Aligarh: 15 मुल्कों की पुलिस पर सज रहे अलीगढ़ में बने स्टार, हथकड़ी के बाद अब बन रहे बिल्ले और मोनोग्राम भी
भारत के साथ नेपाल, बांग्लादेश, मलयेशिया, सऊदी अरब, वियतनाम, श्रीलंका, अमेरिका, भूटान, हांगकांग, सिंगापुर, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात, इराक की पुलिस के बिल्ले अलीगढ़ में बन रहे हैं।
विस्तार
ताला और तालीम की नगरी अलीगढ़ में अब पंद्रह देशों की पुलिस की वर्दी के लिए स्टार, मोनोग्राम, बिल्ले, लोगो और बेल्ट का बक्कल तैयार किया जा रहा है। क्योंकि इन सभी से वर्दी सजती है लिहाजा बड़े ही आकर्षक तरीके से इन्हें बनाया जा रहा है। सबसे बड़ा ऑर्डर नेपाल, श्रीलंका और मलेशिया से है। बांग्लादेश से भी बड़ा ऑर्डर था लेकिन वहां के हालात और बिगड़ते रिश्तों को देख उनके लिए काम नहीं किया जा रहा है।
हथकड़ी बनाकर दुनिया पर अलग छाप छोड़ने वाले हाथ ही अब पुलिस के लिए बिल्ले बना रहे हैं। विदेशों के अलावा देशभर के विभिन्न राज्यों में पुलिस की वर्दी पर सजने वाले स्टार भी अलीगढ़ में ही बन रहे हैं। सराय मानसिंह निवासी हिमांशु गुप्ता और सुधांशु गुप्ता बताते हैं कि पुलिस की वर्दी पर बेल्ट, स्टार और मोनोग्राम लगाए जाते हैं। क्योंकि सभी देशों की पुलिस के स्टार की डिजाइन अलग है। इसलिए डिजाइन और साइज के अनुसार ही तैयार कराए जा रहे हैं।
इन देशों की पुलिस के बन रहे बिल्ले
भारत, नेपाल, बांग्लादेश, मलयेशिया, सऊदी अरब, वियतनाम, श्रीलंका, अमेरिका, भूटान, हांगकांग, सिंगापुर, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात, इराक की पुलिस के बिल्ले अलीगढ़ में बन रहे हैं।
बिल्ला बनाने की लंबी प्रक्रिया
बिल्ला बनाने के लिए पहले डिजाइन के अनुसार ढलाई के लिए डाई तैयार की जाती है। डिजाइन की ढलाई हो जाने के बाद धुलाई, घिसाई और पॉलिश की जाती है। अंत में पैकिंग होती है और माल सप्लाई के लिए तैयार हो जाता है। प्रत्येक कार्य के लिए अलग-अलग कारीगर होते हैं।
चुनौती भी कम नहीं
पुलिस की वर्दी के लिए बिल्ले, स्टार और मोनोग्राम तैयार कर रहे सुधांशु मिश्रा बताते हैं कि इस काम में चुनौतियां कम नहीं हैं। बिल्ले की डिजाइन तैयार करना बहुत बारीक काम होता है। इसलिए तैयार बिल्लों की घिसाई, पॉलिश, चमक आदि कई स्तर पर चेकिंग की जाती है। किसी भी स्तर पर खराब होने पर माल विदेश में नहीं भेजा जाता। इस तरह लेबर का खर्च बढ़ जाता है।
हथकड़ियां बनाने से शुरू किया सफर बिल्ला बनाने तक पहुंचा
सराय मानसिंह इलाके में स्वतंत्रता सेनानी सोनपाल मिश्रा ने 1932 में हथकड़ी बनाना शुरू किया था। धीरे-धीरे हथकड़ी की डिजाइन बदली और वजन भी कम हुआ। अब तक हथकड़ियों की चार डिजाइन तैयार हो चुकी हैं। भारत के सभी राज्यों के साथ दुनिया के करीब 35 देशों में हथकड़ी निर्यात की जाती हैं। सोनपाल मिश्रा की तीसरी पीढ़ी के हिमांशु मिश्रा और उनके भाई सुधांशु मिश्रा यह कारोबार संभाल रहे हैं। इन भाइयों ने ही अब पुलिस के बिल्ला बनाने का काम शुरू किया है।