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वैचारिक और राजनीतिक मतभेद भुलाकर राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाने में सब जुटें : मोदी

Tue, 22 Dec 2020 08:14 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 22 Dec 2020 08:14 PM IST
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PM Modi Address Centenary Celebrations of Aligarh Muslim University
एएमयू के शताब्दी वर्ष समारोह में वर्चुअल संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। - फोटो : CITY OFFICE
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह में 27 साल बाद भारत के स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने की याद दिलाते हुए देश को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने देश दुनिया में फैली अलीग बिरादरी (एएमयू से संबद्ध रहे लोग) व एएमयू छात्रों से कहा कि इस वक्त राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों को दूर रखकर नए भारत के निर्माण में जुट जाएं। इस कार्य के लिए प्रधानमंत्री ने देश भर के युवाओं से भी सहयोग मांगा है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने डाक टिकट का भी विमोचन किया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में वर्चुअल संबोधन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछली शताब्दी में मतभेदों के नाम पर बहुत वक्त पहले ही जाया हो चुका है। अब वक्त नहीं गंवाना है। सभी को एक लक्ष्य के साथ मिलकर नया भारत बनाना है। सौ साल पहले 1920 में जो युवा थे, उन्हें देश की आजादी के लिए 27 वर्ष संघर्ष करना पड़ा। 1947 में आजादी मिली। आपके पास आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए काम करने का अवसर है। यह समय है 2020 का। आने वाले 27 साल आपके जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष हैं, जिसमें आत्मनिर्भर भारत का सपना सभी को मिलकर पूरा करना है। यह काम एएमयू जैसे कैंपस कर सकते हैं।
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पीएम ने कहा कि न्यू इंडिया के विजन की जब हम बात करते हैं तो उसके मूल में भी यही है कि राष्ट्र और समाज के विकास को राजनीतिक चश्मे से न देखा जाए। जब हम इस बड़े उद्देश्य के लिए साथ आते हैं तो संभव है कि कुछ तत्व इससे परेशान हों। ऐसे तत्व दुनिया की हर सोसायटी में मिल जाएंगे। यह कुछ ऐसे लोग होते हैं, उनके अपने स्वार्थ होते हैं। लेकिन जब भारत का हित सर्वोपरि होगा तो ऐसे लोगों का आधार सिकुड़ता जाएगा। राजनीति और समाज इंतजार कर सकता है लेकिन देश का विकास इंतजार नहीं कर सकता है। गरीब समाज के किसी भी वर्ग का हो, वह इंतजार नहीं कर सकता। युवा इंतजार करना नहीं चाहेंगे।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि हम कहां और किस परिवार में पैदा हुए, किस मत और मजहब में बड़े़ हुए इससे भी बढ़कर यह है कि हर एक नागरिक के प्रयास से बाकी देशवासी कैसे जुड़ें । उन्होंने कहा कि समाज में वैचारिक मतभेद होते हैं। लेकिन जब बात राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति की हो तो हर मतभेद किनारे रख देना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शिक्षा, आर्थिक विकास हो, बेहतर रहन सहन हो, अवसर हो, महिलाओं का हक हो, राष्ट्रवाद हो, सुरक्षा हो, यह वह मुद्दे हैं, जो हर नागरिक के लिए जरूरी हैं। इन पर हम राजनीतिक या सामाजिक मतभेदों के नाम पर असहमत नहीं हो सकते। यहां एएमयू में इन मुद्दों पर मेरे लिए बात करना इसलिए भी आवश्यक है कि क्योंकि यहां से प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी निकले हैं। इसी मिट्टी से निकले हैं। इन स्वतंत्रता सेनानियों की अपनी अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि थीं। वैचारिक मतभेद थे। विचार थे लेकिन जब गुलामी से मुक्ति की बात आई तो सारे विचार आजादी के लक्ष्य के साथ जुड़ गए। हमारे पूर्वजों ने जो आजादी के लिए किया। वही काम अब युवा पीढ़ी को नए भारत के निर्माण के लिए करना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी की एक कामन ग्राउंड थी। वैसे ही नए भारत के लिए एक कामन ग्राउंड पर काम करना है। हमें समझना होगा सियासत सोसायटी का अहम हिस्सा है लेकिन सोसायटी में सियासत के अलावा भी कई अहम मुद्दे हैं। सियासत और सत्ता की सोच से अलग बहुत व्यापक किसी देश का समाज होता है। समाज को आगे बढ़ाने के लिए बहुत स्पेस होता है। उस स्पेस को एक्सप्लोर करना होता है।

कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भी संबोधन किया। इस मौके पर कुलपति प्रो. तारिक मंसूर, सह कुलपति प्रो. जहीरुद्दीन, रजिस्ट्रार अब्दुल हमीद आदि मौजूद रहे।
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