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पाक आतंकी देश घोषित हो: मुस्लिम फोरम
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Thu, 01 Dec 2016 01:34 AM IST
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फोरम फार मुस्लिम स्टडीज एंड एनालिसिस (एफएमएसए) ने नगरोटा (जम्मू) में आतंकवादियों द्वारा फिदायीन हमलों में शहीद भारतीय सेना के दो मेजर और पांच जवानों की शहादत पर शोक सभा का आयोजन कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
सभा में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र संघ को तुरंत पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करके उसके खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने चाहिए। फोरम ने मुजम्मिल मंजिल स्थित मीडिया सेंटर पर एक सभा का आयोजन किया। बैठक में फोरम ने प्रस्ताव पारित करके भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र संघ से मांग की है वह पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करें और उसके खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लागू करें। सभा में निदेशक डॉ. जमीम मोहम्मद ने कहा कि उड़ी के बाद अब दोबारा नगरोटा में आतंकवादियों द्वारा सैन्य मुख्यालय पर पहली बार फि दायीन हमला किया गया। जिसमें सेना के मेजर कुणाल गौसानी, लांस नायक संभाजी यशवंत और कांस्टेबिल कदम बंधकों को छुड़ाने में शहीद हो गए।
एएमयू हिंदी विभाग में एसोसिएट प्रो. डॉ. गुलाम फरीद साबरी ने कहा कि दो सैन्य अफसरों की पत्नियों ने भी जिस बहादुरी का परिचय दिया उसे भुलाया नहीं जा सकता है। डॉ. शीरिन मसरूर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस तथ्य से परिचित कराया जाना चाहिए कि फिदायीन हमले के समय पाकिस्तान की ओर से लगातार कवर फायरिंग की जा रही थी जो उसके सीधे तौर पर शामिल होने का प्रमाण है। मो. फारूख खान ने कहा कि हमारे वीर जवानों ने अपनी बहादुरी और शहादत से नगरौटा हमले में आयुध भंडार को बचा लिया वरना भारी संख्या में हमारी तोपें, मिसाइल एवं अन्य आधुनिक सैन्य हथियार नष्ट होते।
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सभा में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र संघ को तुरंत पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करके उसके खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने चाहिए। फोरम ने मुजम्मिल मंजिल स्थित मीडिया सेंटर पर एक सभा का आयोजन किया। बैठक में फोरम ने प्रस्ताव पारित करके भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र संघ से मांग की है वह पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करें और उसके खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लागू करें। सभा में निदेशक डॉ. जमीम मोहम्मद ने कहा कि उड़ी के बाद अब दोबारा नगरोटा में आतंकवादियों द्वारा सैन्य मुख्यालय पर पहली बार फि दायीन हमला किया गया। जिसमें सेना के मेजर कुणाल गौसानी, लांस नायक संभाजी यशवंत और कांस्टेबिल कदम बंधकों को छुड़ाने में शहीद हो गए।
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एएमयू हिंदी विभाग में एसोसिएट प्रो. डॉ. गुलाम फरीद साबरी ने कहा कि दो सैन्य अफसरों की पत्नियों ने भी जिस बहादुरी का परिचय दिया उसे भुलाया नहीं जा सकता है। डॉ. शीरिन मसरूर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस तथ्य से परिचित कराया जाना चाहिए कि फिदायीन हमले के समय पाकिस्तान की ओर से लगातार कवर फायरिंग की जा रही थी जो उसके सीधे तौर पर शामिल होने का प्रमाण है। मो. फारूख खान ने कहा कि हमारे वीर जवानों ने अपनी बहादुरी और शहादत से नगरौटा हमले में आयुध भंडार को बचा लिया वरना भारी संख्या में हमारी तोपें, मिसाइल एवं अन्य आधुनिक सैन्य हथियार नष्ट होते।
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