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सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीदा जा सका एक महीने में सिर्फ 50 क्विंटल धान
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जिले में सरकारी धान क्रय केंद्र एक अक्तूबर से खुल गए हैं, लेकिन वहां किसान नहीं पहुंच रहे हैं। एक महीने में केवल छर्रा के धान क्रय केंद्र पर ही 50 क्विंटल धान खरीदा जा सका है। बाकी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और यहां किसानों का इंतजार हो रहा है। इस बार 19 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इसका सबसे बड़ा कारण अलीगढ़ मंडल में मोटे धान (कामन व ग्रेड वन) की पैदावार कम होना भी है। यहां के किसान बासमती एवं सुगंधा चावल उगाते हैं। किसान क्रय केंद्रों पर अपना धान ले जाने की बजाय सीधे व्यवसायियों के पास जाकर बेच रहे हैं।
जिले में करीब 10 हजार हेक्टेयर में धान की पैदावार होती है, जबकि, अधिकांश किसान सुगंधा एवं बासमती चावल की खेती करते हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर सिर्फ मोटा धान ही खरीदा जाता है। उत्पादन के हिसाब से खरीद के लक्ष्य भी तय होते हैं। मगर, अब पिछले साल हुई खरीद के आधार पर इस बार लक्ष्य तय हुए हैं जो कई गुना बढ़े हुए हैं। धान खरीद के लिए जिले में 35 सरकारी क्रय केंद्र खुल गए हैं। हालांकि, अभी तक इन क्रय केंद्रों से किसान नदारद हैं। मोटे धान की आवक न होने से सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने धान क्रय केंद्रों का जायजा लिया। धनीपुर अनाज मंडी में तीन क्रय केंद्रों पर बैनर, कांटे तो लगे हुए हैं, लेकिन अभी तक एक भी दाना धान नहीं खरीदा जा सका है। यही हाल गभाना के सोमना सहकारी समिति स्थित क्रय केंद्र पर भी देखने को मिली। यहां खरीद का बैनर लगा हुआ है। कर्मचारियों के अनुसार अभी तक किसी किसान ने धान क्रय केंद्र के बारे में जानकारी तक नहीं ली है। अतरौली, खैर, इगलास में खुले क्रय केंद्रों पर भी किसान धान लेकर नहीं पहुंचे हैं।
अनाज मंडी में धान के लग रहे ढेर
जिले में धनीपुर, छर्रा, अतरौली, खैर, इगलास, हरदुआगंज, गभाना आदि अनाज मंडियों में बड़ी मात्रा में किसान धान लेकर पहुंच रहे हैं। धान की आवक बढ़ने से मंडियों में चहल-पहल शुरू हो गई है। इससे आढ़ती एवं धान कारोबारियों के चेहरे खिल उठे हैं। अनाज मंडी में इस समय बासमती, शरबती, सुगंधा आदि वैरायटी के धान ही पहुंच रहे हैं। आढ़तों पर धान की कीमत अधिक होने के चलते किसान एमएसपी पर इन वैरायटी की बिक्री नहीं कर रहे हैं।
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सरकारी क्रय केंद्रों पर सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2040 रुपये प्रति क्विंटल है। ग्रेड-एक का धान 2060 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा। क्रय केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में बोरों की उपलब्धता है। इस बार धान की खेती देरी से होने के कारण खरीद शुरू नहीं हो पायी है। उम्मीद है अगले सप्ताह से इसमें और तेजी आएगी।
- राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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जिले में करीब 10 हजार हेक्टेयर में धान की पैदावार होती है, जबकि, अधिकांश किसान सुगंधा एवं बासमती चावल की खेती करते हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर सिर्फ मोटा धान ही खरीदा जाता है। उत्पादन के हिसाब से खरीद के लक्ष्य भी तय होते हैं। मगर, अब पिछले साल हुई खरीद के आधार पर इस बार लक्ष्य तय हुए हैं जो कई गुना बढ़े हुए हैं। धान खरीद के लिए जिले में 35 सरकारी क्रय केंद्र खुल गए हैं। हालांकि, अभी तक इन क्रय केंद्रों से किसान नदारद हैं। मोटे धान की आवक न होने से सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने धान क्रय केंद्रों का जायजा लिया। धनीपुर अनाज मंडी में तीन क्रय केंद्रों पर बैनर, कांटे तो लगे हुए हैं, लेकिन अभी तक एक भी दाना धान नहीं खरीदा जा सका है। यही हाल गभाना के सोमना सहकारी समिति स्थित क्रय केंद्र पर भी देखने को मिली। यहां खरीद का बैनर लगा हुआ है। कर्मचारियों के अनुसार अभी तक किसी किसान ने धान क्रय केंद्र के बारे में जानकारी तक नहीं ली है। अतरौली, खैर, इगलास में खुले क्रय केंद्रों पर भी किसान धान लेकर नहीं पहुंचे हैं।
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अनाज मंडी में धान के लग रहे ढेर
जिले में धनीपुर, छर्रा, अतरौली, खैर, इगलास, हरदुआगंज, गभाना आदि अनाज मंडियों में बड़ी मात्रा में किसान धान लेकर पहुंच रहे हैं। धान की आवक बढ़ने से मंडियों में चहल-पहल शुरू हो गई है। इससे आढ़ती एवं धान कारोबारियों के चेहरे खिल उठे हैं। अनाज मंडी में इस समय बासमती, शरबती, सुगंधा आदि वैरायटी के धान ही पहुंच रहे हैं। आढ़तों पर धान की कीमत अधिक होने के चलते किसान एमएसपी पर इन वैरायटी की बिक्री नहीं कर रहे हैं।
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सरकारी क्रय केंद्रों पर सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2040 रुपये प्रति क्विंटल है। ग्रेड-एक का धान 2060 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा। क्रय केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में बोरों की उपलब्धता है। इस बार धान की खेती देरी से होने के कारण खरीद शुरू नहीं हो पायी है। उम्मीद है अगले सप्ताह से इसमें और तेजी आएगी।
- राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ, जिला खाद्य विपणन अधिकारी