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दबंगई और उत्पीड़न की इंतिहा पर फूटा गुस्सा

Fri, 19 Jul 2019 01:39 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jul 2019 01:39 AM IST
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people urge voilation in murder  case
गांव भोजपुर में बंजारा समाज के युवक की हत्या के बाद फूटा गुस्सा यूं ही नहीं था। जिस दबंग अपराधी पर हत्या का आरोप है उसकी दबंगई के किस्से क्षेत्र में चर्चा-ए-आम हैं। यह बात अलग है कि अब तक थाना पुलिस उन किस्सों को लेकर आंखें मूंदे बैठी रही। वजह क्या थी, यह तो थाना पुलिस ही जान सकती है। मगर लोगों को बेवजह पीटना, रंगदारी मांगना यह इन दबंगों का आम किस्सा था। अब तक लोग कहते थे कि यह सब राजनीतिक संरक्षण के चलते हो रहा है। मगर गुरुवार देर शाम हत्या हो गई तो उत्पीड़न की इंतिहा पर लोगों का गुस्सा फूटा पड़ा। राजनीतिक संरक्षण की वजह से ही सांसद व विधायक विरोधी नारेबाजी भी की गई। लोग यही जिद कर रहे थे कि अब सांसद और विधायक यहां आकर इन दबंगों की करतूत तो देख लें। बहरहाल जैसे तैसे पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को समझाकर शांत किया है और क्राइम ब्रांच, सर्विलांस सहित पुलिस की चार टीमों को भोलू ठाकुर के पीछे लगाया है। ताकि जल्द से जल्द उसकी गिरफ्तारी हो सके।
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पुलिस का देरी से पहुंचना बना गुस्सा की दूसरी वजह
दोपहर 2 बजे शराब के ठेके पर हुए विवाद के शांत हो जाने के बाद सब कुछ सामान्य हो गया था। चूंकि यह आरोपियों का आए दिन का किस्सा था, इसलिए किसी ने पंगा लेने के बजाय शांत हो जाना ही बेहतर समझा। मगर उन्हें नहीं मालूम था कि यह लोग शाम को हमलावर होकर गांव में आ जाएंगे। शाम करीब 6 बजे यह लोग गांव पहुंच गए और फायरिंग करते हुए अरुण की हत्या के बाद जब चले गए और अरुण को छेरत नर्सिंग होम में मृत घोषित कर दिया। इस बीच पुलिस को सूचना भी दे दी गई। बावजूद इसके पुलिस समय से नहीं पहुंची तो लोगों में गुस्सा और भड़क गया। इस बीच जब एसओ गाड़ी लेकर पहुंचे तो उन्हें पथराव कर दौड़ा दिया गया।
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बसपा नेता-बिल्डर धर्मेंद्र चौधरी हत्याकांड में जेल गया था भोलू ठाकुर
जवां के गांव गढ़िया का सुनील सिंह उर्फ भोलू ठाकुर इससे पहले जवां क्षेत्र में ही एक हत्या में और वर्ष 2015 में बसपा के तत्कालीन अतरौली प्रत्याशी व बिल्डर धर्मेंद्र चौधरी की शहर के बन्नादेवी इलाके में गोली मारकर हत्या के मुकदमे में जेल गया था। हालांकि उस मुकदमे में गवाही टूटने के कारण भोलू सहित सभी आरोपी छूट गए। इसके अलावा भोलू पर अन्य भी मुकदमे जवां थाने में दर्ज हैं।
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आर्थिक तंगी से जूझ रहा मजदूर परिवार
जिस मजदूर परिवार का युवक अरुण इस घटना में मारा गया है। उसके पिता मजदूरी करते हैं। परिवार में वह इकलौता मुंबई जाकर कमाने लग गया था। मगर उसे या उसके परिवार को नहीं मालूम था कि यहां लौटना उसकी जान पर बन आएगा। उसकी इस तरह मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट टूट पड़ा है।

मृतक के पिता ने तीन नामजद और पांच अज्ञातों के खिलाफ दी तहरीर
दबंगों की फायरिंग में जान गंवाने वाले मृतक अरुण के पिता घूरेलाल ने देर रात को जवां थाने में तीन नामजद और पांच अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बेटे की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी। आरोप है कि पड़ोसी गांव गढ़िया का भोलू उर्फ सुनील, अजीत और वीरेश (प्रधान) अपने नाजायज हथियारों से गोलीबारी करते हुए गांव में आ गए थे और वह लोगों को धमका रहे थे। इसी बीच उनका बेटा अरुण व उसके साथी उनके सामने आ गए। हमलावरों ने उन पर फायरिंग कर दी। इस दौरान गर्दन पर गोली मारकर उसके बेटे की हत्या कर दी। बेटे के साथ चार-पांच गांव के अन्य लोग भी थे। वह अपनी जान बचाकर अपने-अपने घरों की ओर भाग गए। घूरेलाल का आरोप है कि गोली लगने के बाद बेटा एक घंटे तक तड़पता रहा और हमलावर तांडव मचाते रहे। उन्होंने अरुण की हत्या के बाद कई दर्जन राउंड फायरिंग कर दहशत का माहौल पैदा किया और जाते-जाते वह एलान करके गए कि अगर किसी ने इस बारे में मुंह खोला तो उसे परिवार सहित जान से मार देंगे।
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