


राकेश टिकैत और किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। किसानों का कहना है कि वे किसी भी हाल में पीछे नहीं हटेंगे। दूसरी ओर, प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। यमुना एक्सप्रेसवे पर किसानों और पुलिस के बीच टकराव ने हालात को गंभीर बना दिया है। किसानों की मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार के रुख पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार किसानों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और यह आंदोलन किस दिशा में जाता है।

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